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‘वांगचुक के भाषण का उद्देश्य हिंसा फैलाना नहीं, बल्कि खत्म करना था’, सोनम की पत्नी ने सुप्रीम कोर्ट में रखी अपनी बात

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Jan 9, 2026


पीटीआई, नई दिल्ली। जेल में बंद जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे. आंगमो ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उनके पति के भाषण का उद्देश्य किसी भी तरह से प्रदेश की सुरक्षा को खतरे में डालने या फैलाने का नहीं, बल्कि उसे समाप्त करना था। लेकिन, उन्हें अपराधी के रूप में चित्रित करने के लिए तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश किया जा रहा है।

गीतांजलि ने सुप्रीम कोर्ट को यह भी बताया कि वांगचुक को उनकी हिरासत के ”पूर्ण आधार” प्रदान नहीं किए गए थे और उन्हें हिरासत के खिलाफ संबंधित प्राधिकरण के समक्ष अपना पक्ष रखने का उचित अवसर नहीं दिया गया था। इस मामले की सुनवाई बेनतीजा रही और 12 जनवरी को जारी रहेगी।

गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों के दो दिन बाद 26 सितंबर, 2025 को वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था। इन प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत हो गई थी और 90 लोग घायल हो गए थे।

सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। भारत की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली गतिविधियों में शामिल होने से रोकने हेतु व्यक्ति को हिरासत में लेने के लिए एनएसए केंद्र और राज्यों को अधिकार देता है। इसके तहत अधिकतम हिरासत अवधि 12 महीने है, हालांकि इसे पहले भी रद किया जा सकता है।

बहरहाल, गीतांजलि की ओर से पेश सीनियर एडवोकेट कपिल सिबल ने जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की पीठ को बताया कि वांगचुक को प्रशासन द्वारा पूर्वाग्रहपूर्ण गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए हिरासत में लिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट में वांगचुक के भाषण का वीडियो चलाते हुए सिब्बल ने कहा कि जलवायु कार्यकर्ता ने अपनी भूख हड़ताल तोड़ते हुए यह भाषण दिया था।

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