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उत्तराखंड में पौड़ी ज़िले के कोटद्वार कस्बे में बीते दिनों एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आए ‘मोहम्मद दीपक’ के ख़िलाफ़ बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने शनिवार शाम को विरोध प्रदर्शन किया.
इस पर पुलिस प्रशासन का कहना है कि उन्होंने तत्काल मौके पर पुलिस भेजकर ‘स्थिति पर काबू’ पा लिया, जबकि दीपक ने प्रशासन पर ‘एकतरफ़ा रवैया’ अपनाने का आरोप लगाया है.
इस बारे में बजरंग दल ने एक बयान में कहा है कि उन्होंने पुलिस में दीपक के ख़िलाफ़ तहरीर दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होने पर यह विरोध प्रदर्शन किया गया और इसमें बजरंग दल के देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार के कार्यकर्ता शामिल थे.
दीपक कश्यप 26 जनवरी को उस समय चर्चा में आए, जब वे कोटद्वार के पटेल रोड पर एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आगे आए थे. दुकानदार से बजरंग दल के कार्यकर्ता दुकान का नाम बदलने को कह रहे थे.
पुलिस का कहना है कि शनिवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का इलाक़े में दौरा था और इसके कारण पुलिस बल उनकी सुरक्षा में तैनात था और सूचना मिलते ही हालात पर काबू पा लिया गया.
मुख्यमंत्री के एक्स हैंडल पर एक पोस्ट में भी बताया गया है कि वो (मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी) कोटद्वार में आयोजित बर्ड फ़ेस्टिवल में सम्मिलित हुए और पौड़ी जनपद से जुड़ी विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया.
कौन है खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताने वाला युवक?
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सोशल मीडिया पर ‘मोहम्मद दीपक’ के नाम से चर्चित युवक का असली नाम दीपक कुमार कश्यप है. वे उत्तराखंड के कोटद्वार के रहने वाले हैं और पेशे से जिम ट्रेनर हैं.
दीपक कश्यप 26 जनवरी को उस समय चर्चा में आए, जब वो कोटद्वार के पटेल रोड पर एक बुज़ुर्ग मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में आगे आए थे.
गणतंत्र दिवस के दिन कथित तौर पर बजरंग दल के कुछ कार्यकर्ता उस दुकान पर पहुँचे थे, जिसका नाम “बाबा स्कूल ड्रेस एंड मैचिंग सेंटर” है.
उस दिन के घटनाक्रम के बारे में दीपक ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि बजरंग दल के सात-आठ लोग 75 वर्षीय मुस्लिम दुकानदार की दुकान पर पहुँचे और उन पर दुकान के नाम से ‘बाबा’ शब्द हटाने का दबाव बनाने लगे.
दीपक के मुताबिक़, इस घटनाक्रम के दौरान वो पास में ही थे. स्थिति को बिगड़ता देख वे मौके पर पहुँचे और मामला शांत कराने की कोशिश की.
उनका दावा है कि उन्होंने कार्यकर्ताओं से शांत रहने को कहा, लेकिन वे नहीं माने और उल्टा उनसे उनकी पहचान पूछने लगे. इसी दौरान उन्होंने खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया.
दीपक के अनुसार, “यह नाम बताने का उद्देश्य यह संदेश देना था कि इंसान की पहचान को धर्म के खाँचों में बाँटकर नहीं देखा जाना चाहिए.”
इसके बाद विवाद बढ़ गया और बाज़ार में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बन गई. दीपक बताते हैं कि उस दिन किसी तरह कार्यकर्ता वहाँ से चले गए थे, लेकिन बाद में वे एक बार फिर भीड़ के रूप में लौटे और विरोध प्रदर्शन किया.
प्रशासन के रुख़ पर सवाल
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दीपक ने बीबीसी हिन्दी से कहा कि यह मामला 26 जनवरी की घटना के बाद से लगातार चला आ रहा था, लेकिन 31 जनवरी के दिन हालात अचानक बिगड़ गए.
दीपक के अनुसार, “देहरादून से बजरंग दल के क़रीब डेढ़ सौ कार्यकर्ता कोटद्वार पहुँचे और सीधे उनके जिम पर आकर नारेबाज़ी और हंगामा शुरू कर दिया. उनका कहना है कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज की गई और उनके परिवार को भी अपशब्द कहे गए.”
दीपक ने प्रशासन पर एकतरफ़ा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा, “मुझे तो वहाँ से हटा दिया गया, लेकिन वे लोग चार-पाँच घंटे तक लगातार हंगामा करते रहे.”
उनके मुताबिक़, प्रदर्शनकारियों की संख्या इतनी ज़्यादा थी कि स्थानीय लोग उनके समर्थन में खुलकर सामने नहीं आ सके.
दीपक ने दावा किया कि ‘बजरंग दल के लोग मारपीट के लिए गाड़ियों में हथियार लेकर पहुंचे थे.’
उनका कहना है कि उन्होंने संभावित टकराव को लेकर पहले ही पुलिस को आगाह कर दिया था क्योंकि बजरंग दल के कुछ लोगों ने इंस्टाग्राम पर इस संबंध में एक संदेश डाला था, जिसका स्क्रीनशॉट कोटद्वार पुलिस को उन्होंने भेजा था.
