इमेज कैप्शन, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के जहाज़ों पर प्रतिक्रिया दी है
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हिंद महासागर में ईरान के एक जंगी जहाज़ को डुबोने और दूसरे जहाज़ को शरण देने से जुड़े सवाल पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रतिक्रिया दी है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक ईरानी नौसैनिक जहाज़ को भारत में शरण देने के फ़ैसले को ‘इंसानियत की दृष्टि से सही’ बताया.
रायसीना डायलॉग 2026 में एक सत्र के दौरान जब उनसे इससे जुड़ा सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि हिंद महासागर एक ऐसा क्षेत्र है जहां दूसरे देश समुद्री क्षमता के साथ मौजूद हैं.
बुधवार 4 मार्च को अमेरिका ने एक वीडियो जारी कर बताया था कि उसकी एक पनडुब्बी ने हिन्द महासागर में ईरान के एक युद्धपोत पर हमला किया और उसे डुबो दिया.
बीबीसी सिंहला को दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़ यह हमला बुधवार को दक्षिण श्रीलंका के गॉल शहर के पास सुबह क़रीब पांच बजे हुआ.
इस युद्धपोत में तक़रीबन 130 लोग सवार थे और ‘डेना’ नामक ये जहाज़ भारतीय नौसेना के न्यौते पर एक सैन्य अभ्यास में शामिल होने के लिए भारत आया था.
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अमेरिका की इस कार्रवाई के बाद भारत में विपक्षी दलों ने पीएम मोदी पर निशाना साधा था.
विपक्षी दलों के नेताओं ने कहा था कि ये जहाज़ भारत का मेहमान था और इसे अमेरिका ने डुबो दिया. इसके साथ ही भारत की समुद्री सुरक्षा को लेकर कई गंभीर भी सवाल खड़े किए गए.
कई विशेषज्ञों और पूर्व राजनयिकों ने इस मामले पर भारत सरकार की चुप्पी पर भी सवाल उठाए.
विदेश मंत्री की ओर से अब क्या कहा गया?
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इमेज कैप्शन, जयशंकर ने कहा है कि भारत हिंद महासागर में “नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर” है
रायसीना डायलॉग 2026 के मंच से जयशंकर ने कहा, “हमें ईरान की तरफ से संदेश मिला कि उनके एक जहाज़ हमारे बंदरगाह में आना चाहता है. जहाज़ में तकनीकी समस्या थी और वह उस समय भारतीय सीमा के सबसे क़रीब था.”
उन्होंने बताया, “1 मार्च को भारत ने उन्हें अनुमति दी. यहां पहुंचने में कुछ दिन लगे, फिर वे कोच्चि में आकर रुके. जब वो यहां पहुंचे, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी. वो लोग अपने बेड़े की समीक्षा के लिए आ रहे थे और फिर वो किसी तरह से घटनाओं के गलत पक्ष में फंस गए.”
जयशंकर ने शरण देने वाले जहाज़ का नाम नहीं लिया है लेकिन इसका नाम ‘आईआरआईएस लावन’ बताया जा रहा है.
इसके अलावा एस जयशंकर से रायसीना डायलॉग के उसी सत्र में डुबोए गए ईरानी जहाज़ से जुड़े सवाल का जवाब भी दिया.
जयशंकर ने कहा, “अन्य जहाज़ों में से एक की श्रीलंका में भी ऐसी ही स्थिति थी. लेकिन जहाज़ को बदकिस्मती से नहीं बचाया जा सका.”
विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, “हमने इस पूरे मामले को इंसानियत के नज़रिए से देखा, कानूनी मुद्दों से अलग होकर. मुझे लगता है कि हमने सही काम किया.”
इस पर सोशल मीडिया पर बहुत बहस चल रही है.
एस जयसंकर ने कहा, “प्लीज़ हिंद महासागर की सच्चाई को समझिए. डिएगो गार्सिया पिछले पांच दशकों से हिंद महासागर में है. यह बात कि जिबूती में विदेशी सेनाएं मौजूद हैं, इस सदी के पहले दशक की शुरुआत में हुई थी. हंबनटोटा इसी दौरान सामने आया.”
उन्होंने कहा कि हिंद महासागर में “हम नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर हैं. लेकिन इस क्षेत्र में जो हक़ीक़त है उसको नहीं बदला जा सकता.”
“यह वैसा क्षेत्र है जहां पर इस समुद्री क्षेत्र के देशों के अलावा और भी बाक़ी के देश मौजूद हैं.”
इसके अलावा जयशंकर ने अमेरिकी उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफ़र लैंडौ के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी है.
रायसीना डायलॉग 2026 में क्रिस्टोफ़र लैंडौ ने कहा था कि भारत के साथ व्यापार और आर्थिक संबंध के विस्तार में अमेरिका चीन के साथ दो दशक पहले की गई ग़लतियों को नहीं दोहराएगा.
जयशंकर ने अब रायसीना डायलॉग में एक बयान दिया है जिसके बाद ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि यह लैंडों के बयान का जवाब है.
उन्होंने कहा कि भारत की तरक्की “रोकी नहीं जा सकती” है, और देश अपनी ताक़त के आधार पर अपनी ग्रोथ का रास्ता तय करेगा.
जयशंकर ने कहा, “आज जब हम देशों के आगे बढ़ने की बात करते हैं, तो देशों का आगे बढ़ना उसी देश से तय होता है. भारत का आगे बढ़ना भारत से तय होगा. यह हमारी ताक़त से तय होगा, दूसरों की ग़लतियों से नहीं.”
अमेरिकी उप-विदेश मंत्री ने क्या कहा था?
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इमेज कैप्शन, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने गुरुवार को नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग 2026 के दौरान अमेरिका के उप विदेश मंत्री क्रिस्टोफर लैंडौ से मुलाक़ात की
नई दिल्ली में बुधवार को रायसीना डायलॉग में क्रिस्टोफ़र लैंडौ ने कहा कि दोनों देशों के बीच ट्रेड डील लगभग पूरी होने के कगार पर है जिसको लेकर ‘हम बहुत उत्साहित हैं.’
उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि यह समझौता असल में लगभग असीम संभावनाओं के दरवाज़े खोलने की बुनियाद बन सकता है. भारत के साथ आर्थिक और व्यावसायिक अवसरों पर ध्यान देने को लेकर हम बहुत उत्साहित हैं.”
इसके साथ ही लैंडौ ने चेतावनी हुए कहा कि “हम भारत के साथ वही ग़लती नहीं दोहराएंगे जो हमने 20 साल पहले चीन के साथ की थी. मतलब हमने कहा- ‘आप इन सभी बाज़ारों में विस्तार कर सकते हैं और फिर अगली चीज़ हमने पाई कि आप तो हमें कई व्यावसायिक क्षेत्रों में मात दे रहे हैं’.”
इसके बाद क्रिस्टोफ़र लैंडौ ने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि वो जो भी क़दम उठाए वो उसके लोगों के लिए न्यायसंगत हो.
उन्होंने कहा, “हमें अपने लोगों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है, ठीक उसी तरह जैसे भारत सरकार को अपने नागरिकों के प्रति जवाबदेह होना पड़ता है.”
बीबीसी के लिए कलेक्टिव न्यूज़रूम की ओर से प्रकाशित.