डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले को बरकरार रखा, जिसमें तमिलनाडु के मदुरै में तिरुपरनकुंड्रम पहाडि़यों पर पशु बलि पर रोक लगाई गई थी और मुस्लिमों को नमाज के सीमित अधिकार दिए गए थे।
जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने हाई कोर्ट के अक्टूबर, 2025 के आदेश को संतुलित बताते हुए उसमें दखल देने से इन्कार कर दिया।
मौलिक अधिकार का उल्लंघन
हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका में दावा किया गया था कि यह धर्म की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है। याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि इलाके में कभी कानून-व्यवस्था की समस्या नहीं रही, इस पर पीठ ने कहा कि अगर ऐसी समस्या नहीं होती तो शांति समिति की बैठक नहीं होती।
हाईकोर्ट ने दी थी बकरीद और रमजान के इजाजत
मद्रास हाई कोर्ट ने बकरीद और रमजान के दौरान नेल्लीथोपू इलाके में इस शर्त पर नमाज और सभाओं की इजाजत दी थी कि इससे सुब्रमण्य स्वामी मंदिर से जुड़े पारंपरिक मार्गों पर कोई असर न पड़े। साथ ही सिविल कोर्ट फैसला आने तक पशु बलि और मांसाहारी भोजन पकाने, लाने और परोसने की इजाजत नहीं होगी। (समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)