संजय मिश्र, नई दिल्ली। एसआइआर को लेकर विवादों के बीच ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को महाभियोग प्रस्ताव के जरिए घेरने का विपक्षी दलों का दांव बजट सत्र में कामयाब नहीं हुआ है।
संसद के दोनों में विपक्ष के 193 सांसदों की ओर से ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 20 दिन पहले दिए गए महाभियोग प्रस्ताव नोटिस दी गई थी। लेकिन न तो उस पर कोई सक्रिय पहल नहीं हुई।
नहीं चला विपक्ष का दांव
बजट सत्र में अब केवल दो दिन ही शेष हैं और ऐसे में महाभियोग प्रस्ताव के जरिए मुख्य चुनाव आयुक्त को कठघरे में खड़ा करने की विपक्ष की इस रणनीति के सफल होने की कोई गुंजाइश नहीं है।
नगदी बरामद होने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लंबे समय से विचाराधीन महाभियोग प्रस्ताव पर भी वर्तमान सत्र में कोई विधायी पहल आगे बढ़ने की संभावना नहीं है।
महाभियोग प्रस्ताव के बाद सामान्य रूप से वेरिफिकेशन की प्रक्रिया होती है लेकिन इस नोटिस पर किसी भी सदन में आगे की प्रक्रिया पर कोई पहल आसन की ओर से सामने नहीं आयी है।
SIR पर भारी विवाद
पश्चिम बंगाल में एसआइआर पर भारी विवाद के मद्दनेजर तृणमूल कांग्रेस ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की इस पहल को लेकर आक्रामक है। वैसे कांग्रेस समेत तमाम विपक्षी दल भी इसका समर्थन कर रहे हैं।
कांग्रेस के वरिष्ठ राज्यसभा सांसद अभिषेक सिंघवी ने सोमवार को सदन में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर कोई पहल न होने का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 19 दिन हो गए हैं पर आसन ने अभी तक यह नहीं बताया है कि नोटिस स्वीकार या अस्वीकार किया गया है। उपसभापति ने कहा कि वे इसे देखेंगे।
जाहिर तौर पर यह तृणमूल कांग्रेस के दांव के प्रतिकूल है इसीलिए उसके नेताओं डेरेक ओब्रायन और सागरिका घोष ने सिंघवी की बात का समर्थन करते हुए कहा भी कि विपक्ष के 193 सांसदों ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करके उसे जमा किया पर आज तक न कोई रसीद मिली, न कोई जवाब।
सागरिका ने सवाल किया कि इस महाभियोग प्रस्ताव की मौजूदा स्थिति क्या है? आखिर यह चुप्पी क्यों? इतने गंभीर संवैधानिक मामले पर चुप्पी और पूरी तरह से अनदेखी करना कोई जवाब नहीं हो सकता। जहां तक इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा के खिलाफ लंबे अर्से से विचाराधीन महाभियोग प्रस्ताव की बात है तो अभी कमेटी उनके खिलाफ आरोपों की जांच कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट ने बीते 16 जनवरी जांच कमेटी बनाने के खिलाफ जस्टिस वर्मा की चुनौती को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि लोकसभा अध्यक्ष ने कोई गलत काम नहीं है और प्रक्रिया के तहत इसका गठन हुआ है।