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उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 6 जनवरी को निर्वाचन आयोग ने ड्राफ़्ट मतदाता सूची जारी कर दी है.
इस सूची में राज्य के 12 करोड़ 55 लाख से अधिक मतदाता दर्ज किए गए हैं. यह संख्या पिछली मतदाता सूची के मुक़ाबले क़रीब 2 करोड़ 89 लाख कम है.
निर्वाचन आयोग के मुताबिक़, इनमें 46.23 लाख मतदाता मृत पाए गए हैं, जबकि 2.17 करोड़ मतदाता स्थानांतरित हो चुके हैं या तो स्थायी रूप से कहीं और जा चुके हैं.
कटे हुए नामों में 25.47 लाख नाम डुप्लीकेट पाए गए हैं, यानी एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर मतदाता सूची में दर्ज था.
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निर्वाचन आयोग के मुताबिक़, 2025 की मतदाता सूची में तक़रीबन 15 करोड़ 44 लाख मतदाता दर्ज थे.
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा, “स्पेशल इंटेंसिव रिवीज़न से जुड़े गणना प्रपत्र (फॉर्म) प्राप्त कर लिए गए हैं.”
उन्होंने कहा, “ड्राफ़्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाताओं को एक महीने का समय दिया गया है. इस अवधि में नाम जोड़ने, संशोधन कराने और आपत्ति दर्ज कराने के लिए आवेदन किया जा सकता है.”
हालांकि आयोग के दावों पर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए हैं.
75 ज़िलों में कटौती में लखनऊ सबसे ऊपर

चुनाव आयोग के मुताबिक़, ड्राफ़्ट सूची में जिन लोगों की मैपिंग नहीं हो पाई है, उन्हें आयोग की ओर से नोटिस भेजा जाएगा.
ऐसे मतदाताओं की संख्या एक करोड़ से अधिक है. विपक्षी दलों का कहना है कि अगर समय रहते लोगों ने दावा नहीं किया, तो वे मतदान से वंचित हो सकते हैं.
उत्तर प्रदेश के सभी 75 ज़िलों के आंकड़े जारी कर दिए गए हैं. इनमें सबसे अधिक वोटों की कटौती लखनऊ में हुई है.
राजधानी लखनऊ में लगभग 12 लाख नाम कटे हैं, जो क़रीब 30 प्रतिशत मतदाताओं के बराबर हैं. इसमें सबसे अधिक नाम कैंट विधानसभा क्षेत्र में कटे हैं.
लखनऊ में अक्तूबर, 2025 में 39 लाख 94 हज़ार मतदाता थे जो अब घटकर 28 लाख के क़रीब रह गए हैं.
लखनऊ की रहने वाली सुधा निगम की उम्र क़रीब 70 वर्ष है. उनके परिवार में चार सदस्य हैं. वे वर्ष 2014 से लखनऊ पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में मतदान कर रहे थे.
उनका नाम ड्राफ़्ट सूची में मैप नहीं हो पाया है. अब उन्हें एक महीने के भीतर दावा प्रस्तुत करना होगा.
सुधा निगम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “बीएलओ का फ़ोन आया था. बताया गया कि हमारे परिवार का नाम सूची में नहीं है, लेकिन एक महीने के भीतर प्रक्रिया पूरी हो जाएगी.”
फ़ॉर्म जमा करने के बाद भी नाम ग़ायब

हालाँकि कुछ लोग ऐसे भी हैं जिन्होंने एसआईआर का फ़ॉर्म जमा किया है, लेकिन उनका मिलान 2003 की मतदाता सूची से नहीं हो पाया है.
लखनऊ के हैदरगंज निवासी आरिफ़ के पूरे परिवार का नाम भी ड्राफ़्ट सूची में नहीं है. बीएलओ ऐसे लोगों को नोटिस देंगे और आवश्यक काग़ज़ात मांगे जाएंगे.
