इमेज कैप्शन, नवंबर 2025 में एक म्यूजिक कंसर्ट में अपना कार्यक्रम पेश करतीं नोरा फ़तेही (दाएं) – फ़ाइल फ़ोटो….में
कन्नड़ फ़िल्म केडी: द डेविल का गना ‘सरके चुनर तेरी सरके’ विवादों में घिर गया. इसके बाद भारत सरकार ने इसे सभी प्लेटफॉर्म से हटाकर बैन कर दिया.
नोरा फ़तेही और संजय दत्त पर फ़िल्माए गए इस गाने के ‘अश्लील’ बोलों को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कड़ा विरोध जताया.
पिछले एक हफ़्ते में मामला इतना बढ़ गया कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्र सरकार को लीगल नोटिस भेजा. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी फ़िल्म के कलाकारों और निर्माताओं को अपने सामने पेश होने का नोटिस जारी किया. समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक़ अलीगढ़ के संगठन मुस्लिम पर्सनल दारुल इफ़्ता ने नोरा फतेही के ख़िलाफ़ फतवा जारी कर दिया.
फ़िल्म से जुड़े अलग-अलग कलाकारों ने गाने के बोल को लेकर खेद जताया है.
गायिका मांगली ने सोशल मीडिया पर माफ़ी मांगी और गाने के एक नए वर्जन का वादा किया.
गीतकार रक़ीब आलम ने कहा कि पूरे गाने में एक भी मूल शब्द उनका नहीं है, उन्होंने सिर्फ अल्फ़ाज़ो का कन्नड़ से हिंदी में अनुवाद किया.
वहीं अभिनेत्री नोरा फ़तेही ने सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो में कहा कि उन्होंने यह गाना कन्नड़ में शूट किया था और उन्हें अल्फ़ाज़ो का मतलब मालूम नहीं था.
उन्होंने कहा, “मैंने जैसे ही हिंदी अनुवाद सुना, मेरे कान खड़े हो गए. मुझे पता था गाने के बोलों पर आपत्ति आएगी. मैंने यही बात फिल्म निर्देशक से भी कही थी और इस गाने को मैंने कहीं भी प्रमोट नहीं किया.”
गाने पर बैन
इमेज स्रोत, ANI
इमेज कैप्शन, 17 मार्च को मानवाधिकार आयोग ने इस गाने के लिए सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के चेयरमैन प्रसून जोशी को लीगल नोटिस जारी किया
गाने को लेकर विवाद इतना बढ़ गया कि मामला संसद तक पहुंच गया.
17 मार्च को मानवाधिकार आयोग ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (सीबीएफसी) के चेयरमैन प्रसून जोशी, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव और गूगल इंडिया को लीगल नोटिस जारी किया.
इसके बाद केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री ने संसद में इस गाने को सभी भाषाओं में हर प्लेटफ़ॉर्म से हटाने की घोषणा की.
इस बीच, सीबीएफ़सी यानी सेंसर बोर्ड ने कहा कि रिलीज से पहले गाना उनकी मंजूरी के लिए भेजा ही नहीं गया था और इंटरनेट पर मौजूद कंटेंट पर उनका सीधा काबू नहीं है.
सीबीएफ़सी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर लिखा, ”सीबीएफ़सी एक ज़िम्मेदार और सजग संस्था है. इसके सदस्य सिनेमा में महिलाओं के चित्रण को गंभीरता से लेते हैं और अपने प्रयासों से विवाद को बातचीत की दिशा में ले जाने की कोशिश करते हैं.”
सीबीएफ़सी की वेबसाइट के मुताबिक़, जब भी कोई फिल्म सर्टिफ़िकेशन के लिए आवेदन करती है, तो उसे अलग से गाने, उनके बोल और टाइम कोड भी क्लियरेंस के लिए जमा करने होते हैं.
ऐसा पहली बार नहीं हुआ है कि भारत में आइटम नंबर पर बैन लगा हो. हाल ही में गायक बादशाह के हरियाणवी गाने “तातीरी” को सभी प्लेटफ़ॉर्म से हटा दिया गया.
इससे पहले फिल्म ख़लनायक (1993) और राजा बाबू (1994) के गानों को ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन जैसे प्लेटफ़ॉर्म पर प्रसारित नहीं किया गया था.
बॉलीवुड और ‘आइटम नंबर’
इमेज स्रोत, Indranil Aditya/NurPhoto via Getty Images)
इमेज कैप्शन, मलाइका अरोड़ा बॉलीवुड में आइटम सॉन्ग के लिए मशहूर हैं
बॉलीवुड में ‘आइटम नंबर’ का सिलसिला काफ़ी पुराना है.
पत्रकार और फिल्म आलोचक सुपर्णा शर्मा का कहना है कि 40 के दशक में पुरुष कलाकार औरतों के भेष में डांस किया करते थे. इसके बाद 1940 और 50 के दशक में अभिनेत्री कुकू ने “पतली कमर है” (बरसात, 1949) और “बेचैन दिल खोई सी नज़र” (यहूदी, 1958) जैसे हिट गानों पर परफ़ॉर्म किया.
सुपर्णा शर्मा ने बीबीसी से बातचीत में कहा, “कुकू के दौर के बाद हेलेन ने बॉलीवुड पर डांसिंग क्वीन के तौर पर राज किया, लेकिन उन्हें कभी ‘आइटम गर्ल’ नहीं कहा गया.”
हेलेन के दौर में “ये मेरा दिल प्यार का दीवाना” (डॉन, 1967) और “पिया तू अब तो आजा” (कारवां, 1971) जैसे कई हिट गाने आए.
लेख के अनुसार, मलाइका अरोड़ा ख़ान के लिए ‘आइटम गर्ल’ शब्द का इस्तेमाल सबसे पहले “छैंया-छैंया” गाने के बाद हुआ.
आलोचक सुपर्णा शर्मा ने आगे बताया, “बॉलीवुड में आइटम गर्ल्स को अक्सर सिर्फ़ एक गाने में डांस के लिए रखा गया. फिल्म में उनका कोई बड़ा या अलग किरदार नहीं होता.”
चेन्नई के फिल्म आलोचक रमेश बाला ने कहा कि आजकल की अभिनेत्रियां ‘आइटम नंबर’ जैसे शब्द के इस्तेमाल के बजाय “स्पेशल सॉन्ग” शब्द को बढ़ावा देती हैं.
उन्होंने बताया कि साउथ के सिनेमा में भी पहले अभिनेत्रियां ऐसे गानों में हिस्सा नहीं लेती थीं और डांसर्स सिल्क स्मिता या डिस्को शांति इन किरदारों में नजर आती थीं.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, “ऐसा नहीं है कि पहले ये गाने नहीं बनते थे. लेकिन तब गीतकारों में कला होती थी और वे शब्दों के खेल में काफी मतलब छुपा लेते थे. आजकल के लिरिक्स और विजुअल बहुत सीधे और वल्गर हो गए हैं.”
क्या कहती है युवा पीढ़ी
इमेज स्रोत, Getty Images
इमेज कैप्शन, ज़्यादातर युवा सरके चुनर तेरी जैसे गानों के ख़िलाफ़ हैं लेकिन कुछ युवाओं का कहन है कि इन पर बैन गलत है
इस गाने पर उठे विवाद के बाद बीबीसी हिंदी ने फिल्म निर्माताओं, आलोचकों और युवा पीढ़ी से बात की, ताकि उनके विचार समझे जा सकें.
आलोचक इशिता सेनगुप्ता ने कहा कि ऐसे गाने फ़िल्मों की तरफ आकर्षण बढ़ाने के लिए भी लिखे जाते हैं.
उन्होंने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा, “पिछले एक हफ़्ते से फ़िल्म ‘केडी: द डेविल’ काफ़ी चर्चा में है. अगर गाने के अल्फ़ाज़ इतने विवादित नहीं होते, तो फ़िल्म के बारे में कोई इतनी बात नहीं करता.”
वहीं ‘अनारकली ऑफ आरा’ (2017) और ‘इन गलियों में’ (2025) के निर्देशक अविनाश दास ने कहा, “इस गीत के माध्यम से इस सिनेमा को चर्चा में लाने की पूरी कवायद है.”
अविनाश दास के मुताबिक़ ‘सरके चुनर तेरी’ के अल्फ़ाज़ कुछ ज़्यादा ही ख़राब हैं और उनमें कोई प्रतीक या सौंदर्य नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि समाज में प्रचलित पार्टी कल्चर में गाने के लफ़्ज़ शायद ज़्यादा मायने नहीं रखते.
वो कहते हैं, “पार्टी कल्चर में लोगों को लफ़्जों से उतना फ़र्क नहीं पड़ता जितना तेज़ तर्रार म्यूजिक से पड़ता है. सायरत फिल्म का गाना झींगट आजकल बिहार में भी बजता सुनाई दे जाएगा.”
बीबीसी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के कुछ छात्र-छात्राओं से भी बात की, ताकि बॉलीवुड के आइटम नंबर पर युवा पीढ़ी के विचार समझे जा सकें.
पॉलिटिकल साइंस की छात्रा कोमल ने कहा कि डांस नंबर की ताल भले ही ऊर्जा से भरी हो, लेकिन उनके लिरिक्स निंदनीय होते हैं.
उनकी दोस्त अनुष्का ने कहा, “जो नोरा फ़तेही का नया गाना आया है, उसके लिरिक्स कुछ ज़्यादा ही खराब हैं. उस पर बैन लगाना बिल्कुल सही है.”
अंग्रेज़ी साहित्य की छात्रा जयश्री के मुताबिक, ”डांस नंबर भले ही लोकप्रिय हों, लेकिन आज के समय में उनकी कोई जगह नहीं है.”
रूपाली अंग्रेज़ी साहित्य में पोस्ट ग्रेजुएशन कर रही हैं. वो कहती हैं, “जिस देश में जेंडर को संवेदनशील तरीके से समझने की ज़रूरत है, वहां ऐसे गाने क्यों बन रहे हैं. ऐसे गाने तो लिखे ही नहीं जाने चाहिए.”
हालांकि कुछ स्टूडेंट्स ने बैन के ख़िलाफ़ भी आवाज़ उठाई.
छात्र राहुल ने कहा, “मुझे तो डांस नंबर बहुत पसंद आते हैं. जिन्हें नहीं सुनना है, वो न सुनें.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़ रूम की ओर से प्रकाशित