डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। वाशिंगटन और नई दिल्ली के बीच पिछले कुछ महीनों से चले आ रहे तनाव के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2 फरवरी 2026 को एक आश्चर्यजनक व्यापार समझौते की घोषणा की। इस समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर लगे टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है, जबकि रूसी तेल खरीद पर लगाया गया अतिरिक्त 25% दंडात्मक शुल्क भी हटा दिया गया है।
ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी ने रूसी तेल की खरीद बंद करने, अमेरिका और संभावित रूप से वेनेजुएला से तेल खरीदने, अमेरिकी सामानों पर शुल्क शून्य करने और 500 अरब डॉलर के अमेरिकी सामान खरीदने पर सहमति जताई है। हालांकि, पीएम मोदी ने अपने बयान में केवल 18% टैरिफ में कमी की पुष्टि की है और रूसी तेल या अन्य शर्तों पर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की। भारतीय अधिकारियों ने समझौते के कुछ विवरणों की पुष्टि नहीं की है, और कोई लिखित दस्तावेज सार्वजनिक नहीं किया गया है।
अजीत डोभाल की अमेरिका को दो टूक
यह समझौता सितंबर 2025 में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच हुई गोपनीय बैठक से जुड़ा हुआ प्रतीत होता है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, डोभाल ने रुबियो को स्पष्ट संदेश दिया था कि भारत ट्रंप प्रशासन के दबाव में नहीं आएगा और आवश्यकता पड़ने पर उनके कार्यकाल तक इंतजार करने को तैयार है, क्योंकि भारत ने पहले भी शत्रुतापूर्ण अमेरिकी प्रशासनों का सामना किया है। डोभाल ने कहा कि अमेरिका को भारत की सार्वजनिक आलोचना कम करनी चाहिए ताकि संबंध सुधर सकें।
ट्रंप ने अगस्त 2025 में भारत को “मृत” अर्थव्यवस्था करार दिया था और रूसी तेल खरीद के लिए 50% टैरिफ (25% आधार + 25% दंड) लगा दिए थे, जिससे दोनों देशों के संबंध बिगड़ गए थे। डोभाल की बैठक के बाद सितंबर में ट्रंप ने मोदी को जन्मदिन की बधाई दी, और साल के अंत तक दोनों नेताओं ने कई फोन कॉल किए। दिसंबर में नए अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के आगमन से भी प्रयास तेज हुए।
हालांकि समझौते की घोषणा से नई दिल्ली के कई वरिष्ठ अधिकारी हैरान रह गए, क्योंकि उन्हें उस दिन ट्रंप-मोदी कॉल की जानकारी नहीं थी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत-अमेरिका संबंधों में सुधार का संकेत है, लेकिन भारत अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना चाहता है। मोदी ने हाल ही में चीन में पुतिन और शी जिनपिंग से मुलाकात की, यूरोपीय संघ और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते किए, और रूस के साथ संबंध मजबूत रखे हैं।
एशिया ग्रुप की निशा बिस्वाल ने कहा कि यह वैश्विक व्यापार के लिए भारत के खुलने का फायदेमंद कदम है। चैथम हाउस के चिएतिज बाजपेयी ने कहा कि संबंध मजबूत बने हुए हैं, लेकिन पहले का उत्साह अब कम हो गया है। कार्नेगी एंडोमेंड के मिलान वैष्णव ने जोर दिया कि अमेरिका भारत के लिए पूंजी, प्रौद्योगिकी और निवेश का महत्वपूर्ण स्रोत बना रहेगा।