डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आयुष मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गैर-संक्रामक बीमारियों और जोखिम वाले समूहों के लिए एक व्यापक “योग प्रोटोकॉल” शुरू किया है। इस महीने की शुरुआत में योग महोत्सव 2026 के दौरान आयुष मंत्री प्रतापराव जाधव द्वारा शुरू की गई इस पहल को जीवनशैली से जुड़ी विभिन्न बीमारियों से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण उपाय के रूप में देखा जा रहा है।
यह पहल आयुष मंत्रालय के अधीन मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान में स्थित विश्व स्वास्थ्य संगठन के पारंपरिक चिकित्सा सहयोगी केंद्र द्वारा विकसित की गई है। यह प्रोटोकाल साक्ष्य-आधारित मॉड्यूल के रूप में तैयार किया गया है, जो यौगिक अभ्यासों को सरल और सुलभ तरीके से दैनिक जीवन में एकीकृत करता है।
जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से मिलेगी राहत
संस्थान के एक अधिकारी ने बताया कि भारत में आज मधुमेह, हाइपरटेंशन, हृदय रोग, श्वसन संबंधी बीमारियां और मानसिक स्वास्थ्य विकार जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों में चिंताजनक वृद्धि देखी जा रही है। हाल के अनुमानों के अनुसार, देश में होने वाली लगभग दो-तिहाई मौतें इन्हीं बीमारियों के कारण होती हैं। यह जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों की ओर एक स्पष्ट बदलाव का संकेत देती है।
30 से 60 मिनट तक रोजाना योग की सिफारिश
अधिकारी ने बताया कि गैर-संक्रामक रोगों से होने वाली मृत्यु दर में प्रतिवर्ष हो रही वृद्धि को देखते हुए निवारक उपायों की आवश्यकता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है। इसी संदर्भ में नए योग प्रोटोकॉल का महत्व बढ़ गया है। वैज्ञानिक प्रमाणों और नैदानिक दृष्टिकोण पर आधारित यह मॉड्यूल 30 से 60 मिनट के दैनिक सत्र की सिफारिश करता है, जिसमें आसन, प्राणायाम, ध्यान और विश्राम तकनीकें शामिल हैं। इसे विभिन्न फिटनेस स्तरों और स्वास्थ्य स्थितियों के अनुरूप बनाया गया है।
एक अन्य आधिकारी ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य योग को स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जीवनभर का साथी बनाना है। इसमें छोटे बच्चों के लिए मनोरंजक योग मॉड्यूल से लेकर किशोरों के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर केंद्रित दिनचर्या, बुजुर्गों के लिए गतिशीलता बढ़ाने वाले अभ्यास और महिलाओं और गर्भवती माताओं के लिए विशेष दिशानिर्देश शामिल हैं।
(समाचार एजेंसी पीटीआई इनपुट के साथ)