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सुशासन से समृद्धि: पीएम मोदी के 12 सालों में ऐसे आसान हुआ आम लोगों का जीवन

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Jun 11, 2026


डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारत के राजनीतिक इतिहास में पिछले 12 वर्ष केवल सत्ता संचालन के नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आए एक क्रांतिकारी बदलाव के साक्षी रहे हैं। राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में ली गई एक ऐतिहासिक शपथ से शुरू हुआ यह सफर आज देश के कोने-कोने में रहने वाले हर भारतीय के जीवन को सुगम, सुरक्षित और समृद्ध बना रहा है।

‘फ्रेजाइल फाइव’ (कमजोर पांच) की कतार से निकलकर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बनने तक का भारत का यह सफर असल में हर नागरिक के सपनों को पंख देने जैसा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के इस 12 वर्षों के सेवाकाल ने ‘सुशासन से समृद्धि’ की उस परिकल्पना को धरातल पर उतारा है, जहां विकास का लाभ समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक बिना किसी भेदभाव के पहुंच रहा है।

टैक्स-फ्री आय सीमा बढ़कर 12.75 लाख हुई

टैक्स के बोझ से मुक्ति और ‘सुशासन से समृद्धि’ का अहसास इन 12 वर्षों में आम आदमी को सबसे बड़ी राहत टैक्स व्यवस्था में सुधारों से मिली है। सरकार ने न केवल टैक्स के ढांचे को सरल बनाया, बल्कि जनता पर से इसका बोझ भी कम किया। साल 2014 में जहां केवल दो लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री थी, वहीं आज यह सीमा बढ़कर 12.75 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।

इस राहत का नतीजा यह हुआ कि टैक्स देने वालों का आधार 5.26 करोड़ से बढ़कर 12.13 करोड़ हो गया। जनता में यह भरोसा जागा है कि उनका एक-एक पैसा सीधे देश के विकास, जैसे – शानदार सड़कों, अत्याधुनिक अस्पतालों और मजबूत बुनियादी ढांचे के निर्माण में लग रहा है। पारदर्शी और फेसलेस टैक्स प्रणाली ने नागरिकों के आत्मसम्मान को बढ़ाया है।

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डिजिटल क्रांति: आठ रुपये में एक जीबी डाटा और बदलती ग्रामीण अर्थव्यवस्था

एक समय था जब इंटरनेट अमीरों की जागीर समझा जाता था, लेकिन आज भारत के गांवों में बैठा एक आम किसान या छोटा दुकानदार भी पूरी दुनिया से जुड़ा हुआ है। बीते 12 वर्षों में एक जीबी मोबाइल डाटा की कीमत 269 रुपये से 97 प्रतिशत घटकर महज आठ से 10 रुपये रह गई है।

इस सस्ती तकनीक का ही कमाल है कि देश में इंटरनेट उपभोक्ताओं की संख्या 25 करोड़ से छलांग लगाकर 103 करोड़ पार कर चुकी है। मोबाइल फोन का आयात करने वाला भारत आज दुनिया का बड़ा निर्यातक बन चुका है। इस डिजिटल रीढ़ ने ई-कामर्स और आनलाइन सेवाओं के जरिये देश के युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के असीम अवसर पैदा किए हैं।

अन्नदाताओं की खुशहाली : पांच गुना बढ़ा कृषि बजट

देश के किसानों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना इस सरकार की प्राथमिकताओं में शीर्ष पर रहा है। साल 2013-14 में कृषि मंत्रालय का बजट जो महज 27,663 करोड़ रुपये था, वह वित्त वर्ष 2026-27 में पांच गुना बढ़कर 1.4 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

‘पीएम-किसान’ योजना के तहत देश के करोड़ों किसानों के खातों में सीधे 4.3 लाख करोड़ रुपये भेजे जा चुके हैं। यूरिया पर 90 प्रतिशत की भारी सब्सिडी देकर किसानों को बाजार के उतार-चढ़ाव से बचाया गया। इन्हीं कदमों का परिणाम है कि देश में रिकार्ड 3,577 लाख टन खाद्यान्न का उत्पादन हुआ, जिसने देश की खाद्य सुरक्षा को अभेद्य बना दिया है।

भारतीय रेलवे का कायाकल्प : वंदे भारत और चेनाब ब्रिज का गौरव

आम नागरिक के सफर को सुहाना और सुरक्षित बनाने के लिए भारतीय रेलवे ने इन 12 वर्षों में पुनर्जन्म जैसा दौर देखा है। 2014 के बाद से देश में 36 हजार किलोमीटर से अधिक नई रेल पटरियां बिछाई गईं और ब्राड-गेज नेटवर्क का 99.6 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा कर भारत ‘नेट जीरो’ कार्बन उत्सर्जन की ओर बढ़ रहा है।

कश्मीर में चेनाब नदी पर बना दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे आर्क ब्रिज और अत्याधुनिक ‘वंदे भारत स्लीपर’ ट्रेनों की शुरुआत नए भारत की आधुनिक पहचान बन चुकी है। अब लंबी कतारों के बिना आसानी से टिकट मिलना और विश्वस्तरीय स्टेशनों पर सफर करना देश के मध्यम वर्ग के लिए एक सुखद हकीकत बन चुका है। 12 वर्षों में भारत के हेल्थकेयर सेक्टर में भी बड़ा बदलाव सरकारी बुकलेट ‘लोक सेवा में प्रधान सेवक के 11 वर्ष’ के अनुसार, मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में भी अभूतपूर्व सुधार हुआ है।

आयुष्मान भारत

दुनिया की इस सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत 43 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड जारी किए गए हैं। प्रति परिवार पांच लाख का मुफ्त इलाज मिलने से 12 करोड़ मरीजों को लाभ हुआ और 1.25 लाख करोड़ की बचत हुई।

इस वर्ष इसके लिए 9,500 करोड़ से अधिक आवंटित किए गए हैं। स्वास्थ्य बजट आवंटन 2014 के 35,163 करोड़ से बढ़कर 2026 में 1,06,530 करोड़ रुपये हो गया है। आयुष बजट भी 1,272 करोड़ से बढ़कर 4,408 करोड़ हुआ।

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