डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिकी इंडो-पैसिफिक कमांड के कमांडर एडमिरल सैमुअल जे. पपारो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी दिनों-दिन मजबूत होती जा रही है। दोनों देशों का साझा उद्देश्य ”शक्ति के माध्यम से शांति” बनाए रखना है। उन्होंने हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की और चीन का नाम लिए बिना क्षेत्र में बढ़ते ”दबाव” और ”आक्रामकता” को रेखांकित किया।
साथ ही, उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान संयम दिखाने के लिए भारतीय सेना की प्रशंसा भी की। रविवार को नई दिल्ली में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एडमिरल पपारो ने कहा कि वैश्विक जीडीपी में 60 प्रतिशत से अधिक का योगदान देने वाले इस क्षेत्र में सात सबसे बड़ी सेनाएं हैं, जो इसे सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील बनाती हैं। ऐसे में सबसे पुरानी और सबसे बड़ी लोकतांत्रिक शक्तियों का साथ आना अंतरराष्ट्रीय नियमों की रक्षा के लिए आवश्यक है।
अमेरिकी कमांडर ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारतीय सेना द्वारा दिखाए गए संयम की मुक्तकंठ से सराहना की। उन्होंने कहा कि शांतिप्रिय राष्ट्र इस तरह के ऑपरेशनों को लेकर चिंतित रहते हैं, लेकिन भारत ने जिस तरह की परिपक्वता दिखाई, वह सराहनीय है। पपारो ने इस आपरेशन से मिलने वाले सबक पर बात करते हुए कहा, ”हर ऑपरेशन से कुछ नया सीखने को मिलता है और भारतीय सेना में सीखने की यह गहरी प्रतिबद्धता स्पष्ट दिखाई देती है।”
पाकिस्तान द्वारा चीनी सैन्य उपकरणों और मिसाइलों के उपयोग से जुड़े सवाल पर एडमिरल ने सीधी टिप्पणी से बचते हुए ‘निरंतर सतर्कता’ की आवश्यकता पर बल दिया। भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने दोहराया कि दोनों (भारत-अमेरिका) राष्ट्र संप्रभुता और नौवहन की स्वतंत्रता के सिद्धांतों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
दोनों देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने का समय : गोर
भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने एडमिरल पपारो का स्वागत करते हुए कहा कि ‘अब दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण सहयोग को मजबूत करने का समय है।’ यह दौरा भारत-अमेरिका रक्षा साझेदारी के विस्तार का हिस्सा है।