• Sat. Mar 21st, 2026

24×7 Live News

Apdin News

स्वार्थ और वर्चस्व की चाह दुनिया में संघर्षों की है जड़, मोहन भागवत का बड़ा बयान

Byadmin

Mar 21, 2026


पीटीआई, नागपुर। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि विश्व में संघर्षों की जड़ स्वार्थ और वर्चस्व की चाह है। स्थायी रूप से शांति सिर्फ एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है।

आगे कहा कि दुनिया दो हजार वर्षों से संघर्षों के समाधान के लिए कई तरह के विचारों का प्रयोग करती रही है, लेकिन उसे इस दिशा में कोई विशेष सफलता नहीं मिली है। धार्मिक असहिष्णुता, जबरन मतांतरण, श्रेष्ठता और हीनता के विचार अब भी मौजूद हैं।

नागपुर शहर में विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के विदर्भ प्रांत कार्यालय की आधारशिला रखने के बाद सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान सिखाता है कि सभी जुड़े हुए हैं और एक हैं।

उन्होंने संघर्ष से सौहार्द और सहयोग की ओर बढ़ने का आह्वान किया। कहा कि आधुनिक विज्ञान भी धीरे-धीरे इसी समझ की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लड़खड़ाती दुनिया को धर्म की बुनियाद देकर उसमें संतुलन बहाल करना भारत की जिम्मेदारी है। भारत के लोग मानवता के नियम का पालन करते हैं, लेकिन बाकी दुनिया जंगल के नियम का पालन करती है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि स्थायी शांति केवल एकता, अनुशासन और धर्म के पालन से ही हासिल की जा सकती है। धर्म केवल शास्त्रों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि यह लोगों के व्यवहार में भी दिखना चाहिए। अनुशासन एवं नैतिक मूल्यों के पालन के लिए निरंतर अभ्यास की जरूरत होती है। इसमें अक्सर व्यक्तिगत कठिनाई भी झेलनी पड़ती है।

भागवत ने कहा कि भारत मानवता में विश्वास करता है, जबकि अन्य देश अस्तित्व के लिए संघर्ष और ताकतवर के टिके रहने के सिद्धांत को मानते हैं। दुनिया को संघर्ष नहीं, बल्कि सौहार्द की जरूरत है। जारी संघर्षों के बीच दुनियाभर से आवाजें उठ रही हैं कि केवल भारत ही युद्धों को समाप्त कर सकता है, क्योंकि यह देश का स्वभाव है।

By admin