लखनऊ की रहने वाली रईसा फ़ातिमा का नाम भी एसआईआर सूची में नहीं है. उनका कहना है कि वह 2003 से लखनऊ की मतदाता रही हैं, लेकिन बीएलओ ने उन्हें फ़ॉर्म नहीं दिया था.
उन्होंने कहा, “जब हमने बीएलओ से संपर्क किया तो बताया गया कि 2025 की मतदाता सूची में नाम न होने के कारण नाम कट गया है. इस दौरान हमने किराए का मकान भी बदला है.”
प्रदेश में लखनऊ के बांद प्रयागराज में क़रीब 11 लाख से अधिक वोट ड्राफ्ट सूची से बाहर हैं. प्रयागराज में बड़ी संख्या में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स रहते हैं.
वहीं, ग़ाज़ियाबाद में 28 प्रतिशत से अधिक नाम हटाए गए हैं. इसके अलावा कानपुर में लगभग 9 लाख, आगरा में 8 लाख, बरेली में 7 लाख, मेरठ और गोरखपुर में 6-6 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं.
बलरामपुर ज़िले में भी क़रीब 4 लाख वोट कटे हैं. बहराइच में लगभग 5 लाख से अधिक नाम ड्राफ़्ट सूची से बाहर हैं.
बहराइच के चर्दा विधानसभा क्षेत्र के रहने वाले मायाराम का नाम भी सूची में नहीं है.
मायाराम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “मैं लगभग छह बार मतदान कर चुका हूँ, लेकिन इस बार मेरा नाम सूची में नहीं है. इससे पहले वाली सूची में नाम दर्ज था.”
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह ज़िले गोरखपुर में भी तक़रीबन 6 लाख वोट कम हुए हैं.
गोरखपुर के ज़िलाधिकारी दीपक मीणा ने बताया कि पहले ज़िले में तक़रीबन 36 लाख से अधिक मतदाता थे. ये घटकर अब 30 लाख हो गए हैं.
मतदाता परेशान
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मतदाता ड्राफ़्ट लिस्ट में अपना नाम चेक कर रहे हैं. कइयों को इसमें परेशानियां भी आ रही हैं क्योंकि बहुत से लोगों को ऑनलाइन नाम चेक करने की प्रक्रिया नहीं पता है.
ऐसे लोग साइबर कैफे़ की तरफ़ रुख़ कर रहे हैं. लखनऊ के कैंट इलाक़े में साइबर कैफे़ चलाने वाले मोहित ने कहा, ”कल से ही लोग आ रहे हैं. लेकिन कई लोगों के पास मतदाता पहचान पत्र ना होने की वजह से दिक्कत हो रही है. ”
वहीं, कुछ लोग इसके लिए अपने बीएलओ से भी संपर्क कर रहे हैं.
एक बीएलओ ने नाम ना ज़ाहिर करने की शर्त पर कहा, ”सुबह से ही सैकड़ों फोन आ चुके हैं. लेकिन सबको बताना मुमकिन नहीं है. हमको ऐसे लोगों को नोटिस भी देना है, जिनकी मैपिंग 2003 की लिस्ट से नहीं हो पाई है. ”
कांग्रेस नेता का दावा
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ड्राफ़्ट सूची जारी होने के बाद कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य गुरदीप सप्पल ने कहा कि उनका और उनके परिवार का नाम कट गया है.
कांग्रेस नेता गुरदीप सप्पल ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “मैं और मेरा परिवार 2003 से प्रदेश में रह रहा है, लेकिन ड्राफ्ट सूची में हमारे परिवार का नाम नहीं है. यही एसआईआर की हक़ीक़त है.”
उन्होंने कहा, “जब मेरे जैसे व्यक्ति का नाम कट सकता है, तो किसी का भी कट सकता है.”
