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बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव ने एक चेक बाउंस मामले में पिछले हफ़्ते गुरुवार को तिहाड़ जेल में सरेंडर कर दिया.
उनके आर्थिक संकट को लेकर मीडिया में आई रिपोर्टों के बाद सोशल मीडिया पर काफ़ी चर्चा हो रही है और इस बीच कुछ लोगों ने आर्थिक मदद की घोषणा भी की है.
मंगलवार को बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने अपने भविष्य के प्रोजेक्ट के लिए एक साइनिंग अमाउंट देने की जानकारी दी, वहीं लालू यादव के बेटे और जन शक्ति जनता दल के नेता तेज प्रताप ने आर्थिक मदद का एलान किया.
दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने उन्हें आत्मसर्पण के लिए चार फ़रवरी तक का वक़्त दिया था. पांच फ़रवरी को राजपाल तिहाड़ जेल पहुंचे.
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दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि ‘अदालत के निर्देशों की अनदेखी कानून के प्रति सम्मान की कमी को दर्शाता है और अभिनेता के पेशे या फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े होने के आधार पर उन्हें कोई ख़ास रियायत नहीं दी जा सकती.’
मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि जेल में सरेंडर करने से पहले राजपाल यादव ‘भावुक’ हो गए थे.
इसके बाद फ़िल्म उद्योग जगत से जुड़े कई लोगों ने राजपाल यादव की मदद का आह्वान किया.
सोनू सूद और तेज प्रताप यादव ने क्या कहा?

बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद ने राजपाल यादव को एक ‘प्रतिभाशाली अभिनेता’ बताया ‘जिन्होंने फ़िल्म इंडस्ट्री को सालों तक यादगार काम दिया है.’
सोनू सूद ने उनके साथ एकजुटता दिखाने का आह्वान करते हुए एक्स पर लिखा, ” कई बार चीज़ें ग़लत दिशा में मुड़ जाती हैं. ऐसा टैलेंट की कमी के कारण नहीं बल्कि वक़्त की बेरहमी की वजह से होता है. वह मेरी फिल्म का हिस्सा होंगे. यह वह पल है जब हम सब निर्माता, निर्देशक और साथी कलाकार उनके साथ खड़े हों.”
उन्होंने आगे लिखा, “भविष्य के काम में एडजस्ट होने वाली एक छोटी साइनिंग अमाउंट कोई दान नहीं है, यह सम्मान है. जब हम में से कोई मुश्किल दौर से गुजर रहा हो, तो इंडस्ट्री को यह याद दिलाना चाहिए कि वह अकेला नहीं है. यही तरीका है यह दिखाने का कि हम सिर्फ एक इंडस्ट्री नहीं हैं.”
उधर तेज प्रताप यादव ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा, “माननीय राजपाल यादव जी के परिवार की पीड़ा के विषय में जानकारी प्राप्त हुई.”
उन्होंने आगे लिखा, “इस अत्यंत कठिन समय में मैं और मेरा पूरा जन शक्ति जनता दल परिवार, उनके शोकाकुल परिवार के साथ पूरी संवेदना और मजबूती से खड़ा है. मानवीय करुणा और सहयोग की भावना से, मैं जेजेडी परिवार की ओर से 11 लाख रुपये की आर्थिक सहायता उनके परिवार को प्रदान कर रहा हूँ.”
एक्टर गुरमीत चौधरी ने फ़िल्म इंडस्ट्री से जुड़े लोगों को आगे आने की अपील करते हुए एक्स पर लिखा, “राजपाल यादव जी जैसे सीनियर और बेहद प्रतिभाशाली कलाकार को इस तरह के दर्दनाक दौर से गुजरते देखना दिल तोड़ देता है. उन्होंने हमें अनगिनत मुस्कानें, हंसी और यादगार पल दिए हैं. आज उन्हें हमारी जरूरत है.”
उन्होंने लिखा, “एक साथी अभिनेता के तौर पर और एक इंसान के नाते, मैं जिस भी तरह से मदद कर सकता हूं, आगे बढ़ रहा हूं. मैं सभी निर्माताओं, निर्देशकों और हमारी फिल्म बिरादरी के सदस्यों से विनम्र अपील करता हूं कि आइए, इंसानियत और संवेदना के साथ एक साथ आएं और कोई समाधान निकालें. हमारी इंडस्ट्री एक परिवार है. और परिवार अपने लोगों को अकेला नहीं छोड़ता.”
