• Fri. Feb 20th, 2026

24×7 Live News

Apdin News

मुफ्त खाना मिलेगा तो लोग काम क्यों करेंगे? सुप्रीम कोर्ट ने पूछे तीखे सवाल

Byadmin

Feb 20, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चुनावों से ठीक पहले राज्य सरकारों द्वारा घोषित मुफ्त उपहारों और सब्सिडी की कड़ी आलोचना करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को पूछा कि यह संस्कृति कब तक जारी रहेगी? इससे देश के दीर्घकालिक आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न होती है। राज्यों को रोजगार देने के लिए काम करना चाहिए। अगर आप सुबह से शाम तक मुफ्त खाना, मुफ्त साइकिल, मुफ्त बिजली देना शुरू कर देंगे तो काम कौन करेगा?

तमिलनाडु विद्युत वितरण निगम लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी की। कंपनी ने बिजली (संशोधन) नियम, 2024 के उपनियम 23 को चुनौती दी है। इस उपनियम के अनुसार, बिजली आपूर्ति की स्वीकृत लागत और उपभोक्ताओं से वसूले गए शुल्क के बीच का अंतर तीन प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। द्रमुक शासित तमिलनाडु में इसी साल चुनाव होना है।

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा-यह समझना स्वाभाविक है कि आर्थिक रूप से अक्षम लोगों को सुविधाएं देनी पड़ती हैं। ऐसे बच्चे हैं जो शिक्षा का खर्च वहन नहीं कर सकते, इसलिए राज्य को उन्हें शिक्षा प्रदान करनी चाहिए।

ऐसे बच्चे हैं, जो प्रतिभाशाली हैं, लेकिन मेडिकल कालेजों में पढ़ने का खर्च वहन नहीं कर सकते। राज्य को उनकी मदद करनी चाहिए। लेकिन, जिनके पास सभी साधन उपलब्ध हैं और वे धनी हैं, फिर भी मुफ्त सहायता सबसे पहले उनकी जेब में जाती है।

क्या अब इस नीति पर पुनर्विचार करने का समय नहीं आ गया है? प्रधान न्यायाधीश ने कहा, अब समय आ गया है कि सभी दिग्गज राजनेता, पार्टियां और सामाजिक कार्यकर्ता इस पर विचार करें। संतुलन होना जरूरी है।

कुछ लोग शिक्षा या बुनियादी जीवन यापन की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकते। यह राज्य का कर्तव्य है कि वह ये सुविधाएं प्रदान करे। लेकिन जो लोग मुफ्त सुविधाओं का लाभ सबसे पहले उठा रहे हैं, क्या उस पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है? हम किस तरह की संस्कृति विकसित कर रहे हैं?

सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल

बिजली बिल चुकाने में असमर्थ लोगों की मदद समझ में आती है। लेकिन, जो लोग भुगतान कर सकते हैं और जो नहीं कर सकते, उनके बीच अंतर किए बिना मुफ्त बिजली देना क्या तुष्टीकरण नहीं है? राज्य सरकारें विकास परियोजनाओं पर खर्च करने के बजाय दो काम करती हैं-कर्मचारियों को वेतन देना और सरकारी सहायता राशि का वितरण।

अस्पतालों और सड़कों के निर्माण जैसे सभी विकास कार्यों को दरकिनार कर दिया गया है।-हम किसी एक राज्य की बात नहीं कर रहे हैं, बल्कि सभी राज्यों की बात कर रहे हैं। यह नियोजित खर्च है। आप बजट प्रस्ताव क्यों नहीं पेश करते और यह स्पष्टीकरण क्यों नहीं देते कि यह बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों पर मेरा खर्च है?

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

By admin