डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। लोकसभा में सोमवार, 9 फरवरी को श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि कर्मचारी पेंशन योजना 1995 (ईपीएस-95) के तहत 9,000 रुपये से कम पेंशन प्राप्त करने वाले सक्रिय पेंशनभोगियों की कुल संख्या देश में 47.04 लाख है।
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के अनुसार, ईपीएस-95 के तहत वर्तमान पेंशनभोगियों की कुल संख्या 82,11,182 है।
एक प्रश्न के लिखित उत्तर में शोभा करंदलाजे बताया कि ट्रेड यूनियनों और जन प्रतिनिधियों सहित विभिन्न हितधारकों से इस योजना के तहत न्यूनतम पेंशन को मौजूदा एक हजार रुपये प्रति माह से बढ़ाने के लिए अभ्यावेदन प्राप्त हुए हैं।
शोभा करंदलाजे ने आगे बताया, कर्मचारी पेंशन कोष में नियोक्ता द्वारा वेतन का 8.33 प्रतिशत अंशदान और केंद्र सरकार द्वारा 15,000 रुपये प्रति माह तक के वेतन पर 1.16 प्रतिशत अंशदान शामिल है।
उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत सभी लाभ इसी कोष से दिए जाते हैं। उन्होंने बताया कि सरकार बजट सहायता के माध्यम से ईपीएस के तहत पेंशनभोगियों को न्यूनतम एक हजार रुपये प्रति माह की पेंशन प्रदान कर रही है, जो कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) को ईपीएस के लिए वेतन का 1.16 प्रतिशत बजट सहायता के अतिरिक्त है।
उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार ईपीएफ योजना, 1952, ईपीएस-95 और ईडीएलआइ योजनाओं के माध्यम से ईपीएफओ द्वारा संचालित इन योजनाओं के सदस्यों को मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
पुरानी पेंशन योजना से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर पड़ेगा दबाव
वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक लिखित उत्तर में बताया कि बिना निधि वाली पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) से राज्यों की वित्तीय स्थिति पर गंभीर दबाव पड़ने की संभावना है। इससे राज्यों द्वारा किए जाने वाले पूंजीगत व्यय सीमित हो सकते हैं और दीर्घकालिक वित्तीय देनदारियां उत्पन्न हो सकती हैं।
राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश की राज्य सरकारों ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) से पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) में वापस जाने के बारे में सरकार को सूचित किया है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की हालिया राज्य वित्त लेखापरीक्षा रिपोर्टों का हवाला देते हुए चौधरी ने कहा कि इनमें कुछ राज्यों द्वारा ओपीएस में वापस जाने के वित्तीय प्रभावों को उजागर किया गया है।