क्या है पूरा मामला
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कोर्ट की कार्यवाही से पता चलता है कि राजपाल यादव के ख़िलाफ़ यह मामला फ़िल्म ‘अता-पता-लापता’ से जुड़ा है. साल 2010 में मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड नाम की कंपनी ने इस फ़िल्म के लिए क़रीब पांच करोड़ रुपये दिए थे.
कोर्ट में कार्यवाही के मुताबिक़, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही और कथित तौर पर अभिनेता को आर्थिक नुकसान हुआ. वह कंपनी को ये पैसा वापस नहीं कर पाए.
लाइव लॉ के मुताबिक़ कोर्ट ने कहा, ”अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि याचिकाकर्ता नंबर 1 (राजपाल यादव) का आचरण निंदनीय है. बार-बार आश्वासन देने और अदालत से रियायत मांगने के बावजूद उन्होंने समय-समय पर पारित आदेशों का पालन नहीं किया.”
कर्ज़ के भुगतान के लिए कंपनी को दिए गए कई चेक बाउंस हो गए, जिसके कारण उनके ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया गया. इसके बाद 2018 में दिल्ली की निचली अदालत ने राजपाल यादव को दोषी ठहराते हुए छह महीने की जेल की सज़ा सुनाई थी.
बाद में मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां सज़ा पर रोक लगाई गई थी.
कोर्ट ने कहा था कि वह शिकायतकर्ता कंपनी को बकाया राशि का भुगतान करेंगे, ”अभिनेता ने कई बार भुगतान का आश्वासन दिया, लेकिन तय समय सीमा के भीतर राशि जमा नहीं कर पाए.”
कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि बार-बार दिए गए आश्वासनों का उल्लंघन किया गया है. इसी आधार पर हाई कोर्ट ने आत्मसमर्पण का आदेश दिया था. राजपाल यादव के ऊपर चेक बाउंस का केस किया गया था.
ये सज़ा निगोशिएबल इंस्ट्रयूमेंट एक्ट 1881 की धारा 138 के उल्लंघन के आरोप में दी गई लेकिन जनवरी 2019 में सत्र न्यायालय ने भी इस फैसले को बरकरार रखा था.
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2024 में सज़ा पर रोक इस आश्वासन पर लगाया था कि कर्ज़ की रकम वापस कर दी जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया.
राजपाल यादव ने दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में अदालत के सामने राशि चुकाने का आश्वासन दिया, लेकिन वह इसमें विफल रहे.
इसके बाद कोर्ट ने 4 फ़रवरी को आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया.
इससे पहले भी वर्ष 2013 में झूठा हलफ़नामा दायर करने के एक मामले में राजपाल यादव को 3 दिसंबर से 6 दिसंबर तक तिहाड़ जेल भेजा गया था.
राजपाल यादव का क्या कहना है?
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निचली अदालत से सज़ा मिलने के बाद 28 अप्रैल 2018 को राजपाल यादव ने शाहजहांपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया गया है.
दो साल पहले राजपाल यादव ने इंडिया टुडे ग्रुप के एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा था उन्होंने ‘कोई फ़्रॉड नहीं किया’ है.
उन्होंने कहा, “फ़िल्म ‘अता पता लापता’ बनाने के लिए उन्होंने (कंपनी ने) पांच करोड़ रुपये दिए थे…ये किस्म का निवेश था…मैं अता पता लापता का कभी डायरेक्टर नहीं था…”
इसी चैनल को दिए एक साक्षात्कार में बॉलीवुड अभिनेता नवाज़ुददीन सिद्दीक़ी ने राजपाल यादव के बारे में बताया था.
नवाज़ुद्दीन ने कहा था, “जब राजपाल का काम चल रहा था बहुत से लोग उनके घर पर खाना खाते थे और कभी उन्होंने कभी उफ़्फ़ तक नहीं किया…हमेशा दिया. जब हम स्ट्रगल कर रहे थे और बहुत सारे एक्टर स्ट्रगल कर रहे थे तो राजपाल का घर एक लंगर की तरह था, कोई भी आकर खा सकता था… बहुत ही कमाल के इंसान हैं वो.”
इसी इंटरव्यू में उन्होंने राजपाल यादव को ‘बॉलीवुड में सबसे पढ़े लिखे अभिनेताओं में से एक’ बताया था.
राजपाल यादव उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर ज़िले के पुवायां के रहने वाले हैं.
उन्होंने लखनऊ स्थित भारतेंदु नाट्य अकादमी और दिल्ली के राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) से अभिनय की पढ़ाई की है. ‘भूलभुलैया’, ‘फिर हेराफेरी’, ‘चुप चुप के’, ‘हंगामा’, जैसी फ़िल्मों में उन्होंने यादगार कॉमेडी भूमिकाएं निभाईं.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.