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करीब साढ़े चार साल पहले दो ख़बरें मीडिया में छाई हुई थीं. एक थी कोरोना और दूसरी हिंदी फ़िल्मों के अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की मौत.
इस घटना के बाद ऐसा लगा जैसे सुई आकर रिया चक्रवर्ती पर ही रुक गई हो.
इस घटना के बाद रोज़ कथित नई-नई जानकारियों ने लोगों के दिलो दिमाग़ में कौतूहल तो जगाया ही, वहीं मीडिया भी इस ख़बर से चिपकी रही जैसे इस घटनाक्रम की परत दर परत जानकारी उसके पास है.
छोटी से छोटी जानकारी एक स्कूप की तरह पेश की गई. इस दौरान ऐसा लगा जैसे ये मामला कोरोना पर हावी हो रहा हो.
इन बीते वर्षों में अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ जाँच चली. 27 दिन जेल में गुज़ारने पड़े. समाज ने उन्हें और उनके परिवार को कठघरे में खड़ा किया. उनकी ट्रोलिंग हुई और मीडिया ट्रायल का सामना करना पड़ा.
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लेकिन शनिवार को इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अदालत में दो क्लोज़र रिपोर्ट दाखिल की.
इस रिपोर्ट में अभिनेता की मौत के मामले में किसी साज़िश से इनकार किया गया है. एक तरह से कहा जा सकता है कि रिया चक्रवर्ती को क्लीन चिट दे दी गई है.
हालांकि, अब पटना की विशेष अदालत और मुंबई की विशेष अदालत इस पर क्या निर्णय लेगी, ये देखने वाली बात होगी.
”उम्मीद है कि यह किसी भी मामले में दोहराया नहीं जाएगा”
क्लोज़र रिपोर्ट के बाद रिया चक्रवर्ती के वकील सतीश मानशिंदे ने बयान में सीबीआई का आभार व्यक्त किया और कहा कि सीबीआई ने मामले के हर पहलू की हर एंगल से गहन जाँच की और केस को बंद कर दिया.
उनका कहना था, “सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में झूठी ख़बरें फैलाई गईं. निर्दोष लोगों को मीडिया और जाँच अधिकारियों के सामने परेशान किया गया.
मानशिंदे ने कहा, “मुझे उम्मीद है कि यह किसी भी मामले में दोहराया नहीं जाएगा. रिया को अनगिनत दुखों से गुज़रना पड़ा और बिना किसी ग़लती के 27 दिनों तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा, जब तक कि मुंबई हाई कोर्ट के जस्टिस सारंग कोतवाल ने उन्हें ज़मानत पर रिहा नहीं कर दिया.”
इस मामले में पहली क्लोज़र रिपोर्ट रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ सुशांत को आत्महत्या के लिए उकसाने वाली उनके पिता की शिकायत से जुड़ी है. दूसरी क्लोजर रिपोर्ट, अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती की सुशांत की बहनों के ख़िलाफ़ शिकायत से संबंधित है.
रिया चक्रवर्ती की तरफ़ से फिलहाल कोई बयान सामने नहीं आया है.लेकिन टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक ख़बर के मुताबिक़, रिया चक्रवर्ती ने अपने परिवार के साथ मुंबई स्थित सिद्धिविनायक मंदिर में दर्शन किए हैं. वहीं उनके भाई शौविक ने वीडियो पोस्ट किया है और लिखा है- ‘सत्यमेव जयते’.
अभिनेत्री दीया मिर्ज़ा ने इंस्टाग्राम पर लिखा है, ”क्या मीडिया कोई है जो रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार से लिखित माफ़ी मांगेगा.”
दीया मिर्ज़ा लिखती हैं, ”आपने उनको विच हंट किया. आपने टीआरपी के लिए, उनको गहरा दुख पहुँचाया और शोषण किया. माफ़ी माँगिए. इतना तो कम से कम आप कर ही सकते हैं.”
”ख़ुद से लड़ रही हूँ”
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14 जून 2020 को सुशांत सिंह राजपूत मुंबई के बांद्रा स्थित घर पर मृत पाए गए थे. पुलिस ने इसे आत्महत्या बताया था.
इसके बाद उनकी दोस्त रिया चक्रवर्ती के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर एक तबके ने नफ़रती बयानबाज़ी की थी. मीडिया में भी इस ख़बर को सनसनीख़ेज मामले के तौर पर पेश किया गया था.
रिया चक्रवर्ती ने इस घटना के एक महीने बाद अपनी चुप्पी तोड़ी थी और सोशल मीडिया पर बताया था कि वह सुशांत की गर्लफ़्रेंड थीं.
साथ ही इंस्टाग्राम पर लिखा था, “अभी तक अपने जज़्बातों पर काबू पाने के लिए जूझ रही हूँ. ख़ुद से लड़ रही हूँ. मेरे दिल में एक सूनापन आ गया है. तुम वह हो जिसने मुझे प्यार पर… और प्यार की ताक़त पर भरोसा करना सिखाया. तुमने मुझे सिखाया कि कैसे गणित का एक छोटा सा फ़ॉर्मूला ज़िंदगी को समझने में मदद करता है. मैंने तुमसे हर दिन सीखा है. मैं कभी यह बात नहीं मान पाऊँगी कि तुम अब यहाँ नहीं हो. मैं जानती हूँ कि तुम अब ज़्यादा सुकून की ज़िंदगी जी रहे हो.”
जब ये घटना हुई तब रिया चक्रवर्ती भी फ़िल्मी इंड्रस्ट्री में अपने पाँव जमाने की कोशिश कर रही थीं. एक तरफ दोस्त को खोने का ग़म था, वहीं हर रोज़ नित नए आरोपों का सामना करना पड़ रहा था. ऐसी ख़बरें आईं कि सुशांत सिंह राजपुत अवसादग्रस्त थे और उसके लिए वे दवा लेते थे. वहीं ड्रग्स लेने की बात भी सामने आई थी.
सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने रिया के ख़िलाफ़ आत्महत्या के लिए भड़काने, चोरी, आपराधिक विश्वासघात और धोखाधड़ी के आरोप लगाए. तो नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो या एनसीबी की तरफ़ से रिया चक्रवर्ती पर सुशांत सिंह राजपूत को ड्रग्स सप्लाई करने का आरोप लगाया गया.
मनोचिकित्सक और जेंडर मामलों पर बात करने वाली साक्षी सिंघला कहती हैं, ”इस मामले को क्या मनोवैज्ञानिक स्तर पर समझा गया? कोई लड़की किसी के जीवन में कुछ समय पहले आती है और वह व्यक्ति उसकी वजह से आत्महत्या कर लेता है? क्या यह संभव है?”
रिया चक्रवर्ती ने एक दोस्त को खोया था लेकिन वह उस सदमे को जज़्ब कर पाती उससे पहले ही उन्हें अपराधी बना दिया गया. रिया को उससे उबरने का मौक़ा तक नहीं मिला.
आत्महत्या एक गंभीर मनोवैज्ञानिक और सामाजिक समस्या है. अगर आप भी तनाव से गुजर रहे हैं तो भारत सरकार की जीवनसाथी हेल्पलाइन 18002333330 से मदद ले सकते हैं. आपको अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से भी बात करनी चाहिए.
”इसका मुआवज़ा रिया को कैसे दिया जा सकता है”
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पंजाब यूनिवर्सिटी में डिपार्टमेंट ऑफ़ वीमेन स्टडीज़ में डॉक्टर अमीर सुल्ताना कहती हैं कि भारतीय समाज में ज़्यादातर मामलों में महिलाओं को निशाना बनाया जाता है.
वे कहती हैं, ”रिया अपने इंटरव्यू में कह चुकी हैं कि सुशांत के अपने पिता के साथ संबंध ठीक नहीं थे. माँ के जाने के बाद सुशांत उदास थे. उन्होंने उससे कहा कि डॉक्टर के पास ले चले. रिया उनकी मदद ही कर रही थी. लेकिन सुशांत के परिवार ने रिया पर आरोप लगाए. मुझे ये पूरी कार्रवाई किसी न किसी राजनीतिक या कोई और प्रभाव में की गई लगती है.”
वे कहती हैं, ”आज ये रिपोर्ट आई है लेकिन इतने सालों में सोशल मीडिया और मीडिया ने तो रिया का चीर हरण कर ही दिया. अब बताइए इसका मुआवज़ा रिया को कैसे दिया जा सकता है. क्या उसके वे दिन वापस लौटाए जा सकते हैं? वह भी इंडस्ट्री में अपने पांव जमाने की कोशिश कर रही थी. आर्थिक नुकसान हुआ. उसकी मेंटल हेल्थ का क्या हुआ. इसका जवाब कौन देगा. इसकी भरपाई कैसे होगी?”
सुशांत का मामला हो या कई अन्य मामले, मीडिया ट्रायल को लेकर भी सवाल उठते रहे हैं. मीडिया की भूमिका किसी को ग़लत या सही ठहरा कर कोई फ़ैसला सुनाने की नहीं.
लेकिन चाहे वह रिया का मामला हो या फिर साल 2008 का चर्चित आरुषि हत्याकांड या हाल ही का या फिर मध्यप्रदेश से कुंभ में माला बेच कर कमाने आई ‘मोनालिसा’ का उदाहरण हो, मीडिया की भूमिका हमेशा सवालों के घेरे में रही है.
साक्षी सिंघला कहती हैं, ”मीडिया अब तथ्य नहीं बल्कि अपना विचार रखता है और वो इतनी बार सनसनीखेज़ तरीके से बताया जाता है कि आम व्यक्ति ये समझ ही नहीं पाता कि वह ख़बर सही है या नहीं.”
उनके अनुसार, ”इस मामले में कार्यवाही पूरी नहीं हुई थी लेकिन रिया को अपराधी घोषित कर दिया गया. उसे ‘गोल्ड डिगर’ कहा गया. ये कहा गया कि बंगाली लड़की ने ऐसा किया. इसमें एक लैंगिक पूर्वाग्रह दिखाई देता है. ऐसा किसी मर्द के साथ होता नहीं दिखाई देता है. रिया के परिवार को धमकियां मिलीं. सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया क्योंकि वह महिला थी. वह सुंदर थी. वह सोशल मीडिया और मीडिया के लिए टीआरपी का साधन बनीं.”
संवेदनशीलता की कमी नज़र आई
रिया और सुशांत की निजी ज़िंदगी को मीडिया में उछाला गया और इसमें रिया एक तरफ और दूसरी तरफ समाज, सुशांत का परिवार, सोशल मीडिया और मीडिया खड़ा नज़र आया.
इतना ही नहीं इस मामले ने इतना तूल पकड़ा की एक समय तो ये बिहार बनाम पश्चिम बंगाल होता दिखा. फ़िल्म इंडस्ट्री भी सुशांत सिंह की मौत पर खुलकर सामने नहीं आई. वहीं रिया चक्रवर्ती के समर्थन में भी शबाना आज़मी, दीया मिर्ज़ा और विद्या बालन जैसे गिने-चुने नाम ही सामने आए.
इस मामले में दोषी चाहे कोई भी पाया जाता लेकिन संवेदनशीलता की कमी साफ़ नज़र आई.
डॉ. अमीर सुल्ताना कहती हैं कि अभी हाल ही में इलाहाबाद हाई कोर्ट का फ़ैसला आया जिसमें ये कहा गया कि स्तन पकड़ना और सलवार का नाड़ा खोलना बलात्कार नहीं माना जा सकता तो इस पर सोशल मीडिया या मीडिया क्यों बहस नहीं करता? ऐसे मुद्दे क्यों नहीं उठाए जाते. दोनों मुद्दों में चाहे वह समाज या न्यायतंत्र की तरफ से हो, पीड़िता महिला ही है.
मीडिया में कई मामलों में संवेदनहीनता दिखाई देती है. रिया चक्रवर्ती फिलहाल ‘चैप्टर टू’ नाम से एक पॉडकास्ट होस्ट कर रही हैं.
डॉ. अमीर सुल्ताना कहती हैं कि रिया चक्रवर्ती ने बहुत मज़बूती के साथ इस मामले को लड़ा है और ट्रॉमा से जूझी हैं. लेकिन कुछ घाव ऐसे होंगे जो वह किसी को दिखाना न चाहें.
यहाँ यह ध्यान देने की ज़रूरत है कि ऐसी घटनाओं को मीडिया किस तरह से उठाए ताकि किसी की निजता और संवेदनशीलता का हनन न हो और ज़िंदगी दूभर न हो जाए…
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित