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भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर उसे एक ‘बुरा पड़ोसी’ कहा है.
उन्होंने कहा कि जहां भी अच्छे पड़ोसी जैसे रिश्तों की भावना होती है, वहां भारत मदद देता है, लेकिन जब ‘बुरे पड़ोसियों’ की बात आती है तो भारत को अपने लोगों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है.
भारत के नेबरहुड फ़र्स्ट पॉलिसी से जुड़े एक सवाल के जवाब में एस जयशंकर ने कहा, “आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं. बदकिस्मती से, हमारे हैं…अगर आप पश्चिम की तरफ देखें…”
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पड़ोसी देशों के प्रति भारत की कूटनीति पर ये बोले जयशंकर
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आईआईटी मद्रास में पढ़ने वाले एक छात्र ने एस जयशंकर के बांग्लादेश दौरे का ज़िक्र करते हुए पड़ोसी देशों को लेकर भारत की नीति के बारे में पूछा था.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम ख़ालिदा ज़िया के अंतिम संस्कार में भारत का प्रतिनिधित्व करने बांग्लादेश गए थे.
छात्र के सवाल पर उन्होंने कहा, “हमारे बहुत से पड़ोसी हैं, जो कि कई तरह के हैं…मैं आपके सवाल का जवाब एकदम सामान्य समझ के आधार पर देना चाहता हूं क्योंकि लोग डिप्लोमेसी को रॉकेट साइंस जैसा कठिन बना देते हैं.”
“आम समझ के हिसाब से आप किसी भी पड़ोसी के साथ क्या करते हैं. मान लीजिए आप किसी हॉस्टल में रहते हैं, वहां भी आपके पड़ोसी होते हैं.”
“अगर आपका पड़ोसी आपके लिए अच्छा है, या कम से कम आपको नुकसान पहुंचाने वाला नहीं है, तो आपकी स्वाभाविक प्रवृत्ति यही होती है कि आप उसके लिए उदार रहें, उसकी मदद करें.”
उन्होंने कहा, “अगर पड़ोसी किसी परेशानी में है, तो आप किसी न किसी तरह से मदद करेंगे…आपसी दोस्ती और आपसी जुड़ाव बनाने की कोशिश करेंगे. एक देश के तौर पर हम भी यही करते हैं.”
हालांकि भारत और बांग्लादेश के बीच हाल के दिनों में काफ़ी तनाव देखा गया था.
बांग्लादेश में बीएनपी अध्यक्ष ख़ालिदा ज़िया को श्रद्धांजलि देने गए एस जयशंकर और वहां की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के बीच किसी औपचारिक बैठक न होने को लेकर कई तरह की चर्चाएं भी चलीं.
इससे पहले बांग्लादेश पुलिस ने दावा किया था कि छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के अभियुक्त मेघालय भाग गए हैं. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस दावे का खंडन किया था.
वहीं भारत ने बांग्लादेश में हिंदू युवक दीपू चंद्र दास की हत्या का ज़िक्र करते हुए वहां अल्पसंख्यकों के हालात पर चिंता जताई थी.
दिल्ली में बांग्लादेश के विरोध में प्रदर्शन हुए थे तो वहीं ढाका में भारत विरोधी प्रदर्शन देखे गए थे.
अच्छे पड़ोसियों को मदद देता है भारत: एस जयशंकर
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एस जयशंकर ने कहा, “जब आप हमारे आसपास के पड़ोस को देखते हैं, जहां भी अच्छे पड़ोसी जैसे रिश्तों की भावना होती है, वहां भारत निवेश करता है, भारत मदद देता है और भारत शेयर करता है.”
उन्होंने कोविड-19 के समय का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत के ज़्यादातर पड़ोसियों को वैक्सीन की पहली खेप भारत से मिली, जबकि उस दौरान भारत का टीकाकरण कार्यक्रम जारी था.
उन्होंने दूसरा उदाहरण देते हुए कहा कि यूक्रेन संकट के कारण खाने की कमी हुई, ईंधन की कमी हुई और आर्थिक संकट की स्थिति बनी. विदेश मंत्री ने कहा कि इस दौरान भी भारत ने अपने कई पड़ोसियों की मदद की.
उन्होंने श्रीलंका के आर्थिक संकट का ज़िक्र करते हुए कहा, “कुछ पड़ोसी बहुत ही असाधारण तनाव से गुज़रे, इनमें से एक श्रीलंका था और हमने उस समय चार अरब डॉलर के पैकेज से श्रीलंका की मदद की.”
जयशंकर ने कहा कि एक अच्छा पड़ोसी यही कर सकता है.
उन्होंने कहा, “हाल ही में श्रीलंका में दित्वाह चक्रवाती तूफ़ान आया था. जिस दिन ये तूफ़ान आया, उसी दिन हम मदद के लिए वहां (श्रीलंका) थे.”
जयशंकर ने कहा कि पड़ोसी देशों के आम लोगों को भी इस बात का एहसास है कि उनके साथ भारत जैसा पड़ोसी है और बुरे दौर में वे हमारे ऊपर निर्भर रह सकते हैं.
जयशंकर बोले- लेकिन पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं
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एस जयशंकर ने कहा, “आपके पड़ोसी बुरे भी हो सकते हैं. बदकिस्मती से, हमारे हैं. जब आपके पड़ोसी बुरे हों…अगर आप पश्चिम की तरफ देखें, अगर कोई देश यह तय करता है कि वह जानबूझकर, लगातार और बिना पछतावे के आतंकवाद जारी रखेगा, तो हमें अपने लोगों को आतंकवाद से बचाने का अधिकार है. हम उस अधिकार का इस्तेमाल करेंगे.”
उन्होंने कहा, “हम उस अधिकार का इस्तेमाल कैसे करेंगे, यह हम पर निर्भर करता है. कोई हमें यह नहीं बता सकता कि हमें क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चाहिए. हम अपनी रक्षा के लिए जो कुछ भी करना होगा, वह करेंगे.”
एस जयशंकर ने इस दौरान सीधे-सीधे पाकिस्तान का नाम नहीं लिया. हालांकि, उन्होंने कहा, “कई साल पहले, हमने पानी बांटने की व्यवस्था पर सहमति जताई थी…वह सद्भावना का भाव था. एक अच्छा पड़ोसी होने के नाते हम वैसा कर रहे थे.”
जयशंकर ने कहा, “अगर आपके यहां दशकों तक आतंकवाद होता रहे, तो अच्छे पड़ोसी का भाव नहीं आ सकता. अगर ये नहीं होगा, तो आपको उसका फ़ायदा नहीं मिलेगा. आप यह नहीं कह सकते, ‘कृपया मेरे साथ पानी शेयर करें, लेकिन मैं आपके साथ आतंकवाद जारी रखूंगा.’ यह मुमकिन नहीं है.”
बता दें कि भारत की पाकिस्तान के साथ 1960 की सिंधु जल संधि को पहलगाम हमले के बाद निलंबित कर दिया गया था.
22 अप्रैल 2025 को कश्मीर के पहलगाम में पर्यटकों को निशाना बनाकर किए गए हमले में 26 लोगों की मौत हो गई थी.
इसके कुछ दिन बाद ही भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया था, जिससे भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के बाद से पहली बार बड़े युद्ध की आशंका पैदा हो गई थी.
बांग्लादेश में जयशंकर की पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर से मुलाक़ात
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आईआईटी मद्रास के कार्यक्रम में अपने बांग्लादेश दौरे को लेकर जयशंकर ने कहा, “अगर भारत आगे बढ़ेगा, तो हमारे सभी पड़ोसी भी हमारे साथ आगे बढ़ेंगे. मुझे लगता है कि यही संदेश मैं बांग्लादेश भी लेकर गया था.”
“अभी वहां चुनाव होने वाले हैं. हम उन्हें चुनाव के लिए शुभकामनाएं देते हैं, और हमें उम्मीद है कि जब हालात सामान्य हो जाएंगे, तो इस क्षेत्र में पड़ोसियों के बीच अच्छे संबंध और बढ़ेंगे.”
एस जयशंकर के बांग्लादेश दौरे के दौरान उनकी पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के स्पीकर सरदार अयाज़ सादिक़ के साथ तस्वीरों की काफ़ी चर्चा हुई थी.
पाकिस्तान की नेशनल असेंबली ने 31 दिसंबर को एक्स पर दोनों की हाथ मिलाती तस्वीरें शेयर की. साथ ही, इसे मई 2025 के संघर्ष के बाद भारत की ओर से ‘उच्च स्तरीय संपर्क’ की यह पहली कोशिश बताया था.
जयशंकर और अयाज़ सादिक़ की तस्वीर को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के एक्स हैंडल से भी पोस्ट किया गया था.
वहीं एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान से मुलाक़ात की तस्वीरें ही शेयर की, लेकिन अयाज़ सादिक़ से मुलाक़ात का कोई ज़िक्र नहीं किया.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.