हालाँकि, दीपक ने बताया, “जिस तरह की उम्मीद मुझे पुलिस से थी, वह घटना के समय पूरी तरह शून्य दिखी.”
उनका आरोप है कि उन्हें थाने में बैठा दिया गया, जबकि प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाने की कोई ठोस कोशिश नहीं की गई. दीपक का कहना है कि अगर उन्हें एहतियातन हिरासत में लिया गया था, तो कम से कम प्रदर्शन कर रही भीड़ को तो वहाँ से हटाया जाना चाहिए था.
घटना को याद करते हुए दीपक भावुक हो जाते हैं. वे कहते हैं कि जिस काम को उन्होंने इंसानियत के नाते किया था, उसके बदले में जो कुछ हुआ, उसने उन्हें भीतर से तोड़ दिया.
फिर भी, उनका कहना है कि वे अन्याय के ख़िलाफ़ खड़े रहेंगे, “भले ही इसकी क़ीमत मुझे अपनी जान से क्यों न चुकानी पड़े.”
दीपक ने अपने परिवार को दूसरी जगह भेज दिया है और खुद किसी सुरक्षित स्थान पर चले गए हैं. उन्होंने कहा कि वो अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं.
पुलिस का क्या कहना है?
कोटद्वार के एडिशनल एसपी चंद्र मोहन सिंह ने बीबीसी हिन्दी को बताया कि जैसे ही पुलिस को भीड़ जुटने की सूचना मिली, बल को तुरंत सक्रिय किया गया और मौके पर भेजा गया.
उन्होंने कहा कि ‘स्थिति को तुरंत नियंत्रित कर लिया गया और किसी तरह की झड़प या मारपीट नहीं हुई. मौके पर पर्याप्त पुलिस बल मौजूद था, जिसकी मदद से भीड़ को हटाया गया.’
चंद्र मोहन सिंह के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम में किसी के ख़िलाफ़ कोई मुक़दमा दर्ज नहीं किया गया है.
उन्होंने यह भी बताया कि पुलिस इस मामले की जाँच कर रही है और यह देखा जा रहा है कि इस घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे. उनके अनुसार, एहतियात के तौर पर पूरे शहर में फ्लैग मार्च किया गया है.
एडिशनल एसपी ने बताया कि मौके पर मौजूद लोग अब जा चुके हैं और फिलहाल किसी तरह की तनावपूर्ण स्थिति नहीं है. हालांकि, पुलिस बल अभी भी इलाके में तैनात है और हालात पर नज़र रखी जा रही है.
बजरंग दल ने क्या बताया?
कोटद्वार में बजरंग दल के एक पदाधिकारी राजेश जदली ने कहा, “कोटद्वार में एक दुकान को लेकर हमें आपत्ति थी और दुकानदार ने हमें अपनी दुकान का नाम बदलने का आश्वासन भी दिया था. 26 जनवरी को जब उस दुकानदार से बातचीत करके हमारे कार्यकर्ता वापस लौट रहे थे, तब कुछ युवकों द्वारा हमारे कार्यकर्ताओं के साथ बदतमीज़ी और हाथापाई की गई.”
उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा, “…इनके ख़िलाफ़ पुलिस में तहरीर भी दी गई थी. पुलिस प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई न किए जाने के कारण हमारे कार्यकर्ताओं में आक्रोश था, जिसके परिणामस्वरूप उसी के विरोध में हमारे द्वारा यह विरोध प्रदर्शन किया गया.”
“इसमें बजरंग दल के देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार के हमारे कार्यकर्ता शामिल थे.”
कांग्रेस ने सरकार पर साधा निशाना
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना ने राज्य की भाजपा सरकार से दीपक को तत्काल और पुख़्ता सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की है.
धस्माना ने इस मामले को लेकर उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनंद वर्धन से फ़ोन पर बातचीत की और राज्य में बिगड़ती क़ानून-व्यवस्था को लेकर गहरी चिंता जताई.
उन्होंने कहा कि धर्म और ‘सनातन धर्म’ के नाम पर अराजक तत्वों द्वारा की जा रही हिंसक घटनाएँ पूरे देश में उत्तराखंड की छवि को नुकसान पहुँचा रही हैं. इन घटनाओं के चलते पूर्वोत्तर राज्यों और कश्मीर के लोगों में उत्तराखंड के प्रति अविश्वास बढ़ रहा है.
उन्होंने कहा कि बीते दो महीनों में पूर्वोत्तर के एक छात्र की हत्या, विकास नगर में कश्मीरी युवक पर जानलेवा हमला और अब पौड़ी ज़िले के कोटद्वार में एक मुस्लिम दुकानदार को दुकान का नाम बदलने के लिए मजबूर करने की घटना-ये सभी घटनाएं उत्तराखंड की छवि को देश और दुनिया में नुकसान पहुँचा रही हैं.
सूर्यकांत धस्माना ने आरोप लगाया कि ऐसी घटनाओं की श्रृंखला यह संकेत देती है कि नफ़रत और हिंसा फैलाने वाले तत्वों को सत्तारूढ़ दल का संरक्षण प्राप्त है.
कांग्रेस नेता के अनुसार, मुख्य सचिव आनंद वर्धन ने उन्हें आश्वासन दिया है कि इस बेहद गंभीर मामले में वह आवश्यक निर्देश जारी करेंगे और राज्य में क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उचित कदम उठाए जाएंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.