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भारत और बांग्लादेश के क्रिकेट प्रशंसकों और समर्थकों के बीच सोशल मीडिया पर एक-दूसरे पर कीचड़ उछालने या एक-दूसरे को नीचा दिखाते हुए ट्रोल करने की संस्कृति कई वर्षों से चली आ रही है.
लेकिन हाल में इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफ़िज़ुर रहमान को हटाने और इसके विरोध में बांग्लादेश के भारत में होने वाले टी-20 विश्व कप के मैच खेलने से इंकार करने के बाद दोनों देशों के बीच प्रतिद्वंद्विता अब औपचारिक रूप से सामने आ गई है.
बीते डेढ़ साल के दौरान अल्पसंख्यकों के कथित उत्पीड़न और दूतावासों की सुरक्षा जैसे विभिन्न मुद्दों पर दोनों देशों के बीच कूटनयिक संबंधों में काफ़ी गिरावट आई है.
इस दौरान दोनों देशों के विदेश मंत्रालय की ओर से एक-दूसरे के राजदूतों या उच्चायुक्तों को बुलाकर किसी मामले की निंदा या किसी मुद्दे पर विरोध जताया जाता रहा है.
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दोनों देशों के कई नेता भी समय-समय पर सामने वाले देश की आलोचना कर या उसके ख़िलाफ़ अपमानजनक बयान देकर माहौल को गरमाते रहे हैं.
दोनों देशों के आपसी संबंधों में बढ़ने वाली कड़वाहट अब तक सोशल मीडिया पर कीचड़ उछालने या एक-दूसरे के ख़िलाफ़ कूटनयिक बयानबाज़ी तक ही सीमित थी. लेकिन अब इसका असर क्रिकेट पर भी नज़र आने लगा है.
बांग्लादेश के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के फ़ैसले से साफ़ है कि वह इस बार क्रिकेट के मुद्दे पर दोनों देशों में पैदा होने वाले विवाद को बेहद गंभीरता से ले रहा है. मंत्रालय ने सोमवार को जारी एक निर्देश में बांग्लादेश में आईपीएल मैचों के प्रसारण पर रोक लगा दी थी.
अब तक भारत और पाकिस्तान के बीच ही आपसी संबंधों में कड़वाहट का असर क्रिकेट के खेल पर पड़ता नज़र आता था.
लेकिन मुस्तफ़िज़ुर रहमान के मुद्दे पर हाल में पैदा होने वाले विवाद ने अब भारत और बांग्लादेश के क्रिकेट संबंधों को भी उस मोड़ पर पहुंचा दिया है जहां यह कहना मुश्किल है कि वो कब पहले जैसे हो पाएंगे.
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दोनों देशों में क्रिकेट बोर्ड के फ़ैसले की आलोचना
मुस्तफ़िज़ुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स की टीम से हटाने के फ़ैसले से भारत में कुछ हिंदूवादी राजनीतिक विचारधारा वाले लोग और संगठन ख़ुश हैं.
दूसरी ओर टी20 विश्व कप के अपने मैचों को भारत से हटाने की मांग में इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (आईसीसी) को बांग्लादेश बोर्ड की ओर से भेजे गए पत्र ने देश के भारत विरोधी विचारधारा वाले लोगों को निश्चित तौर पर राहत पहुंचाई है.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के खेल सलाहकार आसिफ़ नज़रुल ने अपने वेरिफ़ाइड फ़ेसबुक पेज पर स्टेटस में लिखा है, “मैंने बांग्लादेश के विश्व कप मैचों को श्रीलंका में स्थानांतरित करने के लिए आईसीसी से अनुरोध करने का निर्देश दिया है.”
उन्होंने अपने इस स्टेटस की अंतिम लाइन में लिखा है, “ग़ुलामी के दिन ख़त्म हो गए.”
हालांकि, बुधवार को बीसीबी ने एक बयान जारी किया जिसमें उसने कहा है कि इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल ने उसे इस साल होने वाले टी-20 वर्ल्ड कप में बांग्लादेश की टीम की बिना अड़चन के पूरी भागीदारी सुनिश्चित करने का भरोसा दिलाया है.
बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने उन मीडिया रिपोर्टों का भी खंडन किया जिनमें ये कहा गया है कि बोर्ड को इस संबंध में अल्टीमेटम दिया गया था.
लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इस मुद्दे पर दोनों देशों की ओर से किए गए फ़ैसले के दौरान क्रिकेट कूटनीति की तुलना में राजनीतिक विचारों को तरजीह दी गई है.
