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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और टैरिफ़ को लेकर कई दावे किए हैं.
दो दिन पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को चेतावनी देते हुए कहा था कि अगर वो रूस के साथ व्यापार जारी रखता है तो उस पर जल्दी टैरिफ़ बढ़ाया जा सकता है.
अब डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे मुलाक़ात करनी चाही थी और पूछा था कि “सर क्या मैं आपसे मिल सकता हूं. मैंने हां कहा क्योंकि मेरे उनके साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं.”
इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ़ की वजह से अब भारत रूस से कम तेल ख़रीद रहा है.
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इससे पहले रविवार को एयर फ़ोर्स वन विमान में सवार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी टैरिफ़ और रूस से भारत के तेल कम आयात करने के सवाल पर कहा था, “वे मुझे ख़ुश करना चाहते थे. मूल रूप से मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं ख़ुश नहीं था और मुझे ख़ुश करना ज़रूरी था.”
ट्रंप ने अब क्या नया दावा किया?
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कैनेडी सेंटर में हाउस रिपब्लिकन्स कार्यक्रम में ट्रंप ने अमेरिकी लड़ाकू विमानों और टैरिफ़ पर बात करते हुए पीएम मोदी और भारत की बात की.
उन्होंने कहा, “एफ़-35 को पाने में काफ़ी समय लगता है. अपाचे हेलिकॉप्टर को लेकर भारत मेरे पास आया और बोला कि सर हम इसका पांच सालों से इंतज़ार कर रहे हैं. हम अब इसे बदल रहे हैं.”
इसके बाद ट्रंप ने कहा, “भारत ने 68 अपाचे हेलिकॉप्टर का ऑर्डर दिया था. प्रधानमंत्री मोदी मुझसे मिलने आए और पूछा कि ‘सर क्या मैं आपसे मिल सकता हूं?’ मैंने कहां हां क्योंकि मेरे उनके साथ बहुत अच्छे रिश्ते हैं.”
“हालांकि, उनको जितना टैरिफ़ देना पड़ रहा है, उसकी वजह से वो मुझसे उतने ख़ुश नहीं हैं. लेकिन अब उन्होंने बहुत हद तक रूस से (तेल आयात) कम कर दिया है. हम टैरिफ़ की वजह से बेहद अमीर हो रहे हैं.”
विपक्ष ने कसा तंज़
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कांग्रेस ने एक बार फिर से डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की है.
कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल से ट्रंप के वीडियो को पोस्ट करते हुए लिखा है, “ट्रंप के राष्ट्रपति बनने के बाद मोदी बिन बुलाए ही अमेरिका गए थे. ट्रंप का कहना है- ‘मोदी ने मुझसे पूछा- सर, मैं आपसे मिलने आ सकता हूं प्लीज़. मैंने कहा- हां.’ आपको याद होगा दुनिया के नेताओं में सिर्फ़ मोदी हैं, जिन्हें ट्रंप गेट पर रिसीव करने नहीं आए. अब समझ आया क्यों.”
इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने एक्स हैंडल से पीएम मोदी के ऐसे कई कैरिकेचर पोस्ट किए हैं जिसमें वो पूछ रहे हैं- “सर क्या मैं आपसे मिलने आ सकता हूं प्लीज़.”
वहीं ट्रंप के बयान पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बॉल्टन ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत की है.
उन्होंने कहा, “यह दिखाता है कि इस बारे में ट्रंप के पास कोई स्ट्रेटेजिक समझ नहीं है कि अमेरिका के भले के लिए क्या सही है. हमें चीन जैसे ख़तरे के ख़िलाफ़ भारत, जापान, दक्षिण कोरिया, ताइवान और दूसरे देशों के साथ मिलकर काम करने की ज़रूरत है, लेकिन ट्रंप सिर्फ़ इन टैरिफ़ और तेल की बिक्री को लेकर जुनूनी हैं.”
“उन्होंने भारत पर टैरिफ़ लगाया है, लेकिन चीन पर नहीं, जो रूस से काफी ज़्यादा तेल ख़रीदता है, या तुर्की जैसे दूसरे देशों पर भी नहीं जो बहुत ज़्यादा रूसी तेल ख़रीदते हैं. इससे अमेरिका-भारत संबंधों में सच में दिक्कत हुई है.”
“काश कोई ऐसा तरीक़ा होता जिससे हम उन्हें और मोदी को फिर से सीधे बात करवा पाते और देख पाते कि क्या वे कोई समाधान निकाल सकते हैं.”
ट्रंप ने और क्या कहा था?
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बीते रविवार को एयरफ़ोर्स वन में सवार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने लगभग ऐसा ही बयान पीएम मोदी और भारत पर लगाए गए टैरिफ़ को लेकर दिया था.
उस समय उनके साथ विमान में सवार अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने कहा, “इन्होंने (ट्रंप) भारत पर रूस से तेल ख़रीदने पर 25 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया है. मैं लगभग एक महीने पहले भारतीय राजदूत (विनय क्वात्रा) के घर पर था और वो सिर्फ़ ये बात करना चाहते थे कि कैसे वे अब रूस से बहुत कम तेल ख़रीद रहे हैं और मैं राष्ट्रपति से टैरिफ़ में राहत देने के लिए कहूं.”
“अगर आप सस्ता रूसी तेल ख़रीदते रहेंगे और पुतिन की वॉर मशीन को चलने देंगे तो हम राष्ट्रपति को ये क्षमता मुहैया कराएंगे कि वो टैरिफ़ के ज़रिए कठिन विकल्प चुनें. मेरा बिलकुल यह मानना है कि इन्होंने (ट्रंप) भारत के साथ जो किया, इसी की वजह से भारत अब रूस से बहुत हद तक कम रूसी तेल ख़रीद रहा है.”
इसके बाद लिंडसे ग्राहम को टोकते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा, “वे मुझे ख़ुश करना चाहते थे. मूल रूप से मोदी बहुत अच्छे इंसान हैं. उन्हें पता था कि मैं ख़ुश नहीं था और मुझे ख़ुश करना ज़रूरी था.”
अमेरिकी राष्ट्रपति का कहना था कि ‘वे आपस में व्यापार करते हैं’ और भारत ने हमारी बात नहीं मानी तो ‘हम उन पर बहुत जल्दी टैरिफ़ बढ़ा’ सकते हैं.
भारत ने रूस से तेल ख़रीदना कम किया
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दिसंबर में होने वाली तेल डिलीवरी के आंकड़ों को देखें तो पता चलेगा कि भारतीय तेल कंपनियों ने रूसी कंपनियों से तेल ख़रीदना काफ़ी कम कर दिया है.
ब्लूमबर्ग के मुताबिक़ भारत की पांच बड़ी रिफाइनरी कंपनियों ने दिसंबर महीने के लिए तेल ख़रीद का कोई ऑर्डर नहीं दिया था.
बीते साल अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50 फ़ीसदी का टैरिफ़ लगा दिया था.
इसके तुरंत बाद रूस से भारत की तेल ख़रीद बहुत ज्यादा नहीं घटी थी.
लेकिन नवंबर में रूसी तेल कंपनियों रोजनेफ़्ट और लुकोइल पर अमेरिकी प्रतिबंध के बाद भारत की ज्यादातर तेल रिफ़ाइनरियों ने रूस से तेल ख़रीदना लगभग रोक दिया था.
तेल ख़रीद पर रियल टाइम डेटा देने वाली फर्म केपलर के मुताबिक़ भारत ने एक से 17 नवंबर के बीच रूस से हर दिन 6,72,000 बैरल तेल ख़रीदा.
ये अक्तूबर महीने में ख़रीदे गए 18 लाख बैरल प्रति दिन से काफ़ी कम है.
हालांकि दो रूसी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध के बाद बाक़ी जगहों पर होने वाला रूस का तेल निर्यात 28 फ़ीसदी तक कम हो गया था.
कहा जा रहा है कि भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर हो रही बातचीत ने इसमें अहम भूमिका निभाई है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.