जेएनएन, ग्वालियर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने 30 वर्षीय दिव्यांग दुष्कर्म पीड़िता विधवा को गर्भपात की अनुमति दे दी है।
जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के ने कहा कि करीब 19 सप्ताह पांच दिन की गर्भवती पीड़िता की गरिमा, मानसिक स्थिति और भविष्य को देखते हुए यह जरूरी है।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि किसी भी महिला को उसकी इच्छा के विरुद्ध गर्भ जारी रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने पीड़िता की शारीरिक और मानसिक स्थिति को सर्वोपरि मानते हुए यह अनुमति दी।
पीड़िता दिव्यांग है और सुनने-बोलने में असमर्थ है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया। पीडि़ता की ओर से याचिका उसके भाई ने दायर की थी। उसमें बताया गया कि पीड़िता के पति की चार साल पहले मौत हो चुकी है।
पीड़िता का देवर उसकी देखभाल करता है। 11 मार्च को जब मैं उसके ससुराल मिलने पहुंचा तो सास, ससुर और दो देवर उसे पीट रहे थे। अस्पताल में जांच के दौरान पता चला कि वह करीब 19 सप्ताह पांच दिन की गर्भवती है।
आरोप है कि यह गर्भ यौन शोषण का नतीजा है। कोर्ट के आदेश पर कमलाराजा अस्पताल और जीआर मेडिकल कालेज, ग्वालियर के मेडिकल बोर्ड ने पीडि़ता की जांच की। रिपोर्ट में गर्भपात को सुरक्षित बताया गया।
इसके बाद हाई कोर्ट ने गर्भपात कराने के आदेश दिए। साथ ही भ्रूण का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखने, पीडि़ता की पहचान गोपनीय रखने और पूरी प्रक्रिया मुफ्त कराने के निर्देश भी दिए।