उन्होंने एक्स पर लिखा, “हमने अपना घर उत्तर प्रदेश की साहिबाबाद विधानसभा से नोएडा विधानसभा क्षेत्र में स्थानांतरित किया था. हमें बताया गया कि एसआईआर में स्थानांतरित हुए मतदाताओं का नाम बनाए रखने का कोई प्रावधान नहीं है.”
उन्होंने कहा, “इसका मतलब यह है कि अगर कोई मतदाता किसी नए इलाक़े में शिफ़्ट होता है, तो उसका नाम काट दिया जाता है.”
उन्होंने कहा, “मेरे जैसे करोड़ों वैध मतदाता हैं. मैं तो शायद नया फॉर्म-6 भरकर अपने परिवार का नाम फिर जुड़वा लूं, लेकिन कितने लोग ऐसा कर पाएंगे.”
वहीं, निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और नियमों के तहत की गई है.
हालांकि, सप्पल के बयान के बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से कहा गया कि उनके परिवार के सदस्यों का नाम वोटर लिस्ट से कटने का कारण स्पष्ट है, क्योंकि वे ग़ाज़ियाबाद से नोएडा शिफ्ट हो गए थे.
इस पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने एक्स पर लिखा, ” बीएलओ ने अपना कार्य सही ढंग से किया है और आपका नाम ग़ाज़ियाबाद ज़िले की मतदाता सूची से हटाया गया है. आपको और आपके परिवार के सदस्यों को नोएडा ज़िले की मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 भरना चाहिए.”
आयोग ने क्या कहा?
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आयोग ने 6 जनवरी को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि जिनका नाम नहीं है. वो नए सिरे से आवेदन कर सकते हैं. क्योंकि ये अभी ड्राफ़्ट लिस्ट है. प्रदेश की अंतिम मतदाता सूची 6 मार्च 2026 को प्रकाशित की जाएगी.
मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार दावे और आपत्तियाँ दर्ज कराने की अवधि 6 जनवरी से 6 फ़रवरी 2026 तक तय की गई है.
जबकि 6 जनवरी से 27 फ़रवरी 2026 तक नोटिस अवधि के दौरान प्राप्त सभी दावों और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा.
हालाँकि दावे और आपत्तियों का निस्तारण अब बीएलओ से ऊपर के अधिकारी करेंगे.
आयोग का दावा है कि किसी भी योग्य मतदाता का नाम अंतिम सूची से बाहर नहीं रहने दिया जाएगा.
प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा, “जिन मतदाताओं का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, वे फॉर्म-6 भरकर नाम जुड़वा सकते हैं. आयोग ने एएसडीडीआर की लिस्ट दी है. इनमें अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट होने वाले, मृत्यु और डुप्लीकेट वोटर्स की लिस्ट है.”
ऐसे लोग फॉर्म 6 के तहत आवोदन दे सकते हैं.
उन्होंने बताया कि नाम या पते में सुधार के लिए फ़ॉर्म-8 और ग़लत नाम हटाने के लिए फ़ॉर्म-7 भरकर ऑनलाइन या बीएलओ को दिया जा सकता है.
रिणवा ने कहा, “मतदाता ड्राफ़्ट सूची में अपना नाम अवश्य जांचें और किसी भी तरह की त्रुटि या नाम छूटने की स्थिति में एक महीने के भीतर दावा प्रस्तुत करें.”
राजनीतिक दलों के सवाल
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हालाँकि बिहार में जब यह प्रक्रिया शुरू की गई थी, तब भी राजनीतिक दलों ने इस पर सवाल खड़े किए थे.
बिहार में एसआईआर के बाद निर्वाचन आयोग ने उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल समेत देश के 9 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया लागू की है.
यूपी में 403 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर किया गया है. जानकारों के मुताबिक ड्राफ़्ट सूची को देखें तो औसतन प्रति विधानसभा 70 हज़ार से अधिक वोट कट जाएंगे.
अब हर विधानसभा में औसत मतदाता तक़रीबन 3 लाख 11 हज़ार के आस-पास बचेगा.
