डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राजस्थान के दौसा जिले में छह साल पहले लापता हुए चार वर्षीय मासूम प्रिंस उर्फ टिल्लू के मामले में अब एक बेहद दर्दनाक और चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है। पुलिस जांच में पता चला है कि बच्चे की हत्या उसके ही रिश्तेदार अनिल और कृष्णा ने कथित तौर पर आपसी रंजिश के चलते की और शव को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के किनारे दफना दिया। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्होंने पूछताछ में जुर्म कबूल कर लिया है।
मामला 16 अगस्त 2020 का है, जब ऊनबड़ा गांव की रामदेवा ढाणी में प्रिंस अपने घर के आंगन में खेलते-खेलते अचानक लापता हो गया था। परिवार ने गांव-गांव, रिश्तेदारी और दिल्ली-जयपुर तक खोजबीन की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।
2021 में परिवार ने राजस्थान हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसके बाद जांच तेज हुई। वर्षों में सात जांच अधिकारी बदले गए, लेकिन मामला अनसुलझा रहा। हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर पुलिस ने गहन जांच की और आखिरकार आरोपी टूट गए।
पुलिस के अनुसार, अनिल और कृष्णा ने रंजिश (कुछ रिपोर्टों में आरोपी की मां के सुसाइड से जुड़ी बात बताई गई) के कारण बच्चे को घर से उठाया, चाकू से गोदकर हत्या की और शव को कट्टे में बंद कर अगले दिन रात दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के पास (निर्माणाधीन इलाके में) दफना दिया। आरोपी ने निशानदेही पर पुलिस ने खुदाई शुरू की।
दिल्ली से मंगाई गई ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार मशीन ने जमीन के लगभग 9 मीटर (30 फीट) नीचे संदिग्ध संकेत दिए। इसके आधार पर जेसीबी मशीनों से तीन दिनों से 24 घंटे लगातार खुदाई चल रही है। अब तक 15 फीट से अधिक गहराई तक खोदा जा चुका है, लेकिन शव या कंकाल नहीं मिला है। कुछ रिपोर्टों में 180-300 फीट तक के इलाके में खुदाई का जिक्र है। पुलिस एनएचएआई से सड़क तोड़ने की अनुमति मांग रही है और मौसम विभाग से भी सहायता ली जा रही है।
प्रिंस के पिता जगमोहन बैरवा, जो दुबई में काम करते थे, 21 फरवरी को खबर मिलते ही भारत लौट आए। एनडीटीवी को दिए इंटरव्यू में उन्होंने भावुक होकर कहा कि अगर मेरा बेटा मिल जाए, चाहे उसकी हालत कैसी भी हो, मुझे खुशी होगी। मुझे पुलिस और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है कि न्याय मिलेगा।
प्रिंस की बहन अर्चना और भाई समर सदमे में हैं। अर्चना ने बताया कि अनिल अक्सर टिल्लू को मोटरसाइकिल पर घुमाने ले जाता था और खोज में भी शामिल हुआ था, जो अब धोखे जैसा लगता है। समर ने उसे शरारती लेकिन प्यारा बच्चा बताया, जो टूटे खिलौने ठीक करवाने आता था।
परिवार का आंगन आज भी उदास है – बच्चे इधर-उधर बैठे हैं, एक नीम का पेड़ खड़ा है जिसकी उम्र ठीक उतनी है जितनी आज प्रिंस की होती। यह मामला न केवल एक परिवार की त्रासदी है, बल्कि बच्चों की सुरक्षा, परिवार में रंजिश और लंबी जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल भी खड़े करता है। पुलिस खुदाई जारी रखे हुए है और मामले की जांच विभिन्न एंगल से की जा रही है।