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ईरान और अमेरिका के बीच दो सप्ताह के युद्ध विराम की ट्रंप की घोषणा को अभी 24 घंटे से कुछ अधिक समय ही बीता है, लेकिन शांति समझौते में दरारें दिखनी शुरू हो गई हैं.
इसका कारण लेबनान का मुद्दा है जिसे अमेरिका ने ‘ग़लतफ़हमी’ बताया है.
जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने एक्स पर जानकारी दी, तो उसमें कहा गया था कि लेबनान सहित हर जगह तत्काल युद्ध विराम पर सहमति हो गई है.
उन्होंने लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए ख़ुशी हो रही है कि ईरान, अमेरिका और उनके सहयोगी देश, लेबनान सहित सभी जगहों पर युद्ध विराम के लिए सहमत हो गए हैं. यह युद्ध विराम तत्काल प्रभाव से लागू होगा.”
उनकी की यह पोस्ट आठ अप्रैल को पाकिस्तान समयानुसार सुबह 4.50 बजे साझा की गई थी.
इसके लगभग एक घंटे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक संदेश में लिखा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर के साथ हुई बातचीत के आधार पर मैं दो सप्ताह के लिए ईरान पर बमबारी और हमले स्थगित कर रहा हूं.”
इसके बाद ईरानी विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी किया, जिसे अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने एक्स पर साझा किया. बयान में कहा गया कि “अगर ईरान पर हमले बंद कर दिए गए, तो हमारी शक्तिशाली सेनाएं भी अपने रक्षात्मक अभियान रोक देंगी.”
लेकिन इन घोषणाओं के कुछ ही घंटों बाद, इसराइली प्रधानमंत्री के आधिकारिक एक्स हैंडल से जारी एक बयान में कहा गया, “लेबनान को दो सप्ताह के युद्ध विराम में शामिल नहीं किया गया है.”
हालांकि अमेरिका की ओर से वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए घोषणा की गई कि स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ, ‘इस्लामाबाद वार्ता’ में अमेरिका का प्रतिनिधित्व करेंगे.
ग़ौरतलब है कि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता इस्लामाबाद में हो रही है और पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ़ ने इसे ‘इस्लामाबाद वार्ता’ नाम दिया है.
‘हमारी उंगली अब भी बंदूक के ट्रिगर पर है’
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ईरान ने भी पुष्टि की कि वह ‘इस्लामाबाद वार्ता’ में भाग लेगा. बुधवार को शहबाज़ शरीफ़ ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फ़ोन पर बात की. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच बातचीत 45 मिनट से अधिक चली.
हालात सुधरते दिख रहे थे, लेकिन बुधवार को इसराइल ने लेबनान पर भारी बमबारी की. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इन हमलों में 182 लोग मारे गए और 800 से अधिक घायल हुए हैं.
लेबनानी सिविल डिफ़ेंस एजेंसी के हवाले से आए एक बयान में कहा गया है कि 254 लोग मारे गए और 1,165 घायल हुए. एजेंसी ने बीबीसी से इन आंकड़ों की पुष्टि की है.
इसराइली हमलों ने ईरान और अमेरिका के बीच समझौते के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराग़ची ने एक्स पर लिखा, “ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम की शर्तें स्पष्ट और असंदिग्ध हैं. अमेरिका को युद्ध विराम या इसराइल के माध्यम से जंग में से किसी एक को चुनना होगा. दोनों रास्ते एक साथ नहीं अपनाए जा सकते.”
ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, “पूरी दुनिया लेबनान में हो रही मौतों को देख रही है. अब फ़ैसला अमेरिका के हाथों में है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय यह देख रहा है कि वह अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करता है या नहीं.”
इस बीच इसराइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने भी एक बयान जारी कर कहा, “ज़रूरत पड़ने पर इसराइल ईरान के ख़िलाफ़ संघर्ष फिर से शुरू करने के लिए तैयार है.”
नेतन्याहू के शब्द थे, “हमारी उंगली अभी भी बंदूक के ट्रिगर पर है.”
नेतन्याहू नहीं चाहते युद्ध विराम?
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फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसराइली हमलों की निंदा की है और लेबनान के साथ एकजुटता व्यक्त करते हुए कहा, “ये हमले हाल ही में हुए युद्ध विराम के लिए सीधा ख़तरा हैं.”
ब्रिटिश पत्रिका ‘द इकोनॉमिस्ट’ में एक लेख में लिखा गया है, “नेतन्याहू शायद मध्य पूर्व में एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जो युद्ध विराम का स्वागत नहीं करते हैं.”
अमेरिकी कांग्रेस सदस्य डॉन बेयर ने एक्स पर पोस्ट किया, “अमेरिका को तुरंत इसराइल को यह स्पष्ट कर देना चाहिए कि लेबनान में युद्ध विराम के बिना यह समझौता न तो व्यवहार्य है और न ही प्रभावी.”
उन्होंने कहा कि ‘अमेरिकी लोग जंग का अंत चाहते हैं और मध्य बेरूत पर बमबारी करना शांति का मार्ग नहीं है.’
एक अन्य अमेरिकी कांग्रेस सदस्य सारा जैकब्स ने एक्स पर लिखा, “इसराइल ने लेबनान में महज 10 मिनट में कम से कम 254 लोगों को मार डाला और 1,000 से अधिक लोगों को घायल कर दिया, जिससे यह जंग का अब तक का सबसे घातक दिन बन गया है.”
सारा जैकब्स ने ट्रंप से नेतन्याहू से लेबनान को युद्ध विराम में शामिल करने के लिए कहने की अपील की, “दोनों नेताओं को इस जंग को स्थायी रूप से समाप्त करना होगा.”
ट्रंप युद्ध विराम की घोषणा वाले अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में कहा था कि उन्हें ईरान से 10 सूत्री प्रस्ताव प्राप्त हुआ है और उनका मानना है कि यह बातचीत के लिए एक व्यावहारिक आधार प्रदान करता है.
ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बग़र ग़ालिबाफ़ ने दावा किया कि इस 10-सूत्रीय रूपरेखा में लेबनान में युद्ध विराम का प्रावधान भी शामिल था और “इस वादे का जिक्र प्रधानमंत्री शाहबाज़ शरीफ़ ने भी किया था.”
ग़ालिबाफ़ ने यह भी दावा किया कि एक ड्रोन ईरानी हवाई क्षेत्र में घुस गया जो युद्ध विराम समझौते का उल्लंघन है और ईरान को यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से भी वंचित किया जा रहा है, “जो फ़्रेमवर्क के छठे बिंदु में शामिल था.”
उन्होंने ने कहा कि वार्ता की औपचारिक शुरुआत से पहले ही उस ‘व्यावहारिक बुनियाद’ का उल्लंघन हो गया है जिस पर वार्ता आयोजित की जानी थी.
गुरुवार सुबह, पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेज़ा अमीरी मोक़दम ने एक्स पर पोस्ट किया, “प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के न्योते पर एक ईरानी प्रतिनिधिमंडल आज रात इस्लामाबाद पहुंच रहा है.” हालांकि, बाद में इस पोस्ट को हटा दिया गया.
इस पोस्ट में कहा गया था कि इस्लामाबाद आने वाला प्रतिनिधिमंडल “ईरान की ओर से पेश 10 सूत्रीय एजेंडा के आधार पर वार्ता में हिस्सा लेगा.”
शहबाज़ शरीफ़ के पहले के बयान में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि जंग को हर जगह रोका जाएगा, ‘जिसमें लेबनान भी शामिल है’ और अमेरिका ने इसका खंडन नहीं किया, लेकिन फिर वॉशिंगटन से आने वाले बयान इसराइली रुख़ का समर्थन करने लगे.
‘हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया था’
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने युद्ध विराम में लेबनान को शामिल किए जाने को ‘ईरान की ग़लतफ़हमी’ बताया. मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह मुद्दा एक ग़लतफ़हमी से उपजा है. ईरानियों का मानना था कि लेबनान को युद्ध विराम में शामिल कर लिया गया है, जबकि ऐसा नहीं था.”
मीडिया से बात करते हुए जेडी वेंस ने कहा, “हमने ऐसा कोई वादा नहीं किया था. हमने इस बात का ज़रा भी संकेत नहीं दिया था कि ऐसा होगा. हमने सिर्फ़ इतना कहा था कि युद्ध विराम का केंद्र ईरान होगा और अमेरिका के सहयोगी, इज़राइल और खाड़ी अरब देश इसका हिस्सा होंगे.”
जेडी वेंस ने यह भी दावा किया कि इसराइल ने वास्तव में लेबनान में ‘कुछ हद तक संयम दिखाया है. क्योंकि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारी बातचीत सफल हो.’
उन्होंने कहा कि ईरान का लेबनान से कोई संबंध नहीं है और अमेरिका ने कभी नहीं कहा कि लेबनान युद्ध विराम का हिस्सा है फिर भी अगर ईरान लेबनान के लिए बातचीत को बाधित करना चाहता है तो यह उसका अपना फ़ैसला होगा.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा, “हमें लगता है कि यह एक मूर्खतापूर्ण निर्णय होगा, लेकिन यह उनकी पसंद है.”
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलाइन लेविट ने भी एक पत्रकार के सवाल के जवाब में यही बात कही, “लेबनान युद्ध विराम में शामिल नहीं है.”
‘वो झूठ बोलते हैं’
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जबकि पाकिस्तान अब भी इस बात पर क़ायम है कि लेबनान को युद्ध विराम में शामिल किया गया था.
अमेरिका में पाकिस्तान के राजदूत रिज़वान सईद शेख़ ने सीएनएन को बताया कि प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ द्वारा दिया गया बयान ‘सही और प्रामाणिक’ था.
कार्नेगी मिडिल ईस्ट सेंटर के वरिष्ठ संपादक माइकल यंग ने एक्स पर लिखा, “पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ के बयान से पहले अमेरिका ने यह बयान देखा था और यह संभव है कि इसे ख़ुद अमेरिका ने तैयार किया हो, हालांकि हम निश्चित रूप से ऐसा नहीं कह सकते.”
इससे पहले की एक पोस्ट में माइकल यंग ने लिखा, “प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने स्पष्ट रूप से युद्ध विराम में लेबनान को शामिल करने का ज़िक्र किया था, जिससे पता चलता है कि लेबनान समझौते का हिस्सा था. उन्होंने कहा कि इसराइल ने लेबनान में जंग जारी रखकर ईरान को फंसाने का मौका देखा और राष्ट्रपति ट्रंप ने बाद में झूठा दावा किया कि लेबनान युद्ध विराम में शामिल नहीं था.”
अमेरिकी पत्रकार और लेखक सेठ अब्रैमसन ने जेडी वांस के बयान पर कहा, “नहीं, वे झूठ बोल रहे हैं. युद्ध विराम समझौता पाकिस्तान द्वारा तैयार किया गया था और पाकिस्तान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि लेबनान इसमें शामिल था.”
अब्रैमसन ने कहा कि ‘ट्रंप ने एक बार फिर इसराइल के युद्ध अपराधों और ग़ैरक़ानूनी गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की है.’
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित