जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के दावे के विपरीत वाणिज्य मंत्रालय ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू होने की जानकारी से इनकार किया है। मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक इस सप्ताह इस प्रकार की कोई वार्ता पहले से तय नहीं है। अगर अमेरिका की तरफ से वार्ता शुरू करने को लेकर कोई संदेश आता है तो उस पर भारत अपना फैसला लेगा।
गत सोमवार को गोर ने दोनों देशों के बीच 13 जनवरी से फिर से व्यापार समझौते पर वार्ता शुरू होने का दावा किया था। पिछले साल मार्च से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) को लेकर वार्ता शुरू हुई थी और पिछले साल अक्टूबर-नवंबर तक पहले चरण के बीटीए के पूरा होने की संभावना थी। बीटीए को लेकर अब तक पांच राउंड की बैठक हो चुकी है।
सूत्रों का कहना है कि औपचारिक वार्ता शुरू करने को लेकर फैसला अमेरिका को लेना है। वैसे दोनों देशों के प्रतिनिधि परोक्ष तरीके से व्यापार समझौते को लेकर लगातार संपर्क में हैं। व्यापार समझौते को लेकर भारत अमेरिका के समक्ष अपनी पेशकश रख चुका है। भारत कृषि व डेयरी आइटम के व्यापार की इजाजत अमेरिका को नहीं दे सकता है। क्योंकि यह भारत के लिए काफी संवेदनशील है।
दूसरी तरफ भारत इन दिनों यूरोपीय यूनियन (ईयू) के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने में व्यस्त है।
अमेरिका की तरफ से 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने से पहले अमेरिका होने वाले निर्यात पर औसतन 8-10 प्रतिशत का शुल्क लगता था। 50 प्रतिशत के शुल्क के बाद औसतन शुल्क 58- 60 प्रतिशत हो गया है। ईरान से व्यापार करने पर अमेरिका की तरफ से 25 प्रतिशत शुल्क लगाने की धमकी दी गई है और इस शुल्क के लगने पर भारतीय वस्तुओं पर 83-85 प्रतिशत का शुल्क हो जाएगा।
हालांकि फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस का कहना है कि ईरान को भारत सिर्फ 1.25 अरब डॉलर का निर्यात करता है, इसलिए ईरान के साथ होने वाली निर्यात की भरपाई भारत आराम से कर लेगा। ईरान के साथ व्यापार को रोकने में भारत को कोई नुकसान नहीं है। दोनों देशों के बीच मात्र 1.65 अरब डॉलर का कारोबार होता है।