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लोकसभा में बुधवार को अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को वक़्फ़ संशोधन बिल लोकसभा में पेश किया और इसके बाद इस पर चर्चा शुरू हुई.
बिल पर चर्चा के लिए आठ घंटे का वक़्त तय किया गया है और इस दौरान सत्ता पक्ष के साथ विपक्षी दल अपनी-अपनी बातें रखेंगे.
चर्चा के दौरान बुधवार को एक मौक़ा ऐसा भी आया जब समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आमने-सामने आ गए.
अखिलेश यादव ने बीजेपी के अध्यक्ष पद पर चुटकी ली तो अमित शाह ने भी उन्हीं के अंदाज़ में जवाब दिया.
इससे पहले, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन ने चर्चा की शुरुआत में लगभग एक घंटा लंबा भाषण दिया और सदन के सदस्यों को बिल के प्रति आश्वासन दिया.
किरेन रिजिजू के आश्वासन से लेकर विपक्षी दलों की चिंताएं, किसने क्या कहा और संसद में चर्चा के दौरान क्या-क्या हुआ? आइए जानते हैं.
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‘राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाए अभी तक’
दोपहर दो बजे के बाद जब अखिलेश यादव के बोलने की बारी आई तो उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष को घेरने की कोशिश की.
अखिलेश यादव ने कहा, “जो पार्टी यह कहती हो कि दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी है, वह अभी तक अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं चुन पाई है. भारतीय जनता पार्टी क्या है?”
इस दौरान अमित शाह मुस्कुराते हुए दिखे और इसी अंदाज़ में उन्होंने जवाब देते हुए कहा, “अखिलेश जी ने हंसते-हंसते कहा है, मैं इसका हंसते-हंसते जवाब दूंगा. ये सामने जितनी भी पार्टिया हैं. उनका राष्ट्रीय अध्यक्ष उनके परिवार के पांच लोगों को ही चुनना है. हमें करोड़ों सदस्यों में से चुनना है. आपके यहां ज़रा भी देर नहीं लगेगी. मैं कहता हूं कि आप (अखिलेश) 25 साल तक के लिए अध्यक्ष हो जाओ.”
इसके बाद अखिलेश यादव ने वक़्फ़ संशोधन बिल पर अपनी बात रखी.
उन्होंने कहा, “भाजपा जब भी कोई नया बिल लाती है तो वह अपनी नाक़ामी छिपाती है. भाजपा वाले मुस्लिम भाइयों की वक्फ़ की ज़मीन छीनने की बात कर रहे हैं, जिससे महाकुंभ में जो हिंदू मारे गए हैं या खो गए हैं, उनको चिह्नित करने की बात पर पर्दा पड़ जाए. वक़्फ़ बिल पर इनकी न तो नीति सही है और न ही नीयत. ये देश के करोड़ों लोगों से उनके घर-दुकान छीनने की साज़िश है.”
उनका कहना था कि वक़्फ़ संशोधन बिल का एकमात्र उद्देश्य मुस्लिम भाइयों के सार्वजनिक अधिकार को छीनकर उनके महत्व और नियंत्रण को कम करना है.
बीजेपी की सहयोगी जेडीयू-टीडीपी क्या बोलीं?
बिल के लोकसभा में पेश होने से पहले यह कयास लगाए जा रहे थे कि जनता दल (यूनाइटेड) और तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) का रुख़ सत्ता पक्ष से अलग हो सकता है. लेकिन आख़िर में ऐसा नहीं हुआ और दोनों पार्टियों ने बिल का समर्थन किया.
जेडीयू की तरफ़ से सांसद और केंद्र सरकार में पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह का कहना था कि यह बिल कहीं से भी मुसलमान विरोधी नहीं है.
ललन सिंह ने कहा, “वक़्फ़ कोई मुस्लिम संस्था है क्या? वक़्फ़ कोई धार्मिक संस्था नहीं है. यह एक ट्रस्ट है जो मुसलमानों के कल्याण के लिए काम करता है. उस ट्रस्ट को ये अधिकार होना चाहिए कि वो मुसलमान समुदाय के हर वर्ग के साथ न्याय करे, जो नहीं हो रहा है. आज मोदी जी को कोसा जा रहा है. आप मोदी जी का चेहरा पसंद नहीं करते हैं तो मत देखिए उनकी तरफ़, उनके अच्छे काम की प्रशंसा कीजिए.”
ललन सिंह का कहना था कि जेडीयू और नीतीश कुमार को कांग्रेस पार्टी या किसी और पार्टी के सेक्युलरिज़म के सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं है.
टीडीपी की ओर से बापतला लोकसभा क्षेत्र से सांसद कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने पार्टी का पक्ष सदन में रखा.
कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने कहा, “वक़़्फ के पास 1.2 लाख करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति है. ये संपत्तियां कुप्रबंधन (मिसमैनेजमेंट) की शिकार हैं. हमारी पार्टी का ये मानना है कि इस संपत्ति का इस्तेमाल मुस्लिमों के कल्याण के लिए, महिलाओं के कल्याण के लिए किया जाना चाहिए. हमारा मानना है कि इसमें सुधार होना चाहिए. हम सबसे पहले दल थे जिसने जेपीसी की मांग की थी.”
