स्टॉक मार्केट में बढ़ती महिलाओं की हिस्सेदारी क्यों ज़रूरी है?- पैसा वसूल
शेयर बाज़ार में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है.
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी एनएसई का लेटेस्ट डेटा बताता है कि भारत में इंडिविजुअल इन्वेस्टर के मामले में महिलाओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है. महिलाओं का ये पार्टिसिपेशन 25 फ़ीसदी तक पहुँचा है यानी अब भारत में हर चौथा इंडिविजुअल इन्वेस्टर एक महिला है.
ये बदलाव बड़ा है… बड़ा इसलिए क्योंकि महिलाओं ने परंपरागत बचत के तरीकों को छोड़कर दूसरे और मॉडर्न फाइनेंशियल इंस्ट्रूमेंट्स को अपनाया है.
हालाँकि अभी ज़्यादातर ये हिस्सेदारी अर्बन इलाकों से ही है. डेटा के मुताबिक महिलाओं की कुल हिस्सेदारी में दिल्ली 30 फ़ीसदी के साथ पहले नंबर पर है… महाराष्ट्र 28 फ़ीसदी के साथ दूसरे नंबर और तमिलनाडु 27 फ़ीसदी से कुछ अधिक के साथ तीसरे नंबर पर है.
हालांकि उत्तर भारत के दो सबसे बड़े प्रदेशों उत्तर प्रदेश और बिहार में ये भागीदारी उतनी उत्साहवर्धक नहीं है. यूपी से ये हिस्सेदारी लगभग 19 फ़ीसदी है तो बिहार का आंकड़ा 16 फ़ीसदी के आस-पास है.
आप कह सकते हैं कि इसमें क्या ख़ास है… डेटा ही तो है और ये तो घटता-बढ़ता रहता है. लेकिन रुकिए… इनकी अहमियत इसलिए है क्योंकि दुनियाभर में इन्वेस्टमेंट में पुरुषों का दबदबा रहा है. जब निवेश की बात आती है तो डिसीजन में आमतौर पर मर्दों की चलती रही है.
लेकिन वजह सिर्फ़ यही नहीं है… इन्वेस्टमेंट के लिए अपने पास पैसा होना भी तो चाहिए. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की कुछ समय पहले आई एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में पारिवारिक संपत्ति में महिलाओं का मालिकाना हक 20 से 30 फ़ीसदी के बीच है जो कि 40 फ़ीसदी के ग्लोबल शेयर से काफ़ी कम है.
शायद इन्हीं दो बड़ी वजहों से अधिकतर भारतीय महिलाएं शेयर बाज़ार से दूर हैं और वो हैं निवेश के लिए पैसे की कमी और कंज़रवेटिव थिंकिंग.
बदल रहे हैं हालात
लेकिन हालात अब धीरे-धीरे ही सही लेकिन बदल रहे हैं. महिलाएं नौकरियां कर रही हैं, पैसा कमा रही हैं. लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन में महिलाओं का हिस्सा 35 परसेंट के आसपास है. मतलब ये रहा है कि जितनी ज़्यादा महिलाओं के हाथ में पैसा होगा, उतनी ही ज़्यादा निवेशक महिलाएं होंगी.
क्योंकि अच्छे रिटर्न के लिए स्टॉक्स मार्केट का उदाहरण दिया जाता है इसलिए महिलाएं भी स्टॉक मार्केट में उतर रही हैं और यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में लाखों महिलाओं ने डीमैट अकाउंट खुलवाए हैं.
सवाल ये भी है कि किन और तरीकों से फाइनेंशियल इन्वेस्टमेंट में वुमेन पार्टिसिपेशन को बढ़ाया जा सकता है…. फाइनेंशियल एजुकेशन पर भारतीय रिज़र्व बैंक की 2020-21 की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में साक्षरता दर भले ही 80 फ़ीसदी के आंकड़े को पार कर गया है, लेकिन फ़ाइनेंशियल लिट्रेसी रेट बहुत कम है. और महिलाओं के मामले में तो और भी कम.
फाइनेंशियल एक्सपर्ट कहते हैं- सिर्फ़ कमाना ही इस बात की गारंटी नहीं है कि आप इन्वेस्ट भी करेंगे. ज़रूरत इस स्टीरियोटाइप को तोड़ने की भी है कि बेस्ट इन्वेस्टमेंट डिसीजन तो सिर्फ़ पुरुष ही लेते हैं… क्योंकि नॉलेज कोई भी हासिल कर सकता है.
प्रोड्यूसरः दिनेश उप्रेती
प्रेज़ेंटरः प्रेरणा
वीडियो एडिटिंगः शाद मिद्हत
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.