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आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज जिसमें आपको अपने शरीर को एक ख़ास पोजीशन में स्थिर रखना होता है.
ये आपके शरीर को मजबूत बनाने और ब्लड प्रेशर को कम करने में मदद कर सकता है. इसके लिए आपको केवल 14 मिनट का एक सेशन करना होता है, वह भी सप्ताह में तीन दिन बस. और आपको जल्द ही इसके फ़ायदे नजर आएंगे.
आजकल जब भी हम फिटनेस के बारे में सोचते हैं तो आमतौर पर हमारे दिमाग़ में ट्रेडमिल पर घंटों दौड़ना या जिम में वेटलिफ्टिंग करना आता है.
लेकिन एक हालिया स्टडी से पता चला है कि फिट रहने के लिए इतनी मेहनत करने की ज़रूरत नहीं है.
हक़ीक़त में आपको अपने शरीर को ज्यादा हिलाने-डुलाने की भी ज़रूरत नहीं है. बस कुछ मिनटों के लिए अपने शरीर को एक निश्चित स्थिति में रखना ही काफी है.
आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज, जैसे कि स्क्वाट पोजीशन में बैठना या कुर्सी पर बैठते समय अपने पैरों को सीधा रखना. इससे आप दिल को स्वस्थ रख सकते हैं और मांसपेशियों को भी मजबूत कर सकते हैं.
जिन लोगों के पास एक्सरसाइज के लिए ज्यादा समय नहीं होता, उनके लिए यह राहत की बात है. हममें से ज्यादातर लोग एक्सरसाइज के महत्व को समझते हैं, लेकिन रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इसके लिए समय नहीं निकाल पाते.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक, 2010 और 2022 के बीच वैश्विक स्तर पर शारीरिक निष्क्रियता का स्तर पांच फ़ीसदी से बढ़कर 31 फ़ीसदी हो गया है.
आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज की सफलता से जुड़े अहम प्रमाण
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पिछले कई दशकों से आइसोमेट्रिक फिजियोलॉजी के पक्ष में लगातार तर्क दिए जा रहे हैं. खासतौर पर 1990 के दशक से. ऐसे संकेत मिले कि यह ब्लड प्रेशर को कम करने में सहायक है. हालांकि व्यक्तिगत अध्ययनों से हमें सीमित जानकारी ही प्राप्त हो सकती है.
इसीलिए वैज्ञानिक अक्सर मेटा-एनालिसिस करते हैं. जिसमें विभिन्न लोगों के अनुभवों से डेटा जमा किया जाता है.
साल 2023 में, 1990 और 2023 के बीच किए गए परीक्षणों के आंकड़ों का एक मेटा-एनालिसिस पब्लिश किया गया था.
इसमें लगभग 16 हज़ार लोगों को कम से कम दो हफ्ते तक ब्लड प्रेशर कम करने के लिए अलग-अलग एक्सरसाइज करवाई गईं और फिर उनके प्रभावों की तुलना की गई.
इस अध्ययन में तीन तरह की एक्सरसाइज शामिल थी: हैंडग्रिप (हाथ में गेंद या वस्तु पकड़कर दबाना), वॉल स्क्वाट (दीवार के सहारे दबाना) और लेग एक्सटेंशन (पैरों की एक्सरसाइज).
परीक्षणों में लगभग एक समान बुनियादी प्रशिक्षण योजना अपनाई गई. एक्सरसाइज के चार दो-मिनट के सेट और उनके बीच एक या दो मिनट का आराम.
यह 14 मिनट का सत्र सप्ताह में लगभग तीन बार किया गया. जो लगभग किसी के भी व्यस्त शेड्यूल में आसानी से फिट हो सकता है.
जो भी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को लेकर गंभीर है, उसे ये परिणाम काफी प्रभावशाली लगेंगे. इन परिणामों से स्पष्ट था कि आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज कार्डियो, वेटलिफ्टिंग या अन्य कठोर एक्सरसाइज की तुलना में कहीं अधिक असरदार थी.
ब्लड प्रेशर को आमतौर पर दो पैमानों पर मापा जाता है. एक बार हृदय के धड़कने के समय और दूसरा, आराम की स्थिति में. 120/80 एमएमएचजी से कम का कोई भी माप सेहतमंद दिल का संकेत है.
एरोबिक एक्सरसाइज के बाद ब्लड प्रेशर में 4.49/2.53 एमएमएचजी की गिरावट आई. वहीं आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के बाद ब्लड प्रेशर में 8.24/4.00 एमएमएचजी की गिरावट आई.
ब्लड प्रेशर कम करने वाली दवाओं की तुलना में, इसने ब्लड प्रेशर को 9/4.00 एमएमएचजी तक कम किया. ये आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से केवल कुछ पॉइंट्स ही बेहतर था.
हाई ब्लड प्रेशर से दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ता है. इसलिए बढ़ती उम्र में ये एक्सरसाइज हमारे लिए बहुत फ़ायदेमंद साबित हो सकती है.
