विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की मौजूदा व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी की है। बदलाव की जरूरत का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े मुद्दों पर यह वैश्विक संस्था अब प्रभावी फैसले लेने में काफी हद तक नाकाम हो रही है। साढ़े चार साल से अधिक समय से चल रहे यूक्रेन-रूस संघर्ष और खाड़ी देशों के टकराव का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा, संयुक्त राष्ट्र इस समय गतिरोध में फंसा हुआ है। अफ्रीका के मुद्दों और कोविड महामारी जैसे बड़े मामलों के समय निर्णय लेने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका काफी हद तक अप्रासंगिक रही है। जयशंकर ने दो-टूक कहा, समाधान संयुक्त राष्ट्र जैसी व्यवस्था को दरकिनार करना नहीं, बल्कि UN में सुधार है।
क्या बड़े वैश्विक मुद्दों पर UN अब प्रभावी नहीं रहा?
जयशंकर ने दिल्ली में आयोजित एक कॉन्क्लेव के दौरान कहा, यूएन सुरक्षा परिषद में गतिरोध के कारण अब निर्णय लेने की प्रक्रिया काफी हद तक प्रभावी नहीं रही। सुरक्षा परिषद अब वैश्विक हितों की पूरी तस्वीर का प्रतिनिधित्व नहीं करती। उन्होंने कहा कि दुनिया स्मार्ट, आपस में जुड़ी हुई और बहुध्रुवीय हो चुकी है, लेकिन UN की मौजूदा व्यवस्था अब भी पुराने ढांचे में अटकी हुई है। इस कार्यक्रम में सिंगापुर के पूर्व विदेश मंत्री जॉर्ज योंग बून येओ भी मौजूद रहे।
UN के सदस्य चार गुना बढ़े, सुधार में रुकावट कहां, व्यवस्था क्यों नहीं बदली?
विदेश मंत्री ने कहा, यूएन की शुरुआत 51 सदस्यों के साथ हुई थी और आज इसके सदस्यों की संख्या करीब चार गुना हो चुकी है। अगर संस्था का विस्तार चार गुना हो गया है तो उसके पुराने प्रबंधन ढांचे को बनाए रखना कैसे काम कर सकता है? जयशंकर ने किसी देश का नाम लिए बिना कहा कि कुछ देश यूएन में सुधार का विरोध कर रहे हैं। विरोध करने वाले अफ्रीका और उसके हितों का तर्क इस्तेमाल करते हैं। अफ्रीका अब खुद अंतर-सरकारी वार्ताओं में अपनी स्थिति स्पष्ट कर चुका है और बता चुका है कि वह क्या बदलाव चाहता है।
यूएन को दरकिनार करने के बजाय उसे ठीक करना चाहिए
जयशंकर ने कहा, दुनिया को यह तय करना होगा कि अप्रभावी संयुक्त राष्ट्र को केवल दरकिनार किया जाएगा या उसे प्रभावी बनाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा, दुनिया को यूएन की जरूरत है। इस संस्था ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की बड़ी सेवा की है। इसलिए हम सबका लक्ष्य यूएन में सुधार होना चाहिए, ना कि उसके बाहर काम करना।
क्या व्यापार व्यवस्था भी संकट में है?
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि मौजूदा समय में सिर्फ वित्तीय प्रणाली ही नहीं, बल्कि व्यापार व्यवस्था को लेकर भी दुनिया में यह भावना है कि मौजूदा सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है। उन्होंने कहा,मौजूदा व्यवस्था बाजार के सिद्धांतों पर आधारित थी, लेकिन आज दुनिया में बाजार से इतर कई ऐसी प्रथाएं मौजूद हैं, जिन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया है।इनसे अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है। बाजार के नियमों और वास्तविक रूप से मौजूद गैर-बाजार प्रथाओं के बीच संघर्ष अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की मुख्य समस्या है।