इमेज कैप्शन, वैभव सूर्यवंशी को लेकर भारत ही नहीं, पाकिस्तान में भी चर्चा है (फ़ाइल फ़ोटो)….में
ऐसे समय में जब पूरी दुनिया फ़ुटबॉल के जुनून में डूबी हुई है और सबका ध्यान फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप पर है, भारत की क्रिकेट टीम का आयरलैंड और इंग्लैंड के हाथों लगातार हारना भी किसी बड़ी सुर्खी से कम नहीं है.
इस निराशाजनक प्रदर्शन पर पूरे भारत में आलोचना का माहौल है. साथ ही इस बात पर भी नाराज़गी जताई जा रही है कि भारतीय टीम प्रबंधन 15 साल के युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी के साथ न्याय नहीं कर सका और उन्हें जितने मौक़े मिलने चाहिए थे, उतने नहीं मिले.
लगातार दो बार टी-20 विश्व चैंपियन रही भारतीय क्रिकेट टीम आयरलैंड के ख़िलाफ़ दोनों टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच हारने के बाद इंग्लैंड से भी पांच मैचों की श्रृंखला में 4-0 से हार गई.
इसके साथ ही भारत फ़रवरी 2022 से कायम टी-20 रैंकिंग में अपना नंबर वन स्थान भी गंवा बैठा.
भारत का टी-20 में नंबर एक स्थान खोना निश्चित रूप से बड़ी बात है, लेकिन इस समय सबसे अधिक चर्चा 15 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी को लेकर हो रही है, जिन्हें इंग्लैंड के ख़िलाफ़ तीन मैच खिलाने के बाद प्लेइंग टीम से बाहर कर दिया गया.
अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस में शंकर नारायण ने अपने एक लेख में सवाल उठाया कि भारत ने एक ऐसे खिलाड़ी को सिर्फ एक मैच के लिए बाहर बैठा दिया, जिसे इसके बाद ज़िम्बाब्वे दौरे पर जाना है, जबकि उसकी जगह ऐसे खिलाड़ी को मौक़ा दिया गया जो ज़िम्बाब्वे दौरे की टीम में शामिल ही नहीं है.
दरअसल इस मैच में सूर्यवंशी को बाहर करके संजू सैमसन को खिलाया गया.
क्रिकेट प्रेमियों की नाराज़गी
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इमेज कैप्शन, भारत के महान बल्लेबाज रहे सुनील गावस्कर भी अंतिम टी-20 मैच में सूर्यवंशी को बाहर किए जाने से खुश नहीं दिखे (फ़ाइल फ़ोटो)
वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के ख़िलाफ़ दूसरे टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में अपना डेब्यू किया और 14 रन बनाए. तीसरे मैच में उन्होंने 13 रन बनाए, जबकि चौथे मैच में उनके बल्ले से 15 रन निकले.
उन्हें आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम में चुना गया था. उन्होंने 237 के स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए थे, जिसमें 72 छक्के शामिल थे.
उन्हें टीम से बाहर किए जाने पर भारत में कई लोगों ने नाराज़गी जताई. आम लोगों ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया दी, वहीं कई पूर्व टेस्ट क्रिकेटरों ने भी इस फ़ैसले पर असहमति व्यक्त की.
सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी में कहा गया कि पांचवें मैच से बाहर किए जाने के बाद सूर्यवंशी डगआउट में अकेले और बेहद निराश बैठे दिखाई दिए.
इसे कप्तान श्रेयस अय्यर और मुख्य कोच गौतम गंभीर का बहुत कठोर फ़ैसला बताया गया.
भारत के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर भी अंतिम टी-20 मैच में सूर्यवंशी को बाहर किए जाने से खुश नहीं दिखे.
उनका कहना था, “अगर यह मैच सिरीज़ का फ़ैसला करने वाला होता, तो सूर्यवंशी को नहीं खिलाना समझ में आता. लेकिन ऐसा नहीं था. एक 15 साल के खिलाड़ी को केवल तीन मैचों के बाद बाहर कर देना सही नहीं है. मेरा मानना है कि किसी को उसके कंधे पर हाथ रखकर यह भरोसा देना चाहिए कि यह अंत नहीं है.”
रवि शास्त्री का कहना है कि सूर्यवंशी को आयरलैंड के ख़िलाफ़ ही डेब्यू का मौक़ा मिल जाना चाहिए था.
इंग्लैंड के पूर्व स्पिनर ग्रीम स्वान ने भी सूर्यवंशी को टीम से बाहर करने के फ़ैसले पर हैरानी जताई. उन्होंने कहा कि वह अपनी पीढ़ी की असाधारण प्रतिभा हैं और केवल तीन मैचों के बाद उन्हें बाहर किया जाना उचित नहीं था.
पाकिस्तान में कैसी प्रतिक्रिया?
सिर्फ भारत ही नहीं, पाकिस्तान में भी भारत की इंग्लैंड के ख़िलाफ़ हार और ख़ास तौर पर वैभव सूर्यवंशी को लेकर चर्चा हो रही है.
पाकिस्तान के पूर्व कप्तान राशिद लतीफ़ ने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से बातचीत में कहा, “भारतीय टीम इस दौरे पर जरूरत से ज़्यादा आत्मविश्वास का शिकार थी. उसने इंग्लैंड को हल्के में लिया, जबकि अपनी परिस्थितियों में इंग्लैंड एक बेहतरीन टी-20 टीम है.”
“दूसरी ओर भारतीय खिलाड़ी कुछ समय से आईपीएल और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बल्लेबाजी के अनुकूल घरेलू पिचों पर खेलते आ रहे थे. इसलिए जो कुछ हुआ, वह पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं था.”
उन्होंने आगे कहा, “जहां तक सूर्यवंशी का सवाल है, अगर उन्हें टीम में चुना गया था तो उन्हें पूरा मौक़ा मिलना चाहिए था. टीम प्रबंधन ने दो खिलाड़ियों, वैभव सूर्यवंशी और संजू सैमसन, दोनों का नुक़सान किया है.”
“इसके अलावा उन्होंने अपनी टीम के सफल कप्तान सूर्यकुमार यादव को भी बाहर कर दिया. कप्तान और नेता में यही फर्क होता है. वह टीम को लगातार जीत दिला रहे थे. यह सही है कि उनके प्रदर्शन में गिरावट आई थी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें टीम से बाहर नहीं किया जाना चाहिए था.”
वरिष्ठ खेल पत्रकार वहीद खान ने बीबीसी हिन्दी से कहा, “यह हैरानी की बात है कि सूर्यवंशी को आख़िरी टी-20 मैच से बाहर कर दिया गया, जबकि उन्हें एक और मौक़ा देने में कोई नुक़सान नहीं था. इस फ़ैसले से निश्चित रूप से उनके आत्मविश्वास को झटका लगा होगा.”
वहीद खान ने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि इस युवा बल्लेबाज में प्रतिभा है, लेकिन उनके साथ भी वही समस्या रही जो इस दौरे पर बाक़ी भारतीय बल्लेबाजों के साथ देखने को मिली. वे आईपीएल की बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों और छोटी बाउंड्री पर खेलकर आए थे. उन्हें अच्छी शुरुआत मिली, लेकिन बड़े शॉट खेलने की कोशिश में वे अपना विकेट गंवा बैठे.”
भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन पर वहीद खान ने कहा, “ये नतीजे पूरी तरह अप्रत्याशित हैं. किसी ने नहीं सोचा था कि भारतीय टीम इस तरह हारेगी, ख़ास कर आयरलैंड के खिलाफ. इसकी एक वजह परिस्थितियों के अनुसार ख़ुद को ढालने में कठिनाई रही, क्योंकि टीम आईपीएल की पिचों पर खेलने के बाद सीधे इंग्लैंड पहुंची थी.”
उन्होंने कहा, “दूसरा बड़ा कारण मुख्य कोच गौतम गंभीर हैं, जिन्होंने लगातार गैर-जरूरी बदलाव किए. ऐसा लगता है कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में जिस तरह की कोचिंग की जरूरत होती है, उसके अनुरूप वह अभी ख़ुद को पूरी तरह ढाल नहीं पाए हैं.”
गौतम गंभीर की भूमिका
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इमेज कैप्शन, कई लोग गौतम गंभीर की भूमका पर भी सवाल उठा रहे हैं (फ़ाइल फ़ोटो)
पाकिस्तान के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर बाजिद खान ने कहा, “हर कोई जानता है कि सूर्यवंशी बहुत बड़े प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं, लेकिन जरूरत इस बात की है कि उनके करियर का बेहद सावधानी से ध्यान रखा जाए.”
“टी-20 क्रिकेट में उतार-चढ़ाव बहुत जल्दी आते हैं और खिलाड़ी तेजी से असफल भी हो सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट आसान नहीं है. सूर्यवंशी को अभी पूरी तरह विकसित होने में समय लगेगा.”
बाजिद खान का कहना था, “हालांकि यह बात सभी के लिए हैरान करने वाली थी कि उन्हें आयरलैंड के ख़िलाफ़ डेब्यू का मौक़ा नहीं दिया गया. और जब आपने इंग्लैंड जैसी बड़ी टीम के ख़िलफ़ उन्हें मौक़ा दिया, तो फिर पूरा अवसर भी देना चाहिए था.”
“जहां तक इंग्लैंड के ख़िलाफ़ भारतीय टीम के प्रदर्शन का सवाल है, सभी खिलाड़ी आईपीएल की बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों और छोटी बाउंड्री पर खेलकर आए थे, जबकि आयरलैंड और इंग्लैंड की परिस्थितियां बिल्कुल अलग थीं. इसके अलावा टीम में भी काफ़ी बदलाव किए गए थे.”
विश्लेषक डॉक्टर नौमान नियाज़ भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन के लिए सबसे अधिक जिम्मेदार गौतम गंभीर को मानते हैं. उनके अनुसार, गंभीर इस भूमिका के लिए पर्याप्त रूप से तैयार नहीं हैं.
उन्होंने कहा, “गौतम गंभीर के आने के बाद टीम की स्थिति किस तरह बदली है, यह सबके सामने है. विराट कोहली, रोहित शर्मा और रविचंद्रन अश्विन का एक-एक करके किसी एक फ़ार्मेट या पूरी तरह टीम से बाहर होना सभी ने देखा है. टीम में तालमेल में भी गौतम गंभीर की ग़लतियां हार का बड़ा कारण बनी हैं.
“जहां तक सूर्यवंशी का सवाल है, वह असाधारण प्रतिभा के खिलाड़ी हैं. उन्हें आयरलैंड के ख़िलाफ़ खिलाया जाना चाहिए था, ताकि आगे के मैचों के लिए उनका आत्मविश्वास बढ़ता. इतना ही नहीं, संजू सैमसन जैसे मैच विजेता खिलाड़ी के आत्मविश्वास पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ा.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.