कांग्रेस, टीएमसी समेत विपक्षी दलों ने क्या कहा?
लोकसभा में विपक्ष के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को लेकर किरेन रिजिजू ने जो बातें कही हैं, वो निराधार हैं.
गोगोई ने आरोप लगाया कि जब किरेन रिजिजू बोल रहे थे तो विपक्ष से किसी को भी प्वाइंट ऑफ़ ऑर्डर उठाने का मौक़ा नहीं दिया गया. इसके बाद उनकी लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और किरेन रिजिजू से हल्की नोंक-झोंक हो गई.
गौरव गोगोई ने कहा, “मंत्री (किरेन रिजिजू) ने यूपीए के बारे में जो कहा वो झूठ है. हमारी डिमांड है कि ये उसे ऑथेंटिकेट करें. इनका पूरा भाषण हमारे संघीय ढांचे पर आक्रमण था. इनके उद्देश्य हैं- संविधान को कमज़ोर करना, भ्रम फैलाना, समाज को बांटना. आज ये अल्पसंख्यकों के प्रति संवेदना जता रहे हैं.”
“कुछ दिन पहले देश के अलग-अलग हिस्सों में लोगों ने ईद की शुभकामनाएं दीं और इनकी डबल इंजन सरकारों ने लोगों को नमाज तक नहीं पढ़ने दी. आज इनकी एक समाज की ज़मीन पर नज़र है. कल दूसरे अल्पसंख्यकों की ज़मीन पर इनकी नज़र जाएगी.”
गौरव ने पूछा कि बीजेपी को बताना चाहिए कि लोकसभा में उनके कितने सांसद अल्पसंख्यक हैं.
टीएमसी संसदीय दल के नेता कल्याण बनर्जी ने वक़्फ़ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि ये संविधान के ख़िलाफ़ है.
उनका कहना था, “यह संवैधानिक ढांचे पर प्रहार है और हम इस बिल का पूरी तरह से विरोध करते हैं. बीजेपी वक़्फ़ पर राजनीति कर रही है. वक़्फ़ संपत्ति मुस्लिम समुदाय के लिए बैकबोन है. वक़्फ़ संशोधन विधेयक में किए जा रहे बदलाव इस्लामिक परंपराओं और संस्कृति को लेकर गंभीर चिंता का विषय हैं.”
उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सांवत ने आरोप लगाया कि जेपीसी में बिल पर सही से चर्चा तक नहीं हुई.
अरविंद सांवत ने लोकसभा को बताया, “मेरे मित्र रिजिजू ने बहुत कुछ कहा. सबसे बड़ी बात है कि मैं ख़ुद भी जेपीसी में था और दुर्भाग्य की बात है कि जेपीसी में आख़िर तक सही से चर्चा नहीं हुई. क्योंकि जेपीसी में नॉन स्टेक होल्डर्स को भी बुलाया जाता था. अब ऐसी स्थिति में आप बिल लाते हो तो आपका उद्देश्य क्या है? हर वक़्त हमें महसूस हुआ है कि आप लोगों की कथनी और करनी में बहुत फ़र्क़ होता है.”
हम कांग्रेस की गलतियां सुधार रहे: जगदंबिका पाल
बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल बिल पर बनी जेपीसी के चेयरमैन थे. उनके नेतृत्व में जेपीसी ने अपनी रिपोर्ट संसद के दोनों सदनों को सौंपी थी.
जगदंबिका पाल ने कहा कि कांग्रेस की सरकारों ने भी वक़्फ़ बिल में संशोधन किए थे. उन्होंने कहा, “हम तो कांग्रेस की गलतियों को सुधार रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “विपक्ष और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड मुसलमानों को भ्रमित कर रहा है. ज़ाकिर नाइक, ओवैसी और पर्सनल लॉ बोर्ड कोशिश कर रहे हैं, पर बिल नहीं रुकेगा. वक़्फ़ की प्रॉपर्टी का फ़ायदा अब गरीब मुसलमानों को मिलेगा.”
वक़्फ़ संशोधन विधेयक लोकसभा में पेश करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार मस्जिदों के प्रबंधन या धार्मिक क्रियाकलापों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी.
किरेन रिजिजू ने बताया, “इस बिल पर जेपीसी ने जितनी चर्चा की है. भारत के संसदीय इतिहास में इतनी व्यापक चर्चा नहीं हुई है. बिल के संबंध में कुल मिलाकर 97 लाख से ज़्यादा याचिकाएं सरकार ने देखी हैं. 284 डेलिगेशन ने अलग-अलग कमेटी के सामने अपनी बात रखी है. 25 राज्यों के वक़्फ़ बोर्ड ने अपना पक्ष रखा. पॉलिसी मेकर्स, विद्वानों ने भी अपनी बात कमेटी के सामने रखी हैं. इस बिल पर पॉजिटिव सोच से विरोध करने वाले भी समर्थन करेंगे.”
ख़बर प्रकाशित किए जाने तक लोकसभा की कार्यवाही चल रही है और इसके देर रात तक चलने की उम्मीद है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित