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राजगुरु की कहानी जिन्हें दी गई थी सुखदेव और भगत सिंह के साथ फाँसी- विवेचना

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Mar 22, 2026



राजगुरु जिन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी

इमेज स्रोत, NATIONAL BOOK TRUST

इमेज कैप्शन, राजगुरु जिन्हें 23 मार्च 1931 को फांसी दी गई थी

शिवराम हरि राजगुरु को बचपन से ही तैराकी, तीरंदाज़ी और कुश्ती का शौक था. गुलेल का उनका निशाना भी पक्का था. बाद में उन्होंने पिस्टल चलानी भी सीख ली थी और कहा जाता है कि स्वतंत्रता सेनानियों में चंद्रशेखर आज़ाद के बाद राजगुरु का निशाना सबसे अच्छा था.

बनारस में संयोग से उनकी मुलाकात स्वतंत्रता सेनानी विश्वनाथ वैशम्पायन से हुई. उन्होंने राजगुरु को चंद्रशेखर आज़ाद से कानपुर में मिलवाया.

अनिल वर्मा अपनी किताब ‘राजगुरु द इंविंसिबिल रिवोल्यूशनरी’ में इस मुलाकात का दिलचस्प विवरण देते हुए लिखते हैं, “आज़ाद ने राजगुरु से पूछा, ‘तो तुम क्रांतिकारी बनना चाहते हो?'”

राजगुरु ने जवाब दिया. ”जी हाँ. मैं इस दिशा में काफ़ी कोशिश करता रहा हूँ.”

आज़ाद ने कहा, ”इसके बावजूद कि इसका अंजाम गोलियों से छलनी शरीर, देश निकाला या फाँसी तक हो सकता है ? ”

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