पीटीआई, नई दिल्ली। धूमपान नहीं करने वाले लोगों में फेफड़ों के कैंसर के बढ़ते मामलों पर गुजरात से राज्यसभा सदस्य बाबूभाई जेसांगभाई देसाई ने शुक्रवार को उच्च सदन में चिंता जताई।
भाजपा नेता देसाई ने कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए सरकार से राष्ट्रीय स्तर पर स्क्रीनिंग या कैंसर की जांच का अभियान शुरू करने का आग्रह किया।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए देसाई ने नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एम्स) के रिपोर्टों का हवाला दिया, जिसमें पता चला कि देश में हर साल फेफड़ों के कैंसर के लगभग एक लाख नए मामलों में से 40 प्रतिशत मरीज ऐसे होते हैं जिन्होंने कभी धूमपान नहीं किया।
देसाई ने इस प्रवृत्ति के प्रमुख कारण के रूप में वायु प्रदूषण की ओर इशारा किया, जिसमें पीएम 2.5 सबसे बड़ा जोखिम है। उन्होंने कहा कि तीव्र शहरीकरण, औद्योगिक विस्तार और वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट आ रही है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है।
उन्होंने बताया कि एम्स लगभग 3,200 लोगों के बीच वायु प्रदूषण और कैंसर के बीच संबंध पर व्यापक शोध कर रहा है।
देसाई ने कहा कि फेफड़ों के कैंसर के अधिकांश मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब यह एडवांस स्टेज या गंभीर हो जाती है। इस कारण कैंसर का पता चलने के एक वर्ष के भीतर ही लगभग 70 प्रतिशत मरीजों की मौत हो जाती है।
देसाई ने सरकार से वायु प्रदूषण को कम करने और नियंत्रित करने, फेफड़ों के कैंसर का शीघ्र पता लगाने के लिए राष्ट्रीय स्तर का स्क्रीनिंग कार्यक्रम शुरू करने और जन जागरूकता और स्वास्थ्य सेवा इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने का आग्रह किया।