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इमेज कैप्शन, सरकार ने लोगों से घबराहट में एलपीजी बुकिंग न करने की अपील की है
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पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों पर भारत सरकार के तीन मंत्रालयों ने एक संयुक्त प्रेस कॉंफ्रेंस कर स्थिति की जानकारी दी.
इस प्रेस कॉंफ्रेंस को पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने संबोधित किया.
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से बताया गया कि देश में पेट्रोल-डीज़ल की कोई कमी नहीं है. इसके साथ ही यह स्वीकार किया गया कि एलपीजी को लेकर दबाव है लेकिन साथ ही अपील की गई कि घबराहट में बुकिंग न करें.
मंत्रालय ने यह भी बताया कि एलपीजी पर दबाव कम करने के लिए वैकल्पिक इंतज़ाम भी किए जा रहे हैं. इनमें कैरोसीन की सप्लाई बढ़ाना और कोयले का इंतज़ाम करना भी शामिल है.
देश भर में एलपीजी के लिए लंबी कतारों में खड़े लोगों की तस्वीरें सामने आ रही हैं. गुरुवार को संसद में विपक्षी पार्टियों ने ऊर्जा के मुद्दे पर बहस की मांग की थी, इस दौरान संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन भी किया था.
एलपीजी की दिक्कत है, पीएनजी कनेक्शन लें
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इमेज कैप्शन, केंद्र सरकार का कहना है कि व्यवसायिक गैस सिलेंडर का वितरण राज्य सरकारों को सौंपा गया है
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव (मार्केटिंग और तेल रिफ़ाइनरी) सुजाता शर्मा ने संयुक्त प्रेस कॉंफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा, “जहां तक क्रूड का सवाल है हमारे पास 258 मिलियन मीट्रिक टन की रिफ़ाइनिंग कैपेसिटी है. रिफ़ाइन किए गए पेट्रोल और डीज़ल के उत्पादन में हम आत्मनिर्भर हैं. इसलिए हमें इनका आयात करने की ज़रूरत नहीं है.”
“हमारी सभी रिफ़ाइनरियां 100% या उससे ज़्यादा क्षमता पर चल रही हैं. रिफ़ाइनरियों में कच्चे तेल का पर्याप्त भंडार मौजूद है और सप्लाई भी नियमित रूप से जारी है. नेचुरल गैस कंट्रोल ऑर्डर के तहत घरेलू पीएनजी और वाहनों के लिए सीएनजी की आपूर्ति बिना किसी कटौती के सुनिश्चित की जा रही है. घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है.”
एलपीजी किल्लत को लेकर उन्होंने कहा, “एलपीजी के संबंध में मैं यह कहना चाहूंगी कि यह हमारे लिए चिंता का एक विषय है. ख़ासकर जब हमारा जितना भी तेल आयात हो रहा है, उसका एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ से आता है. वहां पर बंदी की वजह से ये थोड़ी चिंता का विषय है.”
बता दें कि देश भर में एलपीजी की किल्लत की वजह से गैस एजेंसियों पर लाइन लगने की तस्वीरें सामने आ रही हैं. लोगों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है. गुरुवार को यह विरोध संसद में भी नज़र आया और विपक्षी दलों ने सदन में इस विषय पर बहस की मांग करने के बाद संसद परिसर में प्रदर्शन भी किया.
लेकिन पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि एलपीजी की कोई किल्लत नहीं है. सुजाता शर्मा ने कहा कि देश के लगभग 25 हज़ार वितरकों में से कहीं भी स्टॉक खत्म होने की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है. उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे अफ़वाहों पर विश्वास न करें और घबराकर खरीदारी न करें.
शर्मा ने बताया, “हमारी औसत बुकिंग लगभग 50–55 लाख सिलेंडर प्रतिदिन होती है. लेकिन पिछले कुछ दिनों में बुकिंग बढ़कर 75–76 लाख तक पहुंच गई है. यह एक तरह का पैनिक पैटर्न है, यह पैनिक बुकिंग है. आप सभी देशवासियों से निवेदन है कि पैनिक बुकिंग से बचें.”
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इमेज कैप्शन, एलपीजी की कमी का रेस्तरां और होटलों पर सीधा असर पड़ा है और कई वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल कर रहे हैं. तस्वीर में कोच्चि के एक रेस्तरां कर्मचारी जलाने के लिए लकड़ी ले जाते हुए
सुजाता शर्मा ने कहा कि पीएनजी को लेकर कोई दिक्कत नहीं है, “आज की तारीख में हमारे पास डेढ़ करोड़ पीएनजी घरेलू उपभोक्ता हैं और उन सभी को यह सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है. इनके अलावा लगभग 60 लाख ऐसे घर हैं जिनके बहुत करीब में पीएनजी कनेक्टिविटी है और वे बहुत आसानी से पीएनजी कनेक्शन ले सकते हैं.”
उन्होंने कहा, “आप सभी के माध्यम से मेरी उन सभी उपभोक्ताओं से अपील होगी कि वह पीएनजी कनेक्शन लें. यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है ताकि हमारे ऊपर जो एलपीजी के ऊपर प्रेशर है उसको हम थोड़ा सा कम कर पाएं.”
सुजाता शर्मा ने कहा कि एलपीजी का उत्पादन बढ़ा दिया गया है, “आज घरेलू एलपीजी उत्पादन में 30% की बढ़ोतरी की गई है, हमारी रिफाइनरियों में 5 मार्च की तुलना में अब 30% अधिक एलपीजी का उत्पादन हो रहा है.”
व्यवसायिक उपभोक्ताओं के लिए उन्होंने कहा, “कमर्शियल सिलेंडरों के लिए भी व्यवस्था की गई है और इनका वितरण के लिए राज्य सरकारों के हवाले किया गया है. हम सभी ऐसे व्यावसायिक उपभोक्ताओं से अपील करते हैं कि वे अपने स्थानीय सीजीडी (सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन) नेटवर्क या अधिकृत डीलर से संपर्क करें और पीएनजी कनेक्शन प्राप्त करें.”
उन्होंने बताया, “इसके अलावा 48,000 किलो लीटर अतिरिक्त केरोसीन का आवंटन किया गया है, जो नियमित आवंटन से अलग है. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा गया है कि वे ज़िलों में एक या दो स्थान चिह्नित करें जहाँ इसका वितरण किया जा सके.”
“वैकल्पिक ईंधन विकल्पों को सक्रिय करने के लिए कोल इंडिया ऑर्डर जारी कर चुका है, ताकि कोयला छोटे, मध्यम और अन्य उपभोक्ताओं, खासकर होटल और रेस्टोरेंट सेक्टर, को उपलब्ध कराया जा सके. कोयला मंत्रालय ने इस संबंध में सभी ज़रूरी आदेश जारी कर दिए हैं.”
इसके साथ ही ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. राज्यों को सलाह दी गई है कि वे ब्लैक मार्केटिंग और होर्डिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करें और सुनिश्चित करें कि ऐसी घटनाएं न हों.
खाड़ी में भारतीय झंडे वाले 24 शिप
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इमेज कैप्शन, लाइबेरिया के झंडे वाला क्रूड ऑयल शिप 12 मार्च को होर्मुज़ स्ट्रेट से मुंबई के बंदरगाह पहुंचा. ईरान पर अमेरिका-इसराइल के हमले शुरू होने के बाद वहां से भारत पहुंचने वाला यह पहला जहाज़ है
संयुक्त प्रेस कॉंफ़्रेंस में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि खाड़ी क्षेत्र में वर्तमान में भारतीय झंडे वाले 24 पोत मौजूद हैं, जो होर्मुज़ स्ट्रेट के पश्चिम में फ़ारस की खाड़ी में हैं. इनमें कुल 677 भारतीय नौसैनिक/समुद्री कर्मचारी सवार हैं,
होर्मुज़ स्ट्रेट के पूर्व में, यानी ओमान की खाड़ी में, कल चार पोत मौजूद थे, और उनमें से एक पोत, ‘जग प्रकाश’ ऑयल टैंकर, को वहां से हटा दिया गया है. खाड़ी क्षेत्र में कुल मिलाकर लगभग 23,000 भारतीय समुद्री कर्मचारी मौजूद हैं, जो विभिन्न व्यापारी जहाज़ों, बंदरगाह संचालन और ऑफ़शोर पोतों पर काम कर रहे हैं. डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ शिपिंग लगातार इन सभी से संपर्क में है.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने संयुक्त प्रेस कांफ़्रेंस में बताया कि भारत ने पश्चिम एशिया के देशों के साथ अपनी बातचीत और संपर्क बनाए रखा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कल ईरान के राष्ट्रपति डॉक्टर मसूद पेज़ेश्कियन से बात की थी.
प्रधानमंत्री ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और भलाई को लेकर भारत की प्राथमिकताओं पर जोर दिया और ऊर्जा व अन्य सामग्री के आवागमन (ट्रांज़िट) के महत्व का भी उल्लेख किया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि प्रधानमंत्री ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की और कहा कि भारत का मानना है कि वहां के मुद्दों और संघर्षों का समाधान संवाद और कूटनीति के ज़रिए होना चाहिए, ताकि स्थिति को जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.