नीलू रंजन, नई दिल्ली। ईडी ने विदेशी सहायता से भारत की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे की साजिश का पर्दाफाश किया है। इस सिलसिले में ईडी ने विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून (फेमा) के उल्लंघन का मामला दर्ज करते हुए दिल्ली और गाजियाबाद में कंपनी के ठिकानों पर छापा मारा। घोषित रूप में कंपनी आर्गेनिक खेती को बढ़ावा देने के लिए काम करने का दावा करती थी।
लेकिन असल में भारत में कोयला के इस्तेमाल के खिलाफ प्रचार में जुटी थी। कंपनी के संस्थापक हरप्रीत ¨सह का पाकिस्तान कनेक्शन भी सामने आ रहा है। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार हरदीप सिंह और उनकी पत्नी ज्योति अवस्थी द्वारा संचालित सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड कंसलटेंसी के नाम पर विदेशी धन लाते थे। 2021 से 2025 तक छह करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा में मिलने के सबूत मिले हैं।
खासबात यह है कि कंसलटेंसी की आड़ में जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संरक्षण से जुड़ी अंतरराष्ट्रीय एनजीओ से धन आ रहा था। जिन विदेशी एनजीओ से धन मिलने की बात सामने आ रही है, उनमें क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क, डील, ओएस्टर एचआर और स्टैंड अर्थ शामिल हैं। जाहिर है कि यह विदेशी मुद्रा प्रबंधन कानून का सीधा उल्लंघन है। खबर लिखे जाने तक छापे की कार्रवाई जारी थी।
सूत्रों के अनुसार हरदीप सिंह और उनकी पत्नी विदेशी मदद से भारत में फासिल फ्यूल नान प्रोलिफेरेशन ट्रीटी (एफएफ-एनपीटी के माहौल तैयार करने का काम कर रही थी। इसके लिए डवलपिंग वैल्यूस एंड आइडियल्स फार ए फासिल फ्यूल नान प्रोलिफेरेशन ट्रीटी नाम से विचार विमर्श के लिए पेपर भी तैयार किया था। ध्यान देने की बात है कि भारत अब भी अपनी उर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा कोयला से प्राप्त करता है।
यदि भारत एफएफ-एनपीटी को मानता है कि ऊर्जा जरूरतों के लिए मुख्यतौर पर कोयला का इस्तेमाल बंद करना होगा। जबकि भारत के पास कोयला का बड़ा भंडार है। हरदीप सिंह ब्रीद पाकिस्तान के बैनर तले हुए इंटरनेशनल क्लाइमेट चेंज कांफ्रेंस में शामिल होने पाकिस्तान भी गया था। फिलहाल जेल में बंद लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुग ने भी इस कांफ्रेंस में हिस्सा लिया था।