डिजिटल डेस्क, मुंबई। एफडीए ने महाराष्ट्र में एक फार्मा कंपनी पर बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए ने कैडिला फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड के पुणे, नागपुर और ठाणे स्थित तीन सीएफए वेयरहाउस के बिक्री और वितरण लाइसेंस रद कर दिए हैं।
यह कार्रवाई एसिलोक और एसिलोक+ ब्रांड की दवाओं से जुड़े नियामकीय उल्लंघनों के आधार पर की गई है। जुलाई 2026 में ठाणे जिले के भिवंडी, पुणे के वाडकी और नागपुर जिले के निमजी स्थित कंपनी के सीएफए वेयरहाउस में निरीक्षण किए गए थे।
इन निरीक्षणों में पाया गया कि अलग-अलग सक्रिय औषधीय अवयवों (एपीआई) वाली दवाओं को बहुत मिलते-जुलते ब्रांड नामों से बेचा जा रहा था, जिससे मरीजों को गलत दवा मिलने का खतरा पैदा हो सकता था।
कैडिला एसिलोक 150 और एसिलोक 300 को रैनिटिडिन सक्रिय तत्व के साथ बेच रहा था, जबकि एसिलोक 150+ और एसिलोक 300+ में फैमोटिडिन था। महाराष्ट्र एफडीए ने नोट किया कि सक्रिय तत्व बदलने के बावजूद ब्रांड नाम में सिर्फ ‘+’ का निशान ही अंतर पैदा कर रहा था।
इसके अलावा, एसिलोक 150+ 30 टैबलेट के पैक में और एसिलोक 300+ 20 टैबलेट के पैक में उपलब्ध था, जबकि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स रूल्स, 1945 की अनुसूची पी-1 के तहत फैमोटिडिन टैबलेट के लिए निर्धारित पैक साइज 14 टैबलेट है।
एक और बड़ी समस्या सप्लाई में गड़बड़ी की थी। कुछ मामलों में पुणे डिवीजन के थोक विक्रेताओं ने रैनिटिडिन आधारित एसिलोक 150/300 ऑर्डर किया था, लेकिन उन्हें फैमोटिडिन आधारित एसिलोक 150+/300+ भेज दिया गया।
कंपनी ने इस नियामकीय कार्रवाई को बॉम्बे हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। 11 अगस्त 2026 के आदेश में अदालत ने अधिकारियों को नए शो-कॉज नोटिस जारी करने और कंपनी को जवाब देने का मौका देने का निर्देश दिया था। लिखित जवाब और व्यक्तिगत सुनवाई के बाद लाइसेंसिंग अधिकारियों ने स्पष्टीकरण को असंतोषजनक पाया और लाइसेंस रद करने के तर्कपूर्ण आदेश पारित किए।
एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंडे ने उपभोक्ताओं से दवाओं के लेबल पर जेनेरिक नाम और खुराक जांचने की अपील की है। उन्होंने खुदरा विक्रेताओं को सलाह दी कि वे केवल प्रिस्क्रिप्शन के अनुसार ही दवाएं दें।