डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में भ्रष्टाचार कम हुआ है। मंगलवार को जारी करप्शन परसेप्शन इंडेक्स (सीपीआइ) 2025 में भारत ने पांच स्थानों की छलांग लगाते हुए 182 देशों में 91वां स्थान हासिल किया है। वैश्विक गैर सरकारी संगठन ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल के नवीनतम सीपीआइ के अनुसार, भारत का स्कोर पिछले वर्ष की तुलना में एक अंक बढ़ा है, जबकि इसकी रैंकिंग 96 से सुधरकर 91वीं हो गई है। सीपीआइ सार्वजनिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार के स्तर के अनुसार दुनियाभर में 182 देशों और क्षेत्रों की रैंकिंग करता है। 0 (अत्यधिक भ्रष्ट) से 100 (अन्यधिक पारदर्शी या ईमानदारी ) को दर्शाता है।
डेनमार्क 89 अंक के साथ सबसे ईमानदार देश है। उसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर का स्थान है, वहीं दक्षिण सूडान और सोमालिया दोनों नौ- नौ अंक के साथ सबसे भ्रष्ट हैं। इसके बाद वेनेजुएला है। अमेरिका को 29वीं रैंक मिली है, ब्रिटेन ने 20वीं रैंक हासिल की है।
रिपोर्ट में कहा गया है, 2025 का करप्शन परसेप्शन इंडेक्स या भ्रष्टाचार धारणा सूचकांक दिखाता है कि भ्रष्टाचार दुनिया के हर हिस्से में गंभीर खतरा बना हुआ है। नेताओं को शक्ति के दुरुपयोग से निपटने के लिए कार्रवाई करनी चाहिए। दुनिया के कई हिस्सों में सरकार विरोधी प्रदर्शन दिखाते हैं कि लोग सुधार की मांग कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार जब भ्रष्टाचार की जांच करने के लिए पत्रकारों पर हमला किया जाता है या उनकी हत्या कर दी जाती है, तो सत्ता को प्रभावी ढंग से जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता है और भ्रष्टाचार और भी बदतर हो जाता है। 2012 से लेकर अब तक विश्व स्तर पर गैर-संघर्ष क्षेत्रों में 829 पत्रकारों की हत्या की जा चुकी है। इन हत्याओं में से 90 प्रतिशत से अधिक उन देशों में हुई हैं जिनका सीपीआइ स्कोर 50 से कम है।
रिपोर्ट के अनुसार 31 देशों ने 2012 से अपने भ्रष्टाचार के स्तर में काफी कमी की है, बाकी देश इस समस्या से निपटने में विफल रहे हैं। वे इसी अवधि के दौरान स्थिर रहे हैं या स्थिति और खराब हो गई है। वैश्विक औसत 42 के नए निम्न स्तर पर गिर गया है, जबकि दो-तिहाई से अधिक देशों का स्कोर 50 से नीचे है। आम लोग इसकी कीमत चुका रहे हैं।