राज्य ब्यूरो, जागरण, कोलकाता। उत्तर बंगाल में संताल संगठन के कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की टिप्पणियों पर छिड़े विवाद के बीच अब जंगलमहल में एक दशक पुरानी यादें ताजा हो गई हैं।
नवंबर 2015 में झाड़ग्राम शहर के बाहरी इलाके बेतकुंद्री मैदान में आयोजित संताली साहित्य सम्मेलन में झारखंड की तत्कालीन राज्यपाल के रूप में द्रौपदी मुर्मु शामिल हुई थीं। उस समय भी उनके दौरे के लिए प्रशासनिक अनुमति को लेकर भारी जटिलता पैदा हुई थी।
6-8 नवंबर 2015 को बेतकुंद्री मैदान में ‘आल इंडिया संताली राइटर्स एसोसिएशन’ का वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया था। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, सात नवंबर को द्रौपदी मुर्मु को रांची से हेलीकॉप्टर द्वारा पहुंचना था।
आयोजकों का दावा है कि सम्मेलन स्थल के पास हेलीकाप्टर उतारने की अनुमति के लिए प्रशासन से बार-बार आवेदन किया गया, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
अंतत: उनका हेलीकाप्टर रांची से कलाईकुंडा वायुसेना बेस पर उतरा, जहां से उन्हें सड़क मार्ग द्वारा कार से बेतकुंद्री मैदान पहुंचना पड़ा था।
उस संगठन के वर्तमान अखिल भारतीय अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू, जो 2015 में सम्मेलन के संयुक्त संयोजक थे, ने कहा कि उस समय प्रशासन के असहयोग से हमें बहुत दुख हुआ था। अब उत्तर बंगाल में जो हुआ, वह भी अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रशासन ने उस समय अनुमति क्यों नहीं दी, इसका कोई आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं है, लेकिन जिले में तत्कालीन कार्यरत एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी ने कहा कि वह उस समय भी भाजपा द्वारा मनोनीत राज्यपाल थीं, इससे अधिक कुछ कहना संभव नहीं है।