भारत के सांसद समेत क्रिकेट से जुड़े कई लोगों ने मुस्तफ़िज़ुर रहमान को केकेआर की टीम से हटाने के निर्देश देने के फ़ैसले की आलोचना की है.
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने न्यूज़ एजेंसी एएनआई से बातचीत में मुस्तफ़िज़ुर को टीम से हटाने के फ़ैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे ‘ग़ैर-ज़िम्मेदाराना’ क़रार दिया है. उनका कहना था कि बीसीसीआई का फ़ैसला ‘बेहद शर्मनाक’ है, यह एक खेल से जुड़े मुद्दे का पूरी तरह ग़ैर-ज़रूरी राजनीतिकरण है.
थरूर ने कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखा जाना चाहिए और राजनीतिक विफलताओं का बोझ उस पर नहीं डाला जाना चाहिए. उनका कहना था कि सोशल मीडिया के आक्रोश के आधार पर नीतिगत फ़ैसले लेना ‘चिंताजनक’ है.
भारतीय क्रिकेट बोर्ड के पूर्व प्रशासक और लेखक रामचंद्र गुहा ने एक्स पर अपनी एक पोस्ट में लिखा है, “यह एक ‘बेहद नासमझी भरा’ फ़ैसला है. उन्होंने टिप्पणी की है कि भारत के लिए ‘राष्ट्रीय हित’ में बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध बनाए रखना उचित है.”
इसी तरह बांग्लादेश में क्रिकेट से जुड़े कई लोगों का मानना है कि बांग्लादेश का भारत में विश्व कप नहीं खेलने का फ़ैसला ‘बेहद कड़े नज़रिए’ से लिया गया है.
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देश के निजी टीवी चैनल जमुना टेलीविज़न के खेल संपादक तहमीद अमित का कहना है कि मुस्तफ़िज़ुर रहमान के केकेआर की टीम से हटाने के फ़ैसले के विरोध में बांग्लादेश बीसीसीआई के समक्ष विरोध जताने या आईसीसी से इसकी शिकायत करने जैसे फ़ैसले कर सकता था.
वो कहते हैं, “बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) आईसीसी से सुरक्षा के लिए ज़रूरी क़दम उठाने को कह सकता था. उसके बाद सुरक्षा व्यवस्था से संतुष्ट नहीं होने की स्थिति में वो विश्व कप खेलने के लिए भारत नहीं जाने का फ़ैसला कर सकता था. बेहतर होता कि वो शुरुआत में ही इतना कड़ा फ़ैसला नहीं लेता.”
उनका मानना है कि विश्व कप जैसे आईसीसी के अहम आयोजन में नहीं खेलने का फ़ैसला करते समय दीर्घकालिक क्रिकेट हितों की बजाय राजनीतिक विचारों को प्राथमिकता दी गई है.
अमित कहते हैं, “यह कहा जा सकता है कि राजनीतिक पृष्ठभूमि और सरकार के कड़े रवैए के कारण ही बीसीबी को मजबूरी में यह फ़ैसला करना पड़ा है. बोर्ड के कई पदाधिकारी इतना कड़ा फ़ैसला लेने के पक्ष में नहीं थे. वो जानते थे कि ऐसे फ़ैसलों से कितना नुक़सान हो सकता है.”
आईसीसी से मिलने वाले धन के अलावा बीसीबी की आय का एक बड़ा हिस्सा द्विपक्षीय सिरीज़ के प्रसारण के अधिकार से आता है. मौजूदा परिस्थिति में इस साल अगस्त-सितंबर में भारत-बांग्लादेश सिरीज़ भी ख़तरे में पड़ सकती है और इसके लिए बीसीबी को भारी मुआवज़ा देना पड़ सकता है.
हालांकि भारतीय आलोचकों की तरह बांग्लादेशी विशेषज्ञ भी इस बात को लेकर असमंजस में हैं कि बीसीसीआई ने मुस्तफ़िज़ुर रहमान को पहले आईपीएल में शामिल करने और बाद में केकेआर की टीम से बाहर करने का इतना ज़िद्दी फ़ैसला क्यों लिया.
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इस विवाद में अब तक क्या-क्या हुआ है?
कोलकाता नाइट राइडर्स ने आईपीएल 2026 के लिए हुई नीलामी में बांग्लादेश के तेज़ गेंदबाज़ मुस्तफ़िज़ुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपये में ख़रीदा था. इस नीलामी का आयोजन बीते साल 16 दिसंबर को अबू धाबी में किया गया था.
