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सबरीमाला पर फिर छिड़ी सियासी जंग, चुनाव से पहले आमने-सामने आए पक्ष और विपक्ष

Byadmin

Mar 15, 2026


पीटीआई, कोट्टायम। केरल विधानसभा चुनाव से पहले सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर सत्ता पक्ष व विपक्ष आमने-सामने हैं।

राज्य के देवस्वम मंत्री वीएन वासवन ने शनिवार को 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराया, जिसने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी। तब भाजपा से जुड़े वकीलों की याचिका पर ही फैसला आया था।

उन्होंने कहा कि एलडीएफ सरकार का वर्तमान रुख 2007 में सुप्रीम कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए गए हलफनामे के समान ही है। उधर, भाजपा ने राज्य सरकार से पूछा कि आखिर उसने अब अपना रुख क्यों बदल लिया। साथ ही उसने माफी की मांग की है।

उन्होंने पत्रकारों से कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ के समक्ष हलफनामा दाखिल कर पहाड़ी मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर अपने रुख को स्पष्ट करेगी।

हमने 2007 में एक हलफनामा दाखिल किया था जिसमें कहा गया था कि इस मुद्दे का निर्णय अनुष्ठान संबंधी मामलों के विशेषज्ञों द्वारा किया जाना चाहिए। हम अभी भी उसी रुख को बनाए रखे हुए हैं। सरकार भक्तों के साथ है। हम हमेशा भक्तों के साथ रहे हैं।

मंत्री ने विपक्ष की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि वे विभिन्न मुद्दों पर बार-बार अदालतों का रुख करते हैं और प्रतिकूल प्रतिक्रियाएं लेकर लौटते हैं।

इस बीच, माकपा के महासचिव एमए बेबी ने शनिवार को कहा कि 2018 की एलडीएफ सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू किया, जिसने महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी थी।

यह अदालत का निर्देश था और सरकार का अपना निर्णय नहीं था। तब कोई राजनीतिक पार्टी नहीं थी जिसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत नहीं किया। लेकिन बाद में कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अपना रुख बदल लिया।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अब सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर अपने पहले के फैसले की समीक्षा कर रहा है।

दूसरी ओर, भाजपा के राज्य महासचिव एमटी रमेश ने कहा कि केरल सरकार ने सबरीमाला में महिलाओं के प्रवेश के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए नए हलफनामे के माध्यम से अपनी गलती स्वीकार की है। भाजपा मांग करती है कि राज्य सरकार अयप्पा भक्तों से माफी मांगे।

उन्होंने कहा कि 2018 में मुख्यमंत्री ने सुधारों का जोरदार समर्थन किया था और पूछा कि सरकार ने अब अपना रुख क्यों बदला है?

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