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रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड:हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अंशुल, डेरा प्रमुख को नोटिस – Ramchandra Chhatrapati Murder Case: Anshul Moves Supreme Court Against High Court Verdict

Byadmin

Aug 12, 2026


पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से मिली राहत के खिलाफ पीड़ित पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। रामचंद्र छत्रपति के बड़े पुत्र अंशुल छत्रपति ने हाईकोर्ट के 7 मार्च 2026 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की है।

सुप्रीम कोर्ट ने 10 अगस्त को मामले की सुनवाई करते हुए पीड़ित पक्ष को विशेष अनुमति याचिका दायर करने की अनुमति दी। चीफ जस्टिस ने प्रतिवादी को नोटिस जारी करते हुए मामले की अंतिम सुनवाई के लिए 16 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है।

मामले के अनुसार पंचकूला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 17 जनवरी 2019 को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में डेरा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ राम रहीम ने पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में अपील दायर की थी।

हाईकोर्ट ने 7 मार्च 2026 को सुनवाई के बाद राम रहीम को हत्याकांड के मामले में बरी कर दिया था, जबकि अन्य तीन दोषियों की सजा को बरकरार रखा था। अंशुल छत्रपति ने मंगलवार को मीडिया से बातचीत में कहा कि हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से कानूनी लड़ाई लड़ी जाएगी।

उन्होंने सीबीआई की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि देश की प्रमुख जांच एजेंसी ने हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ अभी तक सुप्रीम कोर्ट का रुख क्यों नहीं किया। अंशुल ने कहा कि इस मामले में सीबीआई की साख भी दांव पर लगी है। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार सुप्रीम कोर्ट में राम रहीम के खिलाफ कानूनी लड़ाई मजबूती से जारी रखेगा।

अंशुल ने कहा- हाईकोर्ट का फैसला निराशाजनक था, इसीलिए गए सुप्री कोर्ट

डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को सुप्रीम कोर्ट से नोटिस मिलने पर, दिवंगत पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल छत्रपति ने कहा कि हमने सुप्रीम कोर्ट में एक स्पेशल लीव पिटिशन (SLP) दायर की है। यह SLP डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम से जुड़ी है, जिन्हें CBI ने मेरे पिता की हत्या के मामले में आरोपी और मुख्य साजिशकर्ता बताया था, और जिन्हें CBI की स्पेशल कोर्ट ने जनवरी 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई थी।

पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में अपील की सुनवाई के बाद, कोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को बरी कर दिया, जबकि बाकी तीन दोषियों, दो शूटर और डेरा मैनेजर, की सजा को बरकरार रखा। हमने हाई कोर्ट के इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में SLP दायर करके चुनौती दी। यह मामला 10 अगस्त को सुनवाई के लिए आया। बेंच ने प्रतिवादियों, CBI, गुरमीत राम रहीम और अन्य आरोपियों, को नोटिस जारी किए। इसके अलावा, हमारी SLP को मंजूरी मिल गई, अपील स्वीकार कर ली गई और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए गए। कोर्ट ने संकेत दिया कि अंतिम सुनवाई 16 नवंबर के बाद वाले हफ्ते में होगी। जिस तरह से हाई कोर्ट ने उन्हें बरी किया, सबूतों, गवाहों और CBI की जांच को नजरअंदाज करते हुए, और उस फैसले में जो टिप्पणियां की गईं, वे संतोषजनक नहीं थीं। हाई कोर्ट का फैसला बहुत निराशाजनक था, इसलिए हमने उसे चुनौती दी।



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