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हम भी हैं गौरा देवी…धधकते जंगल को इन चार पहाड़ी महिलाओं ने कैसे बचाया

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Feb 28, 2026


(बाएं से दाएं) गुड्डी देवी, जमुना देवी, ममता देवी और रीना देवी

इमेज स्रोत, Varsha Singh/BBC

इमेज कैप्शन, (बाएं से दाएं) गुड्डी देवी, जमुना देवी, ममता देवी और रीना देवी ने अपने हाथों से अपने जंगल की आग बुझाई

    • Author, वर्षा सिंह
    • पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
  • पढ़ने का समय: 10 मिनट

“जंगल जलता देखकर गांव वाले दु:ख तो जता रहे थे लेकिन वहां जाकर आग बुझाने के बारे में कोई नहीं सोच रहा था. जबकि आग तीन दिन से लगी हुई थी. दिन में तो आग दिखाई नहीं देती, सिर्फ धुआं-धुआं सा लगता. लेकिन रात को लपटें दिखतीं तो पता चलता कि आग बहुत फैली हुई है.”

ये शब्द हैं चमोली के नौरख गांव की रहने वाली रीना देवी के.

22 साल की रीना देवी को यह आग देखकर डर लग रहा था, लेकिन इससे भागने की जगह चार सहेलियों ने मिलकर जंगल की इस आग को बुझाने का फ़ैसला किया.

इस साल सर्दियों के बावजूद भी उत्तराखंड के जंगल जगह-जगह जल रहे थे और दशोली ब्लॉक में नौरख गांव का जंगल जनवरी महीने में तीन दिन से आग की चपेट में था. इस गांव में क़रीब तीन सौ परिवार रहते हैं.

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