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ब्रिटेन के केंट विश्वविद्यालय में स्वास्थ्य सेवा अध्ययन केंद्र की वरिष्ठ शोधकर्ता मेलानी रीस-रॉबर्ट्स कहती हैं, “इन एक्सरसाइज की सबसे अच्छी बात यह है कि आप इन्हें घर पर कर सकते हैं. आपको किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं है. आपको बारिश के दिनों में बाहर नहीं जाना पड़ता है और इन्हें करते समय आपको बहुत पसीना नहीं बहाना पड़ता है.”
इस मेटा-एनालिसिस के सह-लेखक और ब्रिटेन के कैंटरबरी क्राइस्ट चर्च विश्वविद्यालय में एक्सरसाइज विज्ञान के प्रोफेसर जिम वाइल्स का भी मानना है कि इस तरह की एक्सरसाइज उन लोगों के लिए बेहद फ़ायदेमंद हैं जिन्हें जोड़ों में दर्द होता है या जिन्हें भारी वज़न उठाने में कठिनाई होती है.
उन्होंने बताया, “अगर आइसोमेट्रिक वॉल स्क्वाट सही तरीके से किया जाए तो यह दिल और मांसपेशियों के लिए अन्य एक्सरसाइजों की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित है.”
जब आप आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज करते हैं, तो आप एक या अधिक मांसपेशियों को स्थिर अवस्था में ही खींचते हैं. इसका मतलब यह है कि आपकी मांसपेशियां उतनी लंबी नहीं होतीं जितनी कि आमतौर पर अधिक गति वाली अन्य एक्सरसाइज में होती हैं.
इस तरह की स्थिर स्थिति ब्लड वेसल्स पर दबाव डालती है, जिससे ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और सक्रिय मांसपेशियों में अपशिष्ट पदार्थ जमा होने लगते हैं. इससे मस्तिष्क को उस क्षेत्र में अधिक ऑक्सीजन भेजने का संकेत मिलता है, लेकिन अवरोध के कारण ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.
जब मांसपेशियों पर दबाव कम होता है, तो ब्लड वेसल्स का साइज बढ़ जाता है. जिससे उस क्षेत्र में रक्त प्रवाह बढ़ जाता है और ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से कम हो जाता है.
अब विचार यह है कि इस पूरी प्रक्रिया को बार-बार दोहराने से लंबे समय में ब्लड प्रेशर को स्थायी रूप से कम करने में मदद मिल सकती है.
सिर्फ़ ब्लड प्रेशर तक सीमित नहीं फ़ायदे
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इसके फ़ायदे केवल ब्लड प्रेशर तक ही सीमित नहीं हैं. ब्लड वेसल्स को उत्तेजित करके आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज धमनियों की कठोरता को कम करती हैं.
हाल के अध्ययनों के मुताबिक, ये एक्सरसाइज हृदय के काम करने के तरीके में भी उल्लेखनीय सुधार करती हैं.
आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज से मांसपेशियों की ताकत भी बढ़ती है. क्योंकि ये हमें ज्यादा फोर्स पैदा करने में मदद करती हैं. ये मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में न्यूरॉन्स को सक्रिय करती हैं.
ब्रिटेन के एंग्लिया रस्किन विश्वविद्यालय में एक्सरसाइज बॉडी साइंस के प्रोफेसर डैन गॉर्डन बताते हैं, “जब आप किसी मांसपेशी को स्थिर रखते हैं, तो यह केवल ‘मोटर यूनिट’ को सक्रिय करती है.”
उनका कहना है कि इससे एथलीट परफॉर्मेंस में भी काफी सुधार होता है.
विश्व रिकॉर्डधारी ट्रैक साइकिलिस्ट गॉर्डन को इसका व्यक्तिगत अनुभव है. मैनचेस्टर वेलोड्रोम में ब्रिटेन के लिए प्रशिक्षण के दौरान, वह साइकिल चलाने से पहले स्क्वाट पोजीशन में लगभग 150 किलोग्राम का भारी वज़न उठाते थे.
वे कहते हैं, “फिर कोई वज़न हटा देता और मैं साइकिल पर बैठ जाता. क्योंकि मेरे सभी मोटर यूनिट सक्रिय हो जाते थे, इसलिए मैं तेजी से साइकिल चला सकता था.”
गॉर्डन का कहना है कि यह सिर्फ़ एथलीटों के लिए ही फ़ायदेमंद नहीं है. उदाहरण के लिए, बुजुर्ग लोग जिन्हें कुर्सी से उठने में परेशानी होती है, वे पहले कुछ देर कुर्सी के आर्मरेस्ट पर दबाव डालकर खड़े हो सकते हैं.
इस तरह वे अपनी मांसपेशियों को सक्रिय कर सकते हैं और अपने चलने-फिरने को आसान बना सकते हैं.
आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज कैसे शुरू करें?
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अगर आप अभी तक ज़्यादा शारीरिक गतिविधि नहीं करते हैं, तो आइसोमेट्रिक ट्रेनिंग एक्सरसाइज शुरू करने का एक शानदार तरीका हो सकता है.
लेकिन अगर आप पहले से ही काफी सक्रिय हैं तो जिम वाइल्स का सुझाव है कि आपको अपनी मौजूदा दिनचर्या में पूरी तरह से बदलाव नहीं करना चाहिए क्योंकि अन्य एक्सरसाइज के भी अपने अलग-अलग फ़ायदे हैं.
उदाहरण के लिए, कार्डियो एक्सरसाइज वज़न घटाने और शरीर की अधिकतम ऑक्सीजन हासिल करने की क्षमता बढ़ाने के लिए काफी प्रभावी है. जिससे शारीरिक क्षमता और दिल के स्वास्थ्य में सुधार होता है.
लेकिन अगर आपका मुख्य लक्ष्य ब्लड प्रेशर को कम करना है, तो आप अपनी दिनचर्या में स्टैटिक स्क्वैट्स जैसे आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज शामिल कर सकते हैं.
इस मेटा-एनालिसिस में केवल तीन खास तरह की एक्सरसाइज पर फोकस किया गया है. इसलिए हम यह नहीं कह सकते कि अन्य एक्सरसाइज, जैसे कि प्लैंक का भी वही प्रभाव होगा.
हालांकि जिम वाइल्स का मानना है कि वे संभवतः काम कर सकते हैं.
2025 में 12 युवाओं पर किए गए एक सीमित परीक्षण में पाया गया कि दो मिनट के लिए चार बार प्लैंक एक्सरसाइज करने के 24 घंटे बाद उनका ब्लड प्रेशर कम हो गया.
हालांकि, अध्ययन के लेखकों का कहना है कि इसकी पुष्टि के लिए और बड़े अध्ययनों की ज़रूरत है.
हालांकि दो मिनट से कम समय के लिए एक्सरसाइज शुरू करना और धीरे-धीरे समय बढ़ाना आकर्षक लग सकता है. लेकिन ब्लड प्रेशर से संबंधित अधिकांश प्रमाण पूरे दो मिनट की अवधि पर आधारित हैं.
इसलिए वाइल्स समय कम करने के बजाय कम तीव्रता से शुरू करने की सलाह देते हैं. उदाहरण के लिए, अधिकांश लोग 90 डिग्री के एंगल पर पूरा स्क्वाट नहीं कर सकते.
इसलिए, वे सुझाव देते हैं कि शुरुआत में आपको 110 या 130 डिग्री के एंगल पर स्क्वाट करने की कोशिश करनी चाहिए.
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यह निश्चित रूप से संभव है कि प्रत्येक एक्सरसाइज सेशन पर बिताए गए समय को कम करने से भी इसी तरह का प्रभाव पड़ सकता है. लेकिन हमारे पास इसका समर्थन करने के लिए कोई सबूत नहीं है.
गॉर्डन कहते हैं, “हमें नहीं पता कि यह दो मिनट का सिद्धांत कहां से आया है. यह संभव है कि अपने वज़न के 40 प्रतिशत पर दो मिनट की एक्सरसाइज, अपने वज़न के 100 प्रतिशत पर 10 सेकंड की एक्सरसाइज की तरह असर डाल सकती है.”
इसके अलावा भी कई अन्य सवाल हैं. उदाहरण के लिए हाई ब्लड प्रेशर की दवा ले रहे लोगों के लिए इस तरह की एक्सरसाइज कितनी फ़ायदेमंद हैं और इनसे मिलने वाले लाभ कितने महीनों या वर्षों तक बना रह सकता है.
शायद इन सवालों के जवाब जल्द ही मिल जाएंगे. वाइल्स, रीस रॉबर्ट्स और कई अन्य सहयोगी वर्तमान में लोगों के एक बड़े और अलग-अलग समूहों पर नियंत्रित परीक्षण कर रहे हैं.
अब तक उन्होंने 700 से अधिक लोगों को नामांकित किया है और वे सभी हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं.
इस परीक्षण में भाग लेने वाले पार्टिसिपेंट्स, जिनमें से कई दवा भी ले रहे हैं, घर पर वॉल स्क्वैट्स करेंगे. लगभग छह महीने तक उनकी निगरानी की जाएगी ताकि आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज के लंबे समय में मिलने वाले प्रभावों का पता लगाया जा सके.
इन परिणामों से हमें इन एक्सरसाइजों के फ़ायदों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिलेगी और विभिन्न फिटनेस स्तरों के लिए एक्सरसाइजों को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
हालांकि, अब तक मिले फाइंडिंग्स के आधार पर, यह बुनियादी दिनचर्या शुरू करने के लिए पर्याप्त है.
चाहे आप आलसी हों या जिम जाने के शौकीन, हैंडग्रिप्स, वॉल स्क्वैट्स और लेग एक्सटेंशन जैसी एक्सरसाइज को अपनी दिनचर्या में शामिल करने से आप एक स्वस्थ भविष्य की ओर आगे बढ़ेंगे.
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित