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लंबे इंतज़ार के बाद वंदे भारत स्लीपर ट्रेन आख़िरकार भारतीय रेल में शामिल हो गई है. ऐसी पहली ट्रेन कामख्या और हावड़ा के बीच चलाई जा रही है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार को पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
इस ट्रेन को राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है. इससे पहले जो वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं, उनमें केवल बैठकर यात्रा करने की सुविधा थी.
हालाँकि शुरुआती योजना में वंदे भारत स्लीपर ट्रेन साल 2020 में ही शुरू हो जानी थी. जब इस ट्रेन की योजना बनाई गई थी, तब इसका नाम टी-20 रखा गया था, जो साल 2020 से जोड़कर दिया गया था.
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अब क़रीब 6 साल बाद यह ट्रेन पटरियों पर पहुंच गई है.
चेन्नई की इंटिग्रल कोच फ़ैक्ट्री (आईसीएफ़) ने टी-18 और टी-20 का कंसेप्ट और इसका मॉडल तैयार किया था.
इनमें से एक ट्रेन साल 2018 में चलनी थी, जो 15 फ़रवरी 2019 को वंदे भारत (डे ट्रेन, जिसमें बैठने की व्यवस्था है) से चली.
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का नाम कंसेप्ट के वक़्त टी-20 रखा गया था और यह ट्रेन भी पटरियों पर है.
भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन असम और पश्चिम बंगाल राज्य को जोड़ रही है.
संयोग से इन दोनों ही राज्यों में जल्द ही विधानसभा चुनाव होने हैं.
नज़र डालते हैं, इस ट्रेन से जुड़े उन सवालों पर जिनके बारे में लोग गूगल पर सर्च कर रहे हैं-
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का रूट क्या है?
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भारत में जो पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन चलाई जा रही है, कामख्या और हावड़ा के बीच चल रही है.
रेल मंत्रालय के प्रवक्ता (ईडीआईपी) ने बीबीसी को बताया है कि इस ट्रेन का नंबर 27575 और 27576 होगा, जो हावड़ा-कामख्या-हावड़ा के बीच चलाई जाएगी.
इस ट्रेन का कॉमर्सियल स्टॉपेज कामख्या, रांगिया, न्यू बॉन्गईगांव, न्यू अलीपुरद्वार, न्यू कूच बिहार, जलपाईगुड़ी रोड, न्यू जलपाईगुड़ी, अलुआबाड़ी रोड, मालदा टाउन, न्यू फरक्का जं., अज़ीमगंज, कटवा जं., नबाद्वीप धाम, बंडेल जं. और हावड़ा होगा.
इस ट्रेन की स्पीड कितनी है?
हावड़ा और कामख्या के बीच चलने वाली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मुसाफ़िरों का क़रीब तीन घंटे का समय बचाएगी.
हालाँकि इस ट्रेन की अधिकतम डिज़ाइन स्पीड 180 किलोमीटर प्रति घंटे है लेकिन जब यह ट्रेन अपनी सेवा में होगी तो रूट के क्षमता के मुताबिक़ स्पीड होगी. माना जाता है कि इस रूट पर वंदे भारत की औसत स्पीड इसकी डिज़ाइन स्पीड से काफ़ी कम होगी.
दरअसल, वंदे भारत एक ट्रेन सेट है और इसके कम समय में रुकने या स्पीड पकड़ने की क्षमता इसकी ख़ासियत है, जिससे यह अपना सफ़र कम समय में पूरी कर लेती है.
नॉर्थ फ़्रंटियर रेलवे ने इस ट्रेन के पहले सफ़र से जुड़ी जो जानकारी बीबीसी से साझा की है, उसके मुताबिक़ यह ट्रेन 17 जनवरी को दोपहर एक बजकर पंद्रह मिनट पर कामख्या से रवाना होगी और अगले दिन सुबह 3:55 पर हावड़ा पहुँचेगी.
इस तरह से इस ट्रेन की स्पीड इस सफर के दौरान क़रीब 65 किलोमीटर प्रतिघंटे की होगी.
गुवाहटी और हावड़ा
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गुवाहटी और हावड़ा के बीच ट्रेन रूट की दूरी क़रीब एक हज़ार किलोमीटर है. हालाँकि वंदे भारत ट्रेन गुवाहटी के ही कामख्या स्टेशन से चलेगी और यह जिस रूट से हावड़ा पहुँचेगी उसकी दूरी क़रीब 958 किलोमीटर है.
पहली वंदे भारत ट्रेन का टाइम टेबल
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पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को पीएम मोदी 17 जनवरी को मालदा टाउन रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे.
यह ट्रेन दोनों तरफ़ से सप्ताह में छह दिन (बुधवार को छोड़कर) चलाई जाएगी. कामख्या से यह ट्रेन बुधवार को छोड़कर हर दिन शाम 6:15 पर चलेगी और अगले दिन सुबह 8:15 पर हावड़ा पहुँचेगी.
हावड़ा से यह ट्रेन गुरुवार छोड़कर हर दिन शाम 6:20 पर रवाना होगी और सुबह 8:20 पर कामख्या पहुँचेगी.
हालाँकि ट्रेन के नियमित चलने के बारे में अधिसूचना कुछ दिनों के बाद जारी होगी, यानी यह ट्रेन कब से आम मुसाफ़िरों के लिए उपलब्ध होगी.
इस ट्रेन का किराया
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन का किराया सामान्य मेल एक्सप्रेस ट्रेनों की तुलना में ज़्यादा होगी. अगर हम 12346 गुवाहटी-हावड़ा सरायघाट एक्सप्रेस से तुलना करें, जो कि एक सुपरफ़ास्ट ट्रेन है तो-
कामख्या और हावड़ा के बीच वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में एसी 3 का किराया 2999 रुपये (5% जीएसटी अलग से) है जबकि सरायघाट एक्सप्रेस में यह किराया क़रीब दो हज़ार रुपये हैं.
वहीं इस रूट पर वंदे भारत के एसी 2 का किराया 2970 (5% जीएसटी अतिरिक्त) रखा गया है जबकि अन्य सामान्य सुपरफ़ास्ट ट्रेन में यह किराया क़रीब 2970 रुपये है.
इस किराये में खान-पान के पैसे भी शामिल हैं. एक ख़ास बात यह भी है कि इस ट्रेन में कम से कम 400 किलोमीटर की दूरी के टिकट ही बुक किए जा सकते हैं.
टिकट कैसे कर सकते हैं बुक
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वंदे भारत ट्रेनों के लिए भी आम ट्रेनों की तरह एडवांस टिकट बुक किए जा सकते हैं जो ट्रेन चलने के 60 दिन पहले शुरू होती है.
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन की बात करें तो इसमें एसी3 की 611 बर्थ, एसी2- 188 बर्थ और एसी1 की 24 बर्थ हैं.
यानी इस ट्रेन में कुल 823 मुसाफ़िरों के लिए बर्थ होगी. 16 कोच की इस ट्रेन में एसी3 के 11 कोच, एसी2 के 4 और एसी1 का एक कोच होगा.
भारत में कितनी वंदे भारत ट्रेनें
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भारत में फ़िलहाल 164 वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं. ये ट्रेनें स्लीपर क्लास की ट्रेनों से अलग है और इनमें शताब्दी एक्सप्रेस की तरह बैठकर यात्रा करने की सुविधा होती है.
भारत में पहली वंदे भारत एक्सप्रेस 15 फ़रवरी 2019 को दिल्ली और वाराणसी के बीच चलाई गई थी.
अब इसकी कुल संख्या 82 हो गई है. इस तरह से अप-डाउन मिलाकर वंदे भारत की कुल 164 सेवाएँ चल रही हैं.
ईसी, सीसी और एनसी क्या हैं?
ट्रेनों में ईसी क्लास उन ट्रेनों या क्लास से संबंधित है, जिनमें शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेनों की तरह बैठने की सुविधा होती है.
ईसी का मतलब होता है एग्जीक्यूटिव क्लास. इसमें बैठने के लिए सीटें होती हैं, जो आरामदायक मानी जाती हैं.
सीसी- इसका मतलब होता है चेयर कार. यह भी बैठने के है, हालाँकि सुविधा और आरामदेह होने के लिहाज से ही ईसी से कमतर होती हैं.
एनसी- इसका मतलब होता है ‘नो चॉइस’. मसलन अगर आप किसी ट्रेन में टिकट बुक कर रहे हैं तो आपसे पूछा जा सकता है कि आप कौन सी बर्थ लेना चाहेंगे. ऐसे में आपके पास ‘एससी’ का भी एक ऑप्शन हो सकता है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.