उसके बाद से ही भारत के कई हिंदुत्ववादी संगठनों ने मुस्तफ़िज़ुर को टीम में शामिल करने के विरोध में कोलकाता नाइट राइडर्स और उसके मालिक शाहरुख़ ख़ान के ख़िलाफ़ अभियान शुरू कर दिया. उनकी दलील थी कि केकेआर ने भारतीयों की भावनाओं की अनदेखी करते हुए बांग्लादेशी खिलाड़ी को अपनी टीम में शामिल किया है.
उनके पास इस आरोप की वजह यह थी कि भारत के हिंदुत्ववादी संगठनों ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के कथित उत्पीड़न और उनकी सुरक्षा के मुद्दे पर हाल में दिल्ली में बांग्लादेश उच्चायोग तक पदयात्रा के अलावा कई बार विरोध भी जताया था. इसी वजह से उन्होंने दलील दी कि बांग्लादेशी खिलाड़ी को टीम में शामिल करने का मतलब भारतीयों की भावना का अपमान करना है.
इस मुद्दे पर तेज़ होते विरोध को ध्यान में रखते हुए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने कोलकाता नाइट राइडर्स टीम प्रबंधन को मुस्तफ़िज़ुर रहमान को टीम से रिलीज़ करने का निर्देश दिया.
बीसीसीआई के सचिव देवजीत सैकिया ने अपने बयान में इसकी कोई ठोस वजह तो नहीं बताई. लेकिन उनका कहना था कि हाल की घटनाओं की पृष्ठभूमि में ही बीसीसीआई ने यह फ़ैसला किया है. कोलकाता नाइट राइडर्स ने उसी दिन बताया था कि मुस्तफ़िज़ुर रहमान को टीम से रिलीज़ कर दिया गया है.
उसके बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड ने अगले 24 घंटों के दौरान इस मुद्दे पर दो बार बैठक की. बोर्ड ने रविवार को जारी अपने बयान में कहा कि बांग्लादेश अगले महीने होने वाले टी-20 विश्वकप के मैचों में खेलने के लिए अपनी टीम भारत नहीं भेजेगा. बोर्ड का कहना था कि वो आईसीसी से बांग्लादेश के मैचों को भारत की बजाय किसी और जगह आयोजित करने का औपचारिक अनुरोध करेगा.
बीसीबी ने अपने बयान में बांग्लादेश टीम की सुरक्षा पर चिंता को इसका कारण बताया था. हालांकि उसमें इस बात का ज़िक्र नहीं किया गया कि क्या मुस्तफ़िज़ुर रहमान को सुरक्षा कारणों से आईपीएल की टीम से हटाने का निर्देश दिया गया था.

क्रिकेट वेबसाइट ईएसपीएन क्रिकइन्फो की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, इस बीच बीसीबी ने बीसीसीआई को पत्र भेजकर इस बात पर स्पष्टीकरण मांगा है कि आईपीएल की नीलामी में मुस्तफ़िज़ुर को शामिल होने की अनुमति मांगने वाला पत्र भेजने के बावजूद उनको टीम से क्यों हटा दिया गया.
वेबसाइट की ख़बर में कहा गया है कि बोर्ड ने इस पत्र में खिलाड़ियों की सुरक्षा पर चिंता का कोई ज़िक्र नहीं किया है.
दोनों देशों के एक तबके के मन में दबी नफ़रत की भावना पांच अगस्त, 2024 के बाद से ही बाहर आने लगी थी. बीते डेढ़ साल के दौरान दोनों देशों के बीच कूटनयिक संबंधों में कड़वाहट के बावजूद क्रिकेट के संबंधों पर उसका कोई सीधा असर नहीं पड़ा था.
ऐसा नहीं है कि यह लड़ाई सिर्फ़ सोशल मीडिया पर ट्रोल या मीम तक सीमित थी. कई बार मुख्यधारा की मीडिया ने भी ‘मौका मौका’ जैसे टीवी विज्ञापनों के ज़रिए या अख़बारों में ‘मुस्तफ़िज़ुर कटर’ जैसे आपत्तिजनक ग्राफिक्स छापकर एक-दूसरे की क्रिकेट टीमों को अपमानित किया है.
अब तक तो दोनों देश सांकेतिक रूप से ही एक-दूसरे की क्रिकेट टीम की आलोचना करते रहे थे.
लेकिन अब दोनों देशों के क्रिकेट बोर्ड के फ़ैसले के बाद क्रिकेट के प्रशंसक और समर्थक शायद खेल भावना को दरकिनार कर राजनीतिक पृष्ठभूमि और हालात को ही प्राथमिकता देंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.