पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बिहार के उस कानून को रद कर दिया है, जिसके तहत राज्य सरकार को पटना के ऐतिहासिक लाइब्रेरी का अधिग्रहण करने की अनुमति दी गई थी।
कोर्ट ने कहा कि अधिग्रहण के लिए सांकेतिक मुआवजे के तौर पर एक रुपये का प्रविधान ”दिखावटी” है और इसमें निष्पक्षता के बुनियादी गुण नहीं हैं।
पटना हाई कोर्ट के 2024 के उस आदेश को रद करते हुए, जिसमें पहले राज्य सरकार के अधिग्रहण को सही ठहराया गया था, जस्टिस विक्रम नाथ और संदीप मेहता की बेंच ने कहा, ”श्रीमती राधिका सिन्हा संस्थान और सच्चिदानंद सिन्हा लाइब्रेरी (अधिग्रहण एवं प्रबंधन) अधिनियम, 2015 को असंवैधानिक घोषित किया जाता है और तदनुसार इसे रद किया जाता है।”
पीठ ने निर्देश दिया कि लाइब्रेरी का प्रबंधन और प्रशासन मूल ट्रस्ट को वापस सौंप दिया जाए। पटना में स्थित यह इमारत आमतौर पर ‘सिन्हा लाइब्रेरी’ के नाम से जानी जाती है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार की ओर से ट्रस्ट या उसके न्यासियों को कुप्रबंधन, वित्तीय अनियमितता, लापरवाही या ट्रस्ट के उद्देश्यों को पूरा करने में विफलता के किसी भी आरोप के संबंध में कोई पत्र नहीं भेजा गया था। अधिनियम पारित करने से पहले राज्य ने प्रस्तावित अधिग्रहण के लिए कोई कारण भी नहीं बताया था।