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‘भारत के बिना मेरा कारोबार नहीं चल पाता’, जर्मनी को इस मुश्किल से बाहर निकाल रहे भारतीय युवा

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Mar 27, 2026


इशु गरिया ने भारत में कंप्यूटर की नौकरी ढूंढने के बजाय जर्मनी में बेकर बनना चुना
इमेज कैप्शन, इशु गरिया ने भारत में आईटी सेक्टर में नौकरी ढूंढने के बजाय जर्मनी में बेकर बनना चुना

जर्मनी इस समय कुशल कामगारों की कमी से लगातार जूझ रहा है.

एक तरफ़ बुज़ुर्ग कर्मचारी रिटायर हो रहे हैं, और दूसरी तरफ़ उनकी जगह लेने के लिए पर्याप्त युवा उम्मीदवार नहीं मिल रहे. इस समस्या से निपटने के लिए यह भारत से आने वाले कामगारों को अब पहले से ज़्यादा मौक़ा दे रहा है.

हैंडिर्क फ़ॉन उंगर्न स्टर्नबर्ग के लिए इसकी शुरुआत फरवरी 2021 में उनके इनबॉक्स में आए एक ईमेल से हुई. यह ईमेल भारत से आया था.

संदेश का सार कुछ यूँ था: “हमारे पास बहुत से युवा और मेहनती लोग हैं, जो व्यावसायिक प्रशिक्षण लेना चाहते हैं, और हम जानना चाहते हैं कि क्या आपकी इसमें दिलचस्पी है.”

उस समय स्टर्नबर्ग दक्षिण पश्चिम जर्मनी में फ़्राइबर्ग चैंबर ऑफ़ स्किल्ड क्राफ़्ट्स में काम कर रहे थे. यह एक व्यापारिक संगठन है, जो राजमिस्त्रियों और कारपेंटर्स से लेकर कसाइयों और बेकर्स तक, कुशल कामगारों और उन्हें काम देने वाली कंपनियों का प्रतिनिधित्व करता है.

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