बीजेपी का कहना है कि एसआईआर पर विपक्ष का विरोध ग़लत है और यह प्रक्रिया पहले भी कई बार अपनाई जा चुकी है.
एसआईआर की ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा, “हम इस सूची की समीक्षा करेंगे. हमारे कार्यकर्ता बूथ स्तर पर यह सुनिश्चित करेंगे कि कोई भी वैध मतदाता छूटने न पाए. इसके लिए हम पूरी तरह सतर्क हैं.”
विपक्षी दलों का कहना है कि वे सूची का अध्ययन कर रहे हैं, लेकिन आरोप लगाया गया है कि एसआईआर की प्रक्रिया सत्ता पक्ष के पक्ष में की गई है.
समाजवादी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने कहा, “यह पूरी प्रक्रिया पक्षपात से मुक्त नहीं है. इसमें कई गड़बड़ियां हैं, जिसकी वजह से ग़रीब तबके के वोट कट गए हैं.”
समाजवादी पार्टी के लखनऊ में 70 बूथों के एसआईआर प्रभारी आज़म ख़ान ने कहा, “हम यह देख रहे हैं कि इसमें पीडीए के कितने वोट कटे हैं. इसके आधार पर आपत्तियाँ और दावे दर्ज कराए जाएंगे.”
उन्होंने कहा, “अगर पीडीए के नाम नहीं जोड़े गए, तो हम वैधानिक प्रक्रिया अपनाएंगे.”
कांग्रेस ने भी इस पर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने कहा, “यह प्रदेश के साथ नाइंसाफी है और राज्य के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. बड़ी संख्या में वैध वोट कट गए हैं. यह चुनाव आयोग का जल्दबाज़ी भरा फैसला है.”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि असली तस्वीर दावे और आपत्तियों की अवधि समाप्त होने के बाद ही साफ हो पाएगी.
तभी यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितने नाम दोबारा मतदाता सूची में शामिल होते हैं.
वरिष्ठ पत्रकार सिद्धार्थ कलाहंस ने कहा, “अंतिम समय में नए मतदाता जोड़ने की गुंजाइश बनी रहती है. बिहार में भी अंतिम समय पर बड़ी संख्या में वोट जोड़े गए थे, जिसकी जानकारी विपक्षी उम्मीदवारों को भी नहीं थी.”
उन्होंने कहा, “पंचायत चुनाव की सूची और एसआईआर में बहुत अधिक अंतर नहीं है. इसी वजह से करोड़ों वोट कटे हैं. सवाल यह है कि ये वोट कैसे कटे और क्या ये सत्ता-विरोधी वोट हैं.”
कलाहंस ने कहा, “एक रिपोर्ट के मुताबिक त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भी करीब 12 करोड़ से अधिक मतदाता हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि शहरी मतदाता कहाँ गए.”
आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने भी यही सवाल उठाया. उन्होंने कहा, “यूपी में एसआईआर की सूची आ चुकी है और 18.7 प्रतिशत वोट कट गए हैं. यह चुनाव आयोग है या तमाशा.”
उन्होंने कहा, “यूपी राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनावों के लिए दिसंबर में जो सूची जारी की थी, उसमें मतदाताओं की संख्या 12.70 करोड़ थी, जबकि एसआईआर के बाद यह संख्या 12.55 करोड़ बताई जा रही है.”
हालाँकि पंचायत चुनावों की अंतिम सूची अभी आना बाकी है.
मतदाता सूची में नाम कैसे खोजें
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मतदाता सूची में नाम पता करने के कई तरीके हैं. सबसे आसान तरीका एसएमएस के ज़रिए है.
ईसीआई लिखकर स्पेस देने के बाद अपना एपिक नंबर लिखें और 1950 पर भेज दें.
इसके बाद निर्वाचन आयोग की ओर से एसएमएस के माध्यम से जानकारी मिल जाएगी.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.