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मिडिल ईस्ट जंग: रूस-फ्रांस-ईयू से जयशंकर की प्राइवेट टॉक, क्या है भारत का कूटनीतिक प्लान?

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Mar 11, 2026


जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले के बाद पैदा हुए गंभीर सुरक्षा संकट के बीच भारत ने क्षेत्र और दुनिया के प्रमुख देशों के साथ उच्चस्तरीय कूटनीतिक संवाद तेज कर दिया है।

इसी क्रम में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार (11 मार्च) को फ्रांस, रूस और यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों से अलग-अलग टेलीफोन पर बातचीत की। इसके एक दिन पहले उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची से भी बात और द्विपक्षीय संबंधों के साथ ही पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा की है।

ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर चर्चा

जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने फ्रांस के विदेश मंत्री जीन नोए बैरोट, रूस के विदेशणंत्री सर्गेई लावरोव व ईयू की विदेश नीति प्रमुख काया कलास से क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की। माना जा रहा है कि जयशंकर व लावरोव के बीच हुई वार्ता में ऊर्जा खरीद के मुद्दे पर चर्चा हुई है।

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घटनाक्रमों को लेकर लगातार परामर्श जारी

इन वार्ताओं में पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय स्थिरता और तनाव कम करने के प्रयासों पर विचार किया गया। जयशंकर ने अपने संदेश में कहा कि विभिन्न साझेदार देशों के साथ संवाद के जरिए हालात पर नजर रखी जा रही है और क्षेत्रीय घटनाक्रमों को लेकर लगातार परामर्श जारी है। ईरान के विदेश मंत्री से हुई वार्ता के बारे में जयशंकर ने बताया कि इस वार्ता में क्षेत्रीय स्थिति और ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना

पिछले कुछ दिनों में जयशंकर और अरगची के बीच यह दूसरी बातचीत है। भारत और ईरान के बीच इस निरंतर संपर्क का असर भी देखने को मिला है। दोनों देशों के समन्वय से ईरान में रह रहे भारतीय छात्रों को सुरक्षित बाहर निकालने की योजना तैयार की गई है, जिसके तहत उन्हें पड़ोसी देश अर्मेनिया के रास्ते बाहर लाने की व्यवस्था की जा रही है।

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पश्चिम एशिया में तनाव

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने भी बुधवार को बताया है कि पश्चिम एशिया में तनाव की शुरुआत के बाद पीएम नरेन्द्र मोदी के स्तर पर जहां कई देशों के शीर्ष नेताओं के साथ विमर्श किया गया है वहीं विदेश मंत्री जयशंकर भी अपने समकक्षों से लगातार बात कर रहे हैं। केवल स्थानीय हालात या सैन्य तनाव पर ही चर्चा नहीं हो रही है, बल्कि पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा भी भारत की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित

संपर्क बनाने का एक बड़ा उद्देश्य इन देशों में मौजूद भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और जरूरत पड़ने पर निकासी जैसी व्यवस्थाएं समय रहते की जा सकें। जायसवाल ने बताया है कि खाड़ी क्षेत्र के देशों में एक करोड़ भारतीय रहते हैं और इनकी सुरक्षा सरकार के लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है। अभी तक खाड़ी के सभी देशों ने भारतीय नागरिकों का बहुत ही बेहतर तरीके से ध्यान रखा है।

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