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इमेज कैप्शन, आर्कबिशप एंड्रयूज़ ने कहा है कि ‘हम भारतीय धर्म हैं’ (प्रतीकात्मक तस्वीर)….में
द कैथोलिक बिशप्स कॉन्फ़्रेंस ऑफ़ इंडिया (सीबीसीआई) ने उन धर्मांतरण-विरोधी क़ानूनों को रद्द करने की मांग की है, जो संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत दी गई धार्मिक स्वतंत्रता के अनुरूप नहीं हैं.
बता दें कि पिछले हफ़्ते ही सुप्रीम कोर्ट ने धर्मांतरण-विरोधी क़ानूनों पर रोक लगाने की मांग वाली एक याचिका पर दर्जनभर राज्यों और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था.
यह भी अहम था कि सीबीसीआई ने अपना नया अध्यक्ष हैदराबाद के कार्डिनल एंथनी पूला को चुना.
वह भारत के पहले दलित हैं जिन्हें कार्डिनल का पद मिला और अब वह इसी प्रतिष्ठित निकाय के अध्यक्ष भी बने हैं.
बेंगलुरु में आयोजित सीबीसीआई की सप्ताहभर चली 37वीं आम बैठक के अंत में संगठन का यह स्टैंड सामने आया. इस सम्मेलन का विषय था- ‘विश्वास और राष्ट्र: भारत के संवैधानिक मूल्यों के प्रति चर्च की प्रतिबद्धता’.
बता दें कि लैटिन, सिरो-मलाबार और सिरो-मलनकारा संप्रदायों के क़रीब 170 डाओसिस सीबीसीआई का हिस्सा हैं.
‘हम धर्मों की बराबरी चाहते हैं’
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इमेज कैप्शन, याचिकाकर्ता नेशनल काउंसिल ऑफ़ चर्चेज़ इन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि इन क़ानूनों ने ‘स्वयंभू रक्षक समूहों को बढ़ावा दिया है’
सीबीसीआई के निवर्तमान अध्यक्ष आर्कबिशप एंड्रयूज़ थाज़थ ने कहा, “ईसाई समुदाय के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि कुछ राज्यों में क़ानूनों का अक्सर दुरुपयोग होता है. क़ानून तो हैं, लेकिन धर्म की स्वतंत्रता के नाम पर उनका ग़लत इस्तेमाल हो रहा है. झूठे केस दर्ज किए जा रहे हैं.”
उन्होंने कहा, “कुछ जगहों पर हम एक ईसाई पादरी की तरह कपड़े पहनकर भी नहीं जा सकते. यह भेदभाव भारतीय संविधान के ख़िलाफ़ है, जो हमें अपने धर्म को मानने और आचरण करने का अधिकार देता है. अगर हम सच में धर्मांतरण कराने के लिए मजबूर कर रहे होते, तो हमारी आबादी 2.7% से 2.3% कैसे हो जाती?”
प्रेस कॉन्फ़्रेंस में एक सवाल के जवाब में आर्कबिशप एंड्रयूज़ ने माना, “जब जबरन धर्मांतरण के आरोप लगाए जाते हैं, तो यह दिखाता है कि हमें निशाना बनाया जा रहा है और इससे हम चिंतित हैं.”
पिछले हफ़्ते मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, झारखंड, राजस्थान और कर्नाटक सरकारों को औपचारिक नोटिस जारी किया है.
याचिकाकर्ता नेशनल काउंसिल ऑफ़ चर्चेज़ इन इंडिया ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि इन क़ानूनों ने ‘स्वयंभू रक्षक समूहों को बढ़ावा दिया है’, जबकि इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी.
केरल के तिरुवल्ला के आर्कबिशप थॉमस मार कूरिलोस ने कहा कि संविधान की असल पहचान समानता है. लेकिन, “यह समानता ईसाइयों को नहीं दी जाती. हमारे सारे अधिकार छीन लिए जाते हैं. हम धर्मों की बराबरी चाहते हैं.”
आर्कबिशप एंड्रयूज़ ने यह भी कहा, “हम कोई विदेशी धर्म नहीं हैं. हम भारतीय धर्म हैं. पहली सदी से ही भारत में ईसाई मौजूद हैं. हमने राष्ट्र-निर्माण में किसी भी समुदाय से ज़्यादा योगदान दिया है. और हम भारतीय नागरिकों के रूप में राष्ट्र के प्रति पूरी तरह समर्पित हैं.”
‘50% से ज़्यादा दलित समुदाय से’
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इमेज कैप्शन, सीबीसीआई ने अपना नया अध्यक्ष हैदराबाद के कार्डिनल एंथनी पूला (बाएं से तीसरे) को चुना है
पिछले सप्ताह सीबीसीआई की बैठक शुरू होने से पहले जब उनसे पूछा गया कि समुदाय पर हो रहे हमलों का सामना कैसे करेंगे, तो आर्कबिशप एंड्रयूज़ ने कहा, “हम तो सिर्फ़ निवेदन कर सकते हैं, बार-बार निवेदन कर सकते हैं कि समुदाय पर हमले करने वालों के ख़िलाफ़ ज़रूरी कार्रवाई की जाए.”
एक अन्य सवाल के जवाब में आर्कबिशप ने कहा, “पिछले दो साल में दो बार हम प्रधानमंत्री से मिले और उनसे निवेदन किया कि कृपया ज़रूरी क़दम उठाएं, कम से कम इन हमलों की निंदा ही कर दें. पिछली क्रिसमस पर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने हमें सार्वजनिक तौर पर आश्वासन दिया था. हम उम्मीद करते हैं, सब ठीक ही होगा.”
सीबीसीआई के आधिकारिक बयान में यह साफ़ किया गया कि “ध्रुवीकरण और अविश्वास के माहौल में भी, चर्च संवाद, मेल-मिलाप और भाईचारे को बढ़ावा देने की अपनी भूमिका बनाए रखेगा.”
हालांकि, ‘ग्रामर ऑफ़ होप’ विषय पर सम्मेलन को संबोधित करने वाले प्रोफ़ेसर डॉमिनिक डेविडप्पा चर्च के रवैये से संतुष्ट नहीं थे, क्योंकि हमलों का सबसे ज़्यादा भार आम ईसाइयों को ही झेलना पड़ा.
उन्होंने बीबीसी न्यूज़ हिन्दी से कहा, “अगर उन्होंने एक दिन के लिए शैक्षणिक संस्थान या अस्पताल बंद करने की अपील कर दी होती, तो सरकार पर इसका असर बिल्कुल अलग पड़ता.”
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 50% ईसाई दलित समुदायों से हैं. “अगर प्रोटेस्टेंट संप्रदाय को भी शामिल करें, तो इनकी संख्या ईसाई आबादी के आधे से भी ज़्यादा हो सकती है.”
इसी संदर्भ में कार्डिनल एंथनी का सीबीसीआई का नया अध्यक्ष चुना जाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.