डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों (NIA) ने मिजोरम सीमा के पास एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। रूसी एजेंसियों से मिली जानकारी के आधार पर एनआईए ने अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों को गिरफ्तार किया था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी और यूक्रेनी नागरिकों का यह गिरोह टूरिस्ट वीजा की आड़ में म्यांमार के हथियारबंद गुटों को ट्रेनिंग दे रहा था।
इन सभी पकड़े गए लोगों पर भारत के खिलाफ आतंकी साजिश रचने का आरोप है। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैन डाइक इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड है।
NIA ने 7 आरोपी किए गिरफ्तार
खुद को युद्ध विशेषज्ञ बताने वाले और सुरक्षा फर्म संस आफ लिबर्टी इंटरनेशनल (एसओएलआइ) के संस्थापक डाइक को 13 मार्च को नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर तहत गिरफ्तार किया गया था।
डाइक को यूक्रेन के छह नागरिकों हुरबा पेट्रो, स्लिवियाक तारास, इवान सुकमानोव्स्की, स्टेफनकीव मारियन, होनचारुक मैक्सिम और का मिंस्की विक्टर के साथ गिरफ्तार किया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, यह 14-15 लोगों का गिरोह था। NIA इनमें से आठ और यूक्रेनियन की तलाश कर रही है। ये लोग यूरोप से बड़े पैमाने पर ड्रोन पहुंचा रहे थे, जो संभवतः भारत से जुड़े उग्रवादी समूहों तक पहुंच सकते थे।
आतंकी साजिश का पर्दाफाश
अमेरिका और यूक्रेन से ये लोग टूरिस्ट वीजा पर भारत आए थे, लेकिन बिना इजाजत मिजोरम चले गए और यहां से पड़ोसी देश म्यांमार की सीमा में दाखिल हुए।
एनआइए ने अदालत को यह भी बताया है कि आरोपित अज्ञात सशस्त्र ऑपरेटरों के संपर्क में थे, जो AK-47 राइफलों से लैस थे, और उन्होंने आतंकी और अवैध गतिविधियों में मदद की। प्रतिबंधित भारतीय विद्रोही संगठनों को भी हथियार, प्रशिक्षण दिया।
इंटरनेट मीडिया प्रोफाइल के अनुसार डाइक ने सीरिया, लीबिया, अफगानिस्तान और इराक में जंग में भाग लिया, जिसमें 2011 का लीबियाई गृह युद्ध भी शामिल है। वहां उसे पांच महीने से अधिक समय तक युद्ध बंदी के रूप में रखा गया था।