पीटीआई, नई दिल्ली। लोकसभा की कार्यवाही के दौरान बुधवार को एक ऐसा दुर्लभ और भावुक पल देखने को मिला, जिसने संसदीय परंपराओं में एक नई इबारत लिख दी।
अमूमन सदन को अनुशासित करने वाले ‘पीठासीन अधिकारी’ की कुर्सी से जब एक जिज्ञासु सांसद की आवाज गूंजी, तो पूरा सदन इस अनूठे दृश्य का साक्षी बन गया। जब ‘आसन’ ही बन गया ‘सवाल’ तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) के वरिष्ठ नेता कृष्ण प्रसाद तेनेती प्रश्नकाल के दौरान लोकसभा अध्यक्ष की कुर्सी संभाल रहे थे।
तभी संयोगवश प्रश्नकाल की सूची में वह प्रश्न आया, जो स्वयं तेनेती ने दुर्लभ मृदा खनिजों को लेकर पूछा था। नियमानुसार, पीठासीन अधिकारी प्रश्न नहीं पूछते, लेकिन विषय की गंभीरता और अपनी जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाते हुए तेनेती ने सदन से अनुमति मांगी।
उन्होंने मुस्कुराते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से कहा, ‘अगला प्रश्न मेरे नाम पर है। यदि आपकी अनुमति हो, तो क्या आप उत्तर देंगे?’
विकास और पर्यावरण का संतुलन अपनी जिज्ञासा रखते हुए तेनेती ने पूछा कि जब हमें तटीय क्षेत्रों में दुर्लभ खनिज मिलते हैं, तो पर्यावरण की रक्षा और संसाधनों के दोहन के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए?
यह प्रश्न केवल एक सांसद का नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति एक सजग नागरिक की चिंता का स्वर था। सरकार का जवाब और सुरक्षा की चिंता केंद्रीय मंत्री जितेंद्र ¨सह ने इस दुर्लभ क्षण का सम्मान करते हुए विस्तार से उत्तर दिया।
उन्होंने बताया कि बीच सैंड मिनरल्स दो मुख्य स्त्रोतों – तटीय निक्षेपों और चट्टानों से मिलते हैं। उन्होंने पिछली चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा, ‘2014-15 के दौरान ग्रेफाइट की आड़ में मोनाजाइट (थोरियम का स्त्रोत) की तस्करी एक बड़ी समस्या बन गई थी। इसे रोकने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए और कुछ समय के लिए प्रतिबंध भी लगाया।’
सदन में हुई यह संक्षिप्त लेकिन सारगर्भित चर्चा इस बात का प्रमाण रही कि लोकतंत्र में जब पद की गरिमा और जनहित की जिज्ञासा का मिलन होता है, तो वह पल ऐतिहासिक बन जाता है।