डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के “आदित्य” ने सौर तूफानों की पहेली सुलझा दी है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को कहा कि आदित्य-एल1 सौर मिशन से जानकारी मिली है कि शक्तिशाली सौर तूफान पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को कैसे प्रभावित कर सकता है।
इसरो ने बयान में कहा, सबसे गंभीर प्रभाव सौर तूफान के अशांत (टर्बुलेंट) क्षेत्र के टकराने के दौरान देखे गए। इसरो ने कहा कि यह अध्ययन अंतरिक्ष मौसम से जुड़ी घटनाओं को समझने और उनके रियल टाइम आकलन की अहमियत को रेखांकित करता है।
अंतरिक्ष की बड़ी मौसमी घटना का विस्तृत विश्लेषण
दिसंबर 2025 में ‘एस्ट्रोफिजिकल जर्नल’ में प्रकाशित महत्वपूर्ण अध्ययन में इसरो के विज्ञानियों और शोध छात्रों ने अक्टूबर 2024 में पृथ्वी को प्रभावित करने वाली अंतरिक्ष की बड़ी मौसमी घटना का विस्तृत विश्लेषण किया।
इस अध्ययन में भारत की पहली सौर वेधशाला आदित्य-एल1 से प्राप्त डाटा के साथ-साथ अन्य अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष अभियानों के डाटा का इस्तेमाल किया गया, ताकि सूर्य से निकले सौर प्लाज्मा के विशाल विस्फोट के पृथ्वी पर पड़े प्रभाव को समझा जा सके।
विद्युत ग्रिड अवसंरचना प्रभावित होती है
बयान में कहा गया, अंतरिक्ष मौसम (स्पेस वेदर) से तात्पर्य अंतरिक्ष में उत्पन्न उन परिस्थितियों से है, जो सूर्य पर होने वाली अस्थायी गतिविधियों जैसे सौर प्लाज़्मा विस्फोट के कारण बनती हैं। इससे पृथ्वी पर उपग्रहों, संचार एवं दिशा सूचक सेवाओं तथा विद्युत ग्रिड अवसंरचना प्रभावित होती हैं।
इसरो के अनुसार सौर तूफान के टर्बुलेंट क्षेत्र ने पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र को अत्यधिक रूप से संकुचित कर दिया, जिससे वह असामान्य रूप से पृथ्वी के बहुत करीब आ गया और कुछ समय के लिए भू-स्थिर कक्षा (जियोस्टेशनरी आर्बिट) में स्थित कुछ उपग्रह उनके संपर्क में आ गए। ऐसी घटना केवल अत्यंत गंभीर अंतरिक्ष मौसम घटनाओं के दौरान ही होती है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)