एएनआई, नई दिल्ली। सरकार ने मंगलवार को संसद को बताया कि इस साल एक जनवरी से 15 मार्च तक देशभर में हिरासत में 170 मौतों के मामले दर्ज किए गए हैं।
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के आंकड़ों के आधार पर संसद में यह जानकारी दी। बिहार में इस वर्ष अब तक हिरासत में मौतों के सबसे अधिक 19 दर्ज किए गए हैं। राजस्थान में 18 और उत्तर प्रदेश में 15 मामले दर्ज किए गए हैं।
पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में 14-14 मामले दर्ज किए गए हैं। ओडिशा में नौ और बंगाल में सात मामले दर्ज किए गए। दिल्ली में हिरासत में मौतों के चार मामले दर्ज किए गए।
तमिलनाडु में सात, तेलंगाना में पांच और कर्नाटक में तीन मामले दर्ज किए गए हैं। केरल में भी इसी अवधि में हिरासत में मौतों के तीन मामले सामने आए। असम में पांच मामले दर्ज किए गए, जबकि अरुणाचल प्रदेश में तीन मामले सामने आए।
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी में एक-एक मामला दर्ज किया गया है। मिजोरम, सिक्किम और लद्दाख, जम्मू और कश्मीर में 2026 में हिरासत में मौत का अब तक कोई मामला सामने नहीं आया है।
किस वर्ष कितनी मौतेंवर्ष – हिरासत में मौतें
2024-25 – 1402023
-24 – 1572022
-23 – 163 2021
-22 -176
केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग मंत्रालय का कोई प्रस्ताव नहीं
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग से मंत्रालय, संसदीय निरीक्षण समिति या विशेष नीतिगत ढांचा बनाने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है।
नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में केंद्र शासित प्रदेशों के प्रबंधन केंद्र शासित प्रदेश मामलों के मंत्रालय या विभाग की आवश्यकता नहीं है। अन्य प्रश्न के उत्तर में नित्यानंद राय ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ घृणास्पद भाषण, नस्लीय अपमान, उत्पीड़न और भेदभाव की घटनाओं से संबंधित डाटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम जांच तथा अपराधियों पर मुकदमा चलाने की जिम्मेदारी राज्यों की है। राय ने गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा और भेदभाव से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया।
अन्य प्रश्न के उत्तर में नित्यानंद राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर समेत सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वित्त वर्ष 2004-05 से सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत 39,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो अपने ‘समाप्ति चरण’ में है।
इन परियोजनाओं में सड़कों, पुलों का निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों में कमरे, आंगनवाड़ी केंद्र, छात्रावास, स्कूलों में छात्रावास और आजीविका परियोजनाएं शामिल हैं। सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली बस्ती से 0-10 किलोमीटर (सीधी हवाई दूरी) के भीतर स्थित गांवों/कस्बों में क्रियान्वित किया जाता है।
अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए दायर किए गए 10 अनुरोध तीन महीने से अधिक समय से केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास लंबित हैं। यह भी कहा कि 2014 से मंत्रालय ने अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए 330 स्वीकृतियां दी हैं।
केंद्र शासित प्रदेश के लिए अलग मंत्रालय का कोई प्रस्ताव नहीं
गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में कहा कि केंद्र सरकार केंद्र शासित प्रदेशों के लिए अलग से मंत्रालय, संसदीय निरीक्षण समिति या विशेष नीतिगत ढांचा बनाने के किसी भी प्रस्ताव पर विचार नहीं कर रही है। नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में कहा कि केंद्र शासित प्रदेश मामलों के मंत्रालय या विभाग की आवश्यकता नहीं है।
अन्य प्रश्न के उत्तर में नित्यानंद राय ने कहा कि पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों के खिलाफ घृणास्पद भाषण, नस्लीय अपमान, उत्पीड़न और भेदभाव की घटनाओं से संबंधित डाटा केंद्रीय स्तर पर नहीं रखे जाते हैं।
उन्होंने कहा कि अपराधों की रोकथाम जांच तथा अपराधियों पर मुकदमा चलाने की जिम्मेदारी राज्यों की है। राय ने गृह मंत्रालय द्वारा सुरक्षा और भेदभाव से संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया।
अन्य प्रश्न के उत्तर में नित्यानंद राय ने कहा कि उत्तर प्रदेश, राजस्थान और जम्मू और कश्मीर समेत सीमावर्ती राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वित्त वर्ष 2004-05 से सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम के तहत 39,248 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जो अपने ‘समाप्ति चरण’ में है।
इन परियोजनाओं में सड़कों, पुलों का निर्माण, स्वास्थ्य केंद्रों में कमरे, आंगनवाड़ी केंद्र, छात्रावास, स्कूलों में छात्रावास और आजीविका परियोजनाएं शामिल हैं। सीमा क्षेत्र विकास कार्यक्रम (बीएडीपी) 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर पहली बस्ती से 0-10 किलोमीटर (सीधी हवाई दूरी) के भीतर स्थित गांवों/कस्बों में क्रियान्वित किया जाता है।
अन्य प्रश्न के लिखित उत्तर में नित्यानंद राय ने कहा कि केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए दायर किए गए 10 अनुरोध तीन महीने से अधिक समय से केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास लंबित हैं। यह भी कहा कि 2014 से मंत्रालय ने अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए 330 स्वीकृतियां दी हैं।