क्या होगा नुकसान
ग्लोबल फाइनेंशियल एडवाइज़री deVere Group के CEO निगेल ग्रीन ने बताया कि अमेरिकी टैरिफ भारत को वैकल्पिक व्यापार गुटों और रणनीतिक भागीदारों के करीब धकेल सकते हैं। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय निर्यात तुरंत कम प्रतिस्पर्धी हो जाते हैं। इससे निवेशकों का भरोसा कम होता है जबकि भारत चीन से भाग रही वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है। इसका मतलब है कि अगर भारत पर ज्यादा टैक्स लगेगा, तो भारत से सामान खरीदना महंगा हो जाएगा। इससे निवेशक भारत में पैसा लगाने से हिचकिचाएंगे।
हालांकि, SBI रिसर्च की एक हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप के टैरिफ का असर सीमित रहने की संभावना है। गोल्डमैन सैश, नोमुरा, मॉर्गन स्टेनली और फिच जैसे कई वैश्विक अनुसंधान और रेटिंग फर्मों और बैंकों ने भी यही बात कही है। SBI के विश्लेषण के अनुसार अमेरिकी टैरिफ का भारतीय निर्यात पर संभावित प्रभाव मामूली होगा। इसने लगभग 3 से 3.5 प्रतिशत की कमी का अनुमान लगाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का निर्यात विविधीकरण, मूल्य संवर्धन पर जोर, वैकल्पिक बाजारों की खोज और मध्य पूर्व के माध्यम से यूरोप से अमेरिका तक नए व्यापार मार्गों का विकास अमेरिकी टैरिफ के प्रभावों को कम कर देगा।
किन सेक्टर पर पड़ेगा असर
गोल्डमैन सैश का कहना है कि उभरते बाजारों के देशों के मुकाबले अमेरिका को भारत का सकल निर्यात सबसे कम है। फिच का कहना है कि बाहरी मांग पर भारत की कम निर्भरता इसे ‘कुछ हद तक अछूता’ बनाती है। इसका मतलब है कि भारत को दूसरे देशों से ज्यादा सामान खरीदने या बेचने की जरूरत नहीं है, इसलिए टैरिफ का उस पर ज्यादा असर नहीं होगा। ट्रंप के टैरिफ के बावजूद वैश्विक अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। IMF के जनवरी के विश्व आर्थिक आउटलुक के अनुसार भारत आने वाले वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएगा।
फेडरेशन ऑफ इंडिया एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के महानिदेशक अजय सहाय ने कहा कि भारत पर लगाया गया टैरिफ वियतनाम और बांग्लादेश जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम है। इससे भारतीय परिधान और फुटवियर क्षेत्रों को मदद मिल सकती है। इसका मतलब है कि भारत के कपड़े और जूते दूसरे देशों के मुकाबले सस्ते होंगे, जिससे उनकी बिक्री बढ़ सकती है। लगभग 14 बिलियन डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद और 9 बिलियन डॉलर से ज़्यादा के रत्न और आभूषण उन शीर्ष क्षेत्रों में शामिल हैं जिन पर अमेरिकी टैरिफ का असर पड़ेगा। 26% का टैरिफ ऑटो पार्ट्स और एल्यूमीनियम उत्पादों पर लागू नहीं होगा, लेकिन उन पर 25% का टैरिफ लगेगा जिसकी घोषणा ट्रंप ने पहले की थी।
भारत के लिए अमेरिका की अहमियत
व्हाइट हाउस ने कहा कि फार्मा और एनर्जी प्रोडक्ट्स को इस टैरिफ से अलग रखा गया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत अमेरिका को लगभग 9 बिलियन डॉलर की दवाएं निर्यात करता है। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर करने पर सहमति व्यक्त की है। 2021-22 से 2023-24 तक, अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार था। भारत के कुल निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 18 प्रतिशत और आयात में 6.22 प्रतिशत है। 2023-24 में अमेरिका के साथ भारत का ट्रेड सरप्लस 35.32 अरब डॉलर था।