जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। लोकसभा ने ट्रांसजेंडर की सुरक्षा व अधिकारों से जुड़े संशोधन विधेयक को मंगलवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार ने विधेयक पर हुई चर्चा पर जवाब देते हुए कहा कि विधेयक का मकसद उन लोगों को सुरक्षा देना है जिन्हें बायोलॉजिकल समस्याओं की वजह से बायकाट का सामना करना पड़ता है। इस बदलाव से यह पक्का होगा कि ट्रांसजेंडर लोगों को कानूनी पहचान और सुरक्षा दोनों ही मिलती रहेगी।
14 साल की जेल की सजा
ट्रांसजेंडर के अधिकारों के संरक्षण से जुड़े संशोधन विधेयक-2026 पर विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय मंत्री कुमार ने कहा कि इस विधेयक से ट्रांसजेंडर के अधिकारों को प्रभावित करने वाले लोगों को अब अधिकतम 14 साल की जेल की सजा प्रविधान किया गया है।
2019 के कानून में ऐसे मामलों में अधिकतम दो साल की सजा का प्रविधान किया गया था। इस दौरान संशोधन विधेयक का विपक्ष का विरोध किया। साथ ही संसद की स्थाई समिति के पास भेजने की मांग की।
विपक्ष का कहना था कि कि सरकार इस विधेयक के जरिए ट्रांसजेंडर को खुद की पहचान तय करने के दिए गए अधिकार को छीन रही है। गौरतलब है कि राज्यसभा से इस विधेयक के पारित होने के बाद यह कानूनी रूप ले लेगा।
यह होंगे प्रमुख बदलाव
विधेयक ‘ट्रांसजेंडर’ शब्द की परिभाषा को संशोधित करता है। इसमें अब जैविक या शारीरिक लक्षणों या विशिष्ट सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान (जैसे किन्नर, हिजड़ा ) वाले व्यक्तियों को ही शामिल करने का प्रस्ताव है।
इस विधेयक के जरिए ट्रांसजेंडर की खुद पहचान तय करने के दिए गए अधिकार को सीमित कर दिया गया है। अब ट्रांसजेंडर के रूप में मान्यता प्राप्त कतरने के लिए उन्हें मेडिकल बोर्ड से प्रमाण पत्र लेना अनिवार्य होगा।
ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के खिलाफ अपराधों पर उसकी गंभीरता के आधार पर अधिकतम 14 साल की सजा का प्रविधान किया गया है।
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