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राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र की 23 वर्षीय साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की वजह अब तक सामने नहीं आ सकी है. पोस्टमार्टम के बाद 30 जनवरी को उनका अंतिम संस्कार बालोतरा ज़िले के परेऊ गांव में समाधि के रूप में किया गया.
मृतक साध्वी के पिता वीरमनाथ का दावा है कि ज़ुकाम और गले में ख़राश के दौरान “ग़लत इंजेक्शन दिए जाने से” उनकी बेटी की तबीयत बिगड़ी, जिसके चलते मौत हुई है.
नागौर से सांसद हनुमान बेनिवाल ने इस मामले में हत्या की आशंका जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है.
इस हाई-प्रोफ़ाइल मामले की जांच के लिए एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है जिसने जांच शुरू कर दी है.
पुलिस का कहना है कि आगे की जांच के लिए विसरा की रिपोर्ट आने का इंतज़ार किया जा रहा है और इस मामले में अब तक किसी को भी हिरासत में नहीं लिया गया है.
क्या हुआ था?
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मृतक साध्वी के मामा गंगाराम ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी को बताया, “साध्वी प्रेम बाईसा अजमेर से मंगलवार (27 जनवरी) देर रात जोधपुर आई थीं. अगले दिन फिर एक कथा के लिए उन्हें अजमेर ही जाना था. उनके गले में ख़राश और ज़ुकाम की शिकायत होने पर पास ही रहने वाले कंपाउंडर को बुलाया गया था.”
साध्वी के लगभग 42 साल के पिता वीरमनाथ अपने गांव परेऊ में थे जब फ़ोन पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी ने उनसे बात की. उन्होंने कहा, “जोधपुर के आरती नगर में हमारे आश्रम (घर) से क़रीब दो सौ मीटर दूरी पर ही कंपाउंडर देवी सिंह रहता है. 28 तारीख़ की शाम उसने दो अलग-अलग शीशियों से दवाइयां भर कर साध्वी को इंजेक्शन लगाया था.”
“इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद ही साध्वी को बहुत तेज़ छींक आने लगीं और सांस लेने में परेशानी होने लगी थी. इसके बाद वह दौड़ते हुए आश्रम से बाहर निकलीं और कहा कि मुझे जल्दी हॉस्पिटल लेकर चलो. तबियत बिगड़ने के कारण वह गाड़ी में बैठ नहीं पा रही थीं. हम उन्हें जोधपुर में ही प्रेक्षा अस्पताल लेकर गए.”
“रास्ते में साध्वी ने बोला कि पापा मुझे न्याय दिलाना, यही मेरी आख़िरी उम्मीद है. इसके बाद वह कुछ नहीं बोल पाईं.”
वीरमनाथ के मुताबिक़, जब तक वो अपनी बेटी साध्वी प्रेम बाईसा को लेकर प्रेक्षा अस्पताल पहुंचे तब तक उनकी सांसें थम चुकी थीं.
प्रेक्षा अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण जैन ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “जब प्रेम बाईसा को लेकर आए तब हमने चेक किया तो उनका बीपी और पल्स नहीं चल रहा था.”
साध्वी के शव का 29 जनवरी की सुबह जोधपुर के ज़िला अस्पताल में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाया गया था. इस दौरान मोर्चरी के बाहर हंगामा भी हुआ था.
वीरमनाथ कहते हैं, “हम जांच के लिए पूरा सहयोग कर रहे हैं. जहां भी पुलिस ने मेरी सहमति मांगी मैंने दी है. पोस्टमार्टम के दौरान कुछ स्थानीय लोगों ने हुड़दंग करने का प्रयास किया था. जबकि, मैं तो पुलिस को सहयोग कर रहा था.”
कौन थीं साध्वी प्रेम बाईसा
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साध्वी प्रेम बाईसा का जन्म बालोतरा के परेऊ गांव में हुआ था. वह अपने माता-पिता की अकेली संतान थीं. साध्वी की उम्र लगभग पांच वर्ष रही होगी जब उनकी माता का निधन हो गया था.
उनके मामा गंगाराम कहते हैं, “बचपन से ही प्रेम बाईसा का धर्म के प्रति झुकाव था. उनके अनुयायी और कथा वाचन सुनने वाले हज़ारों-लाखों लोग आज दुखी हैं.”
साध्वी के शिष्य 42 साल के रेवतराम परेऊ गांव में साध्वी के समाधि स्थल पर मौजूद थे. उन्होंने फ़ोन पर हुई बातचीत में कहा, “मैं क़रीब 12 साल से साध्वी जी का शिष्य हूं. उनका व्यवहार बहुत अच्छा और नम्र था. किसी भी परिस्थिति में वह सहज रहती थीं. वह इतनी अच्छी कथा सुनाती थीं कि श्रोताओं की आंखें नम हो जाती थीं.”
वीरमनाथ बताते हैं, “छह साल की उम्र से ही वह प्रवचन करने लगी थीं और आठ साल की उम्र में उन्होंने कथा वाचन शुरू कर दिया था.”
वह कथा और सत्संग करने के साथ ही जोधपुर के जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन के तीसरे वर्ष की पढ़ाई भी कर रही थीं.
वीरमनाथ आगे कहते हैं, “उनके ऊपर बड़े संत महात्माओं और शंकराचार्य का भी आशीर्वाद था. वह हमेशा कहती थीं, ‘मुझे प्रकृति ने योगी बनाकर भेजा है, मैं हर परीक्षा और कठिन परिश्रम के लिए तैयार हूं. मेरा एक ही लक्ष्य है कि मैं दुखी प्राणियों की मदद कर सकूं और सनातन का प्रचार सकूं’.”
गंगाराम कहते हैं, “प्रेम बाईसा ने जोधपुर में अपना ख़ुद का आश्रम साधना कुटीर स्थापित किया था. यहां वह भक्तों के साथ धार्मिक कार्यक्रम करती थीं. उनके भजन और कथाओं का प्रचार सोशल मीडिया से होता था और हज़ारों की संख्या में भक्त उनके भजन और सत्संग सुनने के लिए आते थे. वह प्रदेश और देश में कई जगह कथा वाचन करने जाती थीं और लाखों की संख्या में उनके भक्त थे.”
पुलिस जांच कहां तक पहुंची?
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साध्वी प्रेम बाईसा की मौत से आहत उनके भक्त और संत महात्मा बड़ी संख्या में परेऊ गांव पहुंच रहे हैं और उनकी मौत की निष्पक्ष रूप से जांच की मांग कर रहे हैं.
नागौर से लोकसभा सांसद हनुमान बेनीवाल ने एक टीवी चैनल से बातचीत में साध्वी की हत्या की आशंका ज़ाहिर करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
उन्होंने कहा, “अचानक पांच मिनट के अंदर एक साध्वी की मौत हो जाए तो प्रदेश यह जानना चाहता है कि आख़िर कारण क्या था. किसी षड्यंत्र के तहत हत्या की गई, यह सुसाइड था या कुछ और था यह राजस्थान जानना चाहता है.”
उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि प्रेम बाईसा की हत्या हुई है. मुझे लगता है, सौ फ़ीसदी यह हत्या है.”
जोधपुर पुलिस कमिश्नर ने एसीपी छवि शर्मा के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया है.
एसीपी छवि शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “हम हर पहलू से मामले की जांच कर रहे हैं. डॉक्टरों का फ़ाइनल ओपिनियन आने के बाद ही जांच की राह भी तय होगी और मौत के सही कारण सामने आएंगे.”
साध्वी के पिता वीरमनाथ ने कंपाउंडर के इंजेक्शन लगाने के तुरंत बाद मौत होने का दावा किया है.
कंपाउंडर से पूछताछ में क्या पता चला है? इस सवाल पर एसीपी शर्मा कहती हैं, “कंपाउंडर ने बताया कि नॉर्मल इंजेक्शन लगाया गया था. वह एक रजिस्टर्ड नर्सिंग स्टाफ़ हैं जो इंजेक्शन लगाना जानते हैं. लेकिन, क्या डॉक्टर के बिना वह इंजेक्शन लगाने के लिए अधिकृत हैं, यह हम मालूम कर रहे हैं.”
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इलाके़ में अब क़ानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर एसीपी शर्मा कहती हैं, “बालोतरा के परेऊ में बीते दिन शव की अंतिम क्रिया की गई है. पूरी तरह से शांति है और लॉ एंड ऑर्डर सामान्य है.”
जोधपुर अस्पताल के एक डॉक्टर ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा कि, “साध्वी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में किसी तरह की चोट या कोई अन्य कारण सामने नहीं आए हैं. विसरा रिपोर्ट के बाद ही सही कारण मालूम होगा.”
डीसीपी वेस्ट जोधपुर विनीत बंसल ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “कल ही विसरा सैंपल हमें मिले हैं. हम उनको लैब में भेजने की प्रक्रिया कर रहे हैं. विसरा जांच रिपोर्ट के बाद ही मौत के सही कारण सामने आएंगे.”
इधर, एफ़एसएल राजस्थान के निदेशक अजय शर्मा ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से फ़ोन पर बताया कि, “हमारे पास अभी विसरा सैंपल नहीं आए हैं. विसरा सैंपल मेडिकल कॉलेज से हमारे पास नहीं आते हैं, पुलिस के ज़रिए हमारे पास सैंपल आएंगे.”
“अगर सरकार से प्राथमिकता के आधार पर सैंपल जांच का लेटर मिलता है तो हमारी कोशिश रहेगी कि आठ दिन में रिपोर्ट जमा करा दें.”
बीते साल हुआ था विवाद
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साल 2025 में साध्वी का अपने पिता को गले लगाते हुए एक वीडियो भी वायरल हुआ था. उस दौरान साध्वी ने वीडियो के आधार पर एक युवक पर ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए थे.
क्या उस वीडियो का भी साध्वी की मौत से कोई संबंध हो सकता है? इस सवाल पर डीसीपी बंसल कहते हैं, “उस प्रकरण में चालान पेश कर दिया गया था. हम उसकी भी जांच कर रहे हैं कि क्या उसका इस प्रकरण से कोई संबंध हो सकता है या नहीं.”
साध्वी की मौत के क़रीब तीन घंटे बाद उनके सोशल मीडिया अकाउंट से एक पोस्ट भी किया गया था. इस पर विवाद बढ़ने पर वीरमनाथ ने स्वीकार किया कि उन्होंने ही यह पोस्ट शेयर करवाया था.
डीसीपी बंसल स्पष्ट करते हैं कि अभी किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है, जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर कार